फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   Indian doctors forces tests on patients

भारतीय डॉक्टरों पर मरीजों से होता है पैसे वसूलने का दबाव

Fri, 04 Sep 2015 10:51 PM IST
Updated Fri, 04 Sep 2015 10:51 PM IST
विज्ञापन
Indian doctors forces tests on patients

हमारे देश में डॉक्टर को एक तरह से भगवान का दर्जा दिया जाता है। मगर, हकीकत इसके ठीक उलट हो चुकी है। आज के दौर में भारत में निजी अस्पतालों में काम करने वाले ज्यादातर डॉक्टरों पर मरीजों से ज्यादा पैसे वसूलने का दबाव होता है।

विज्ञापन


इसलिए ये डॉक्टर मरीजों को गैरजरूरी, महंगे और खतरनाक टेस्ट कराने से गुरेज नहीं करते। ताकि अस्पताल और उन्हें मोटी रकम हासिल हो सके। ब्रिटेन के एक प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल द बीएमजे (ब्रिटिश मेडिकल जर्नल) ने यह दावा किया है।
विज्ञापन


इस साप्ताहिक पत्रिका को दिए एक इंटरव्यू में कोलकाता में हदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर गौतम मिस्त्री ने कहा, ‘डॉक्टरों पर अस्पताल प्रबंधन का काफी दबाव होता है। उनसे बेवजह की सर्जरी कराने या फिर मरीजों की जांच का दबाव होता है। ऐसा नहीं करने पर उन्हें नौकरी गंवाने का डर रहता है।’
विज्ञापन
विज्ञापन

एमसीआई की प्रतिष्ठा दांव पर

Indian doctors forces tests on patients

पुणे के  एक गैर सरकारी संगठन साथी ने पहली बार इस समस्या को बाकायदा उठाया है। इसकी हाल की रिपोर्ट में 78 डॉक्टरों समेत गाइनेकोलॉजिस्ट अरुण गरदारे के हवाले से कहा गया है कि भारत में मल्टी स्पेशिएलिटी हास्पिटलों की बाढ़ सी आ गई है।

इन अस्पतालों का मुख्य उद्देश्य हर हाल में जमकर पैसे कमाना है और अपने निवेशकों को फायदा पहुंचाना है। वहीं अमेरिका के ओहियो में एचआईवी कंसल्टेंट और प्रोफेसर कुणाल साहा कहते हैं, ‘बड़ी संख्या में मरीजों को सर्जरी की सलाह दी जाती है और कई जांचों के लिए बेवजह की जांच के लिए अस्पतालों में भर्ती कराया जाता है, ताकि मोटी कमाई हो सके।’

मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) भारत में चिकित्सा सेवाओं पर लगाम लगाती है। वहीं, बीएमजे रिपोर्ट तैयार करने वाली बंगलूरू की पत्रकार मीरा के कहती हैं कि एमसीआई की प्रतिष्ठा दांव पर है। वह डॉक्टरों की लापरवाही पर लगाम लगा पाने में नाकाम साबित हो रही है।

जरूरत है इसके ढांचे में आमूलचूल बदलाव लाने की। हालांकि एमसीआई ने इस रिपोर्ट में अभी तक चुप्पी साध रखी है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed