भारतीय डॉक्टरों पर मरीजों से होता है पैसे वसूलने का दबाव
हमारे देश में डॉक्टर को एक तरह से भगवान का दर्जा दिया जाता है। मगर, हकीकत इसके ठीक उलट हो चुकी है। आज के दौर में भारत में निजी अस्पतालों में काम करने वाले ज्यादातर डॉक्टरों पर मरीजों से ज्यादा पैसे वसूलने का दबाव होता है।
इसलिए ये डॉक्टर मरीजों को गैरजरूरी, महंगे और खतरनाक टेस्ट कराने से गुरेज नहीं करते। ताकि अस्पताल और उन्हें मोटी रकम हासिल हो सके। ब्रिटेन के एक प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल द बीएमजे (ब्रिटिश मेडिकल जर्नल) ने यह दावा किया है।
इस साप्ताहिक पत्रिका को दिए एक इंटरव्यू में कोलकाता में हदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर गौतम मिस्त्री ने कहा, ‘डॉक्टरों पर अस्पताल प्रबंधन का काफी दबाव होता है। उनसे बेवजह की सर्जरी कराने या फिर मरीजों की जांच का दबाव होता है। ऐसा नहीं करने पर उन्हें नौकरी गंवाने का डर रहता है।’
एमसीआई की प्रतिष्ठा दांव पर
पुणे के एक गैर सरकारी संगठन साथी ने पहली बार इस समस्या को बाकायदा उठाया है। इसकी हाल की रिपोर्ट में 78 डॉक्टरों समेत गाइनेकोलॉजिस्ट अरुण गरदारे के हवाले से कहा गया है कि भारत में मल्टी स्पेशिएलिटी हास्पिटलों की बाढ़ सी आ गई है।
इन अस्पतालों का मुख्य उद्देश्य हर हाल में जमकर पैसे कमाना है और अपने निवेशकों को फायदा पहुंचाना है। वहीं अमेरिका के ओहियो में एचआईवी कंसल्टेंट और प्रोफेसर कुणाल साहा कहते हैं, ‘बड़ी संख्या में मरीजों को सर्जरी की सलाह दी जाती है और कई जांचों के लिए बेवजह की जांच के लिए अस्पतालों में भर्ती कराया जाता है, ताकि मोटी कमाई हो सके।’
मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) भारत में चिकित्सा सेवाओं पर लगाम लगाती है। वहीं, बीएमजे रिपोर्ट तैयार करने वाली बंगलूरू की पत्रकार मीरा के कहती हैं कि एमसीआई की प्रतिष्ठा दांव पर है। वह डॉक्टरों की लापरवाही पर लगाम लगा पाने में नाकाम साबित हो रही है।
जरूरत है इसके ढांचे में आमूलचूल बदलाव लाने की। हालांकि एमसीआई ने इस रिपोर्ट में अभी तक चुप्पी साध रखी है।