{"_id":"28edc430-51ec-11e2-9941-d4ae52bc57c2","slug":"indian-gang-rape-victim-dies-in-singapore-hospital","type":"story","status":"publish","title_hn":"दरिंदों की दुनिया छोड़ गई बिटिया","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
दरिंदों की दुनिया छोड़ गई बिटिया
नई दिल्ली/सिंगापुर/एजेंसी
Updated Sun, 30 Dec 2012 05:14 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उसका कसूर सिर्फ यही था कि वह लड़की थी। छह दरिंदों ने उसे और उसकी जिंदगी को हैवानियत के साथ रौंद डाला। पहले उन हैवानों से और बाद में मौत से 13 दिनों तक वह पूरी बहादुरी से लड़ी। लेकिन गंभीर जख्मों के आगे आखिर जिंदगी हार गई और शुक्रवार देर रात 2:15 बजे उसकी सांसें टूट गईं।
विज्ञापन
बिना जाने कि उसके साथ हुई इस हैवानियत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। बिना जाने कि वह पूरी व्यवस्था में बदलाव की मांग की वजह बन चुकी है। बिना जाने कि उसके लिए पूरा देश रो रहा है। देश की यह बिटिया दरिंदों की दुनिया छोड़ चुकी थी।
विज्ञापन
16 दिसंबर की रात देश की राजधानी में चलती बस में दरिंदगी का शिकार हुई युवती के लिए दुआएं भी नाकाम रहीं। उसके साथ हुई हैवानियत पर देश में भड़का गुस्सा उसके निधन के बाद दर्द बनकर आंखों से बरस रहा था। उसे श्रद्धांजलि देने के लिए हजारों लोग सड़कों पर उतर पड़े।
विज्ञापन
लोगों की बस यही मांग थी कि सरकार कुछ करे ताकि देश की फिर किसी बिटिया के साथ ऐसी दरिंदगी न हो। लेकिन गैंगरेप पर पहले जनता का गुस्सा देख चुकी सहमी सरकार ने पूरी दिल्ली में धारा 144 लगा दी। 10 मेट्रो स्टेशनों को भी बंद कर दिया गया। इंडिया गेट और राजपथ के रास्ते सील कर दिए गए। लेकिन यह पाबंदियां गुस्से और गम से भरे युवाओं, लोगों को नहीं रोक सकीं। दिल्ली में जंतर मंतर समेत कई स्थानों पर लोग बड़ी संख्या में जुटे। कई अन्य शहरों और विदेश में भी प्रदर्शन हुए।
इससे पहले सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल ने शनिवार तड़के युवती के निधन की जानकारी दी। अस्पताल के सीईओ डॉ. केल्विन लो ने कहा कि बहादुर युवती ने रात 2:15 बजे (भारतीय समय के मुताबिक) अंतिम सांस ली। उसके कई अहम अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। उसके परिवार के लोग अंतिम समय में उसके पास थे। एक विशेष चार्टर्ड विमान सिंगापुर से उसका शव लेकर आधी रात के करीब दिल्ली पहुंचा। युवती का अंतिम संस्कार रविवार को किया जा सकता है।
बिटिया पूरे गांव की दुलारी थी। अगर वह चाहती तो दरिंदों के आगे समर्पण कर जान बचा सकती थी लेकिन उसने मान सम्मान की रक्षा करने की पूरी कोशिश की, जिसमें उसकी जान चली गई।
शिवमंदिर सिंह, युवती के गांव के प्रधान
शीला पर फूटा प्रदर्शनकारियों का गुस्सा
गैंगरेप पीड़िता को जंतर मंतर पर श्रद्धांजलि देने पहुंचीं दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को प्रदर्शनकारियों के कडे़ विरोध के चलते उल्टे पांव लौटना पड़ा। दोपहर करीब सवा दो बजे शीला जंतर मंतर पहुंचीं तो भीड़ ने उनके खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। शीला वापस जाओ के नारे लगे। लोगों ने उन्हें घेर लिया। लोगों ने शीला पर युवती की मौत को राजनीतिक रंग देने का आरोप भी लगाया। भीड़ के गुस्से और विरोध को देखते हुए शीला ने वहां से लौटना ही बेहतर समझा।
यूं टूटी जिंदगी की लड़ी
16 दिसंबर : रात युवती से चलती बस में छह दरिंदों ने किया गैंगरेप
17 दिसंबर : सफदरजंग अस्पताल में उसकी पहली सर्जरी हुई। युवती को वेंटिलेटर पर रखा गया।
19 दिसंबर : दूसरी सर्जरी, इंफेक्शन के चलते उसकी पूरी आंत निकाली गई।
21 दिसंबर : हालत में कुछ सुधार के बाद वेंटिलेटर से हटाया गया
23 दिसंबर : बढ़ते इंफेक्शन को रोकने के लिए तीसरी सर्जरी हुई, फिर वेंटिलेटर पर रखा
25 दिसंबर : आधी रात को उसे हार्टअटैक पड़ा, जिससे उसके दिमाग में गंभीर चोट पहुंची
26 दिसंबर : रात में 11:45 बजे उसे एयर एंबुलेंस से सिंगापुर ले जाया गया
27 दिसंबर : सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में शुरू हुआ इलाज
28 दिसंबर : उसके कई अहम अंगों ने काम करना बंद किया, रात 2:15 बजे ली अंतिम सांस
हमें यह बताते हुए बेहद दुख हो रहा है कि हिम्मती युवती नहीं रही। उसके परिवार के सदस्य और भारतीय उच्चायोग के लोग अंतिम समय में उसके पास थे।
केल्विन लो, सीईओ, माउंट एलिजाबेथ हॉस्पिटल
युवती अंत तक मौत से बहादुरी से लड़ी। उसकी जिंदगी के अंतिम कुछ घंटे उसके परिवार के लिए बेहद मुश्किल रहे। मुसीबत की इस घड़ी में परिवार ने साहस दिखाया है।
टीसीए राघवन, सिंगापुर में भारतीय उच्चायुक्त
मेरी पोती बेहद बहादुर थी और उसने आखिर तक हार नहीं मानी। बिटिया की पढ़ाई पूरी हो गई थी और उसे 35 हजार रुपये महीने तनख्वाह भी मिलनी शुरू हो गई थी। लेकिन बिटिया अब हमसे दूर जा चुकी है। हम बस यही चाहते हैं कि सरकार कुछ ऐसा करे कि हमारी पोती जैसी घटना किसी और लड़की के साथ न हो।
युवती के दादा