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समय पर सरकार की मंजूरी न मिलने से भारत नहीं सुन पाया गुरुत्वाकर्षण तरंगें

Mon, 15 Feb 2016 11:56 AM IST
Updated Mon, 15 Feb 2016 11:56 AM IST
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Indian government didn't give approval to fix Ligo on time

अगर समय पर भारत सरकार की मंजूरी मिल गई तो अमेरिका की तरह भारत भी गुरुत्वाकर्षण तरंगों की आवाज सुन सकता था। अमेरिका के इन तरंगों को सुनने में भारतीय संस्थानों जैसे रमण रिसर्च इंस्टीट्यूट, बंगलूरू सहित कई अन्य संस्थानों का सीधा योगदान रहा है।

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अमेरिका के बाहर पहले और दुनिया के तीसरे ऐसे डिक्टेटर को भारत में स्थापित करने की योजना सरकार के पास 2011 से लंबित है। अगर भारत सरकार ने इस पर तुरंत निर्णय लिया होता तो गुरुत्वाकर्षण तरंगों की आवाज भारत भी सुन सकता था।
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2014 संप्रग सरकार के प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने इस योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी लेकिन इस बड़ी वैज्ञानिक परियोजना के लिए फंड का आवंटन करने में विफल रही थी।

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भारतीय वैज्ञानिक हुए गदगद

Indian government didn't give approval to fix Ligo on time

इसके विपरीत जब इस अनूठी खोज का अवसर से हाथ से निकल गया तो इसकी वैश्विक घोषणा के 20 मिनट के भीतर ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इससे भारतीय वैज्ञानिक समुदाय काफी खुश हुआ है।

मोदी ने कहा था, ‘गुरुत्वाकर्षण तरंगों की ऐतिहासिक खोज से ब्रह्मांड को समझने का एक नया रास्ता मिला है। मुझे गर्व है कि भारतीय वैज्ञानिकों इस चुनौतीपूर्ण काम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुझे उम्मीद है कि भारतीय वैज्ञानिक देश में एडवांस्ड गुरुत्वाकर्षण तरंग डिटेक्टर स्थापित करने के साथ इससे भी बड़ा योगदान करेंगे।’


अपने कथन के अंतिम वाक्य से प्रधानमंत्री ने भारतीय खगोलविद समुदाय को गदगद कर दिया कि भारत में विश्व के तीसरे लेसर इंटरफेरोमीटर ग्रैविटेशन वेव ऑब्जर्वेटरी (लिगो) का सपना साकार होगा।

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