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हेलीकॉप्टर सौदे में घूस के आरोपों से हिली यूपीए सरकार

नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Tue, 12 Feb 2013 10:44 PM IST
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भ्रष्टाचार के अनेक आरोपों से जनता का ध्यान भटकाने में लगी यूपीए सरकार अब इटली से खरीदे अत्याधुनिक हेलीकॉप्टरों के सौदे में घूस खाए जाने के मामले में जवाब ढूंढती नजर आ रही है।
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अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदे में घूस देने के आरोपों में इटली में फिनमैकानिका कंपनी के सीईओ गियूसेप्पे ओरसी को गिरफ्तार किया गया है। इससे हमारी सरकार में हड़कंप मच गया है। सवाल यह है कि इटली की कंपनी ने घूस दी, तो भारत में घूस किसने ली? आगामी संसद सत्र में इस मुद्दे पर विपक्ष का हंगामा रोकने के लिए पहले ही सीबीआई जांच कराने की घोषणा कर दी है।


देश के वीवीआईपी लोगों के लिए खरीदे जा रहे इस हेलीकॉप्टर के लिए हुए करीब 3600 करोड़ रुपए के सौदे में भारत सरकार को 362 करोड़ की रिश्वत के गंभीर आरोप सामने आए हैं। इटली में इस मामले को लेकर मुकदमा शुरू हो चुका है। सरकार को इससे उठने वाले सियासी तूफान में घिरने की आशंका बेचैन कर रही है। ऐसे में विपक्ष की मांग से पहले ही रक्षामंत्री एके एंटनी ने तत्काल बयान जारी कर सीबीआई को इसकी जांच सौंपने का ऐलान कर दिया।

हेलीकॉप्टर सौदे को लेकर मंगलवार को इटली में हुई ओरसी की गिरफ्तारी की सुर्खियां आते ही सरकार ने सीबीआई जांच का दांव चल दिया। मगर मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने संसद सत्र में इस मामले पर सवाल उठाकर सरकार की सियासी घेरेबंदी का पुख्ता संकेत दे दिए हैं। गौरतलब है कि भारत ने फरवरी 2010 में इटली सरकार की अधीनस्थ फिनमैकानिका कंपनी के साथ राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री समेत वीवीआईपी के लिए 12 अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर खरीदने का सौदा किया था।

उल्लेखनीय है कि कंपनी के सीईओ गियूसेप्पे ओरसी भारत समेत दूसरे मुल्कों में हेलीकॉप्टर सौदे के लिए घूस देने के मामले में रोम में काफी समय से जांच के दायरे में थे। वैसे ओरसी ने आरोपों से इनकार किया है।

इस अत्याधुनिक हेलीकॉप्टर सौदे में अगस्ता वेस्टलैंड को रक्षा मंत्रालय ने मुकाबले में खड़ी एक अमेरिकी कंपनी से बेहतर आंका था। तब समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। इसमें इंटिग्रिटी समझौता भी था, जिसके तहत सौदे में रिश्वत लेन-देन का मामला सामने आने पर सौदा रद्द करने और जमानत राशि जब्त करने का प्रावधान है। सौदे पर घूस के दाग केबाद शेष हेलीकाप्टरों की डिलीवरी पर संशय के बादल मंडराने लगे हैं। भारत को अब तक तीन हेलीकॉप्टर मिल चुके हैं।

रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि इस सौदे में घूस का आरोप जब सामने आया था तब सरकार ने इटली और ब्रिटेन की सरकारों से जानकारी मांगी थी। मगर अभी तक दोनों सरकारों ने इस बारे में कुछ नहीं बताया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि अभी तक इटली सरकार ने इस मामले के अदालती प्रक्रिया के अधीन होने का हवाला देते हुए कोई ब्यौरा देने में अपनी असमर्थता जाहिर की है। फिर भी भारतीय दूतावास इटली सरकार से जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहा है।

- समझौता : भारत-इटली में फरवरी 2010 में 12 एडब्ल्यू-101 हेलीकॉप्टर खरीद का सौदा हुआ। अमेरिकी सिकोरस्की एस-92 सुपरहॉक भी दौड़ में था। एडब्ल्यू-101 को रूस में बने पुराने पड़ते जा रहे एमआई-8 और एमआई-17एस की जगह लेनी थी।

- वीवीआईपी सवारी : ये हेलीकॉप्टर वायुसेना की एलीट कम्युनिकेशन स्क्वाड्रन के लिए खरीदे गए। इस स्कवाड्रन पर देश के शीर्ष नेताओं (राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य वीवीआईपी) की उड़ान की जिम्मेदारी है।

- वर्तमान स्थिति : दोनों देशों के बीच सौदे में ईमानदारी और पारदर्शिता का करार था। दिसंबर 2012 में तीन हेलीकॉप्टर मिले। बाकी नौ भी इस साल मिलने की संभावना थी। लेकिन रिश्वत का सच सामने आने तक सरकार ने सौदे का कार्यान्वयन रोका।

किसको दी गई घूस?
इस सौदे में इटली की कंपनी ने भारत में किसको घूस दी गई, इस सवाल का जवाब हर कोई जानना चाह रहा है। सूत्रों के अनुसार वित्त मंत्रालय को इस सौदे पर आपत्ति थी। इसके बावजूद सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने सौदे को 2010 में मंजूरी दी थी। रक्षा मंत्री एंटनी तब कहा था, ‘एयरफोर्स और एसपीजी लगातार कह रही थी कि बदले सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए हमें नए हेलीकॉप्टरों की जरूरत है... वित्त मंत्रालय ने भी बाद में यह बात स्वीकार की। तब कैबिनेट समिति ने फैसला लिया।’

सीबीआई क्या करेगी?

भारत सरकार ने घूस की जांच का यह मामला सीबीआई को सौंप तो दिया है, लेकिन फिलहाल इसमें कुछ हो सकेगा यह संदेह है। इटली सरकार ने अपनी जांच भारत के साथ साझा करने से इनकार कर दिया है। उसने कहा कि यह मामला कानूनी प्रक्रिया में है, इसलिए कुछ बताया नहीं जा सकता। कुछ महीनों पहले यूरोप में इस सौदे के दो बिचौलियों की गिरफ्तारी की खबर थी। अत: सरकार ने ब्रिटेन से भी इस मसले में मदद करने का अनुरोध किया। वहां भी उसे कामयाबी नहीं मिली। ऐसे में बिना किसी सूत्र के सीबीआई कैसे भारतीय पहलू की जांच करेगी, यह देखना रोचक होगा।

इटली कनेक्शन से असहज कांग्रेस
एक बार फिर रक्षा संबंधी सौदे में इटली का नाम आने से कांग्रेसी नेता असहज नजर आ रहे हैं। उल्लेखनीय है कि 1987 में बोफोर्स कांड में इटली का नाम आया था, जब खुलासा हुआ था कि वहां के व्यापारी ओत्तावियो क्वात्रोची ने बिचौलिये की भूमिका अदा की है। इस पर आज भी विवाद है। ऐसे में इटली की कंपनी के साथ हेलीकॉप्टर में घूस की बात आने पर कांग्रेस में खलबली है।

ऐसा है एडब्ल्यू 101
- तीन से चार क्रू मेंबर और आठ सैनिक ढोने की क्षमता।
- 14,600 किलो वजन उठा सकता है, तीन इंजन से लैस।
- 309 किमी प्रति घंटा है अधिकतम रफ्तार।
- 15000 फीट इसकी फ्लाइंग हाईट।
- एक बार में लगातार 833 किमी तक उड़ सकता है।
- इसे ईएच 101 और मर्लिन के नाम से भी जाना जाता है।
- खासियत : मिसाइल हमलों से बचाव के लिए चेतावनी सिस्टम, स्वदेशी अवॉक्स प्रणाली से लैस, संचार की पुख्ता व्यवस्था।

- 12 हेलीकॉप्टरों का सौदा कुल 3600 करोड़ रुपये में।
- 362 करोड़ रुपये की रिश्वत दी गई।

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