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नेपाल बॉर्डर पर भारतीय वाहनों पर हमला
गोरखपुर/काठमांडू/ब्यूरो
Updated Sun, 30 Sep 2012 12:01 AM IST
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नेपाल एक बार फिर ‘भारत-विरोधी मानसिकता की आग’ में जल रहा है। वहां भारतीय नंबरों वाली गाड़ियों को रोकर तोड़फोड़ की जा रही है। भारतीयों पर हमले हो रहे हैं। नतीजा, सौनोली बॉर्डर से कोल्हुई तक 16 किलोमीटर लंबा जाम लगा है। हजारों व्यापारिक ट्रक नेपाल नहीं जा पा रहे हैं, जबकि हजारों पर्यटक यहां फंसे हैं। नेपाली माओवादियों के एक गुट के संकीर्ण वैचारिक रवैये का खामियाजा आम लोग भुगत रहे हैं।
असल में नेपाल के सत्ताधारी माओवादियों (यूसीपीएन-एम) से अलग हुए गुट (सीपीएन-एम) ने भारत विरोधी आंदोलन चला रखा है। बीते कुछ दिनों से चल रहा सीपीएन-एम का आंदोलन बृहस्पतिवार से हिंसक हो गया। शनिवार को महराजगंज जिले के सोनौली और बढ़नी बार्डर के आगे भारतीय वाहनों का प्रवेश नेपाल में नहीं हो सका। बीती रात यहां से थोड़ी ढील मिलने पर कुछ वाहन नेपाल गए, मगर लौटते समय माओवादियों ने उनके शीशे तोड़े और कागजात छीन लिए। इसके अलावा दर्जन भर बाइक सवारों को पीटा गया।
इन बातों से सीमा पर तनाव बढ़ गया है। पर्यटक नेपाल जाने से डर कर बॉर्डर पर रुके हैं। वैसे देर शाम विद्रोही माओवादियों ने एक बयान जारी कर कहा है कि आवश्यक वस्तुओं से लदे वाहनों को नहीं रोका जाएगा। विरोधियों ने अपने आंदोलन को ‘फिलहाल प्रतीकात्मक’ बताते हुए इसे 25 अक्तूबर तक चलाने की घोषणा की है। उसने नेपाली प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टाराई को चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गई, तो ‘जनविद्रोह और जनयुद्ध’ किया जाएगा। हालांकि विभिन्न राजनीतिक दलों ने सीपीएन-एम के विरोध की आलोचना की है।
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उल्लेखनीय है कि गोरखपुर, सिद्धार्थनगर और महराजगंज से रोजाना करीब 1000 वाहनों का नेपाल आना-जाना होता है। सिद्धार्थनगर बार्डर पर तीन दिन से मौसमी फल लादकर आए सीतापुर के ट्रक ड्राइवर मंजीत सिंह ने बताया कि नेपाल में माओवादी मालवाहक गाड़ियों पर हमले कर रहे हैं। इसलिए हम आगे नहीं बढ़ रहे हैं। इस बीच नेपाल के कई जनपदों में सब्जियों और खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ गए हैं। शनिवार को आलू लदे पांच ट्रकों को पुलिस सुरक्षा में नेपाल भेजा गया।
गोरखपुर से गाड़ियां नेपाल नहीं जा रही हैं। दो दिनों से बुकिंग बंद है। पर्यटन विभाग के मुताबिक, गोरखपुर से नेपाल को रोजाना 300 विदेशी पर्यटक जाते हैं। यात्रियों के न मिलने से वाहन स्वामियों की रोजी-रोटी पर संकट मंडराने लगा है। इसी तरह से गोरखपुर के रास्ते रोजाना 200-250 ट्रकों में नमक, चावल, कपड़ा, दैनिक उपभोग की सामग्री, जनरल मर्चेंट, किराना, मसाला, पेट्रोल, डीजल, केरोसिन नेपाल जाता है। नेपाल का बड़ा बाजार गोरखपुर है। वहां दिक्कत जारी रही तो इसका असर व्यापार पर पड़ना तय है।
भारत विरोधियों की मांग
- भारतीय नंबर प्लेट वाली गाड़ियों का नेपाल में प्रवेश बंद हो।
- भारतीय फिल्मों और हिंदी गानों पर सरकार प्रतिबंध लगाए।
- भारतीय निवेश वाले कारोबार पर नेपाल में रोक लगाई जाए।
- भारतीय शैक्षणिक संस्थाओं का नेपाल में संचालन बंद हो।
राजनीतिक है संकट
सत्ताधारी माओवादियों के दो खेमों में बंट जाने से यह संकट खड़ा हुआ है। एक गुट (यूसीपीएन-एम) सत्तासीन है तो दूसरा (सीपीएन-एम) बागी होकर सामने आया है। विरोधी गुट का नेतृत्व वहां के माओवादी नेता मोहन बैद्य किरण कर रहे हैं। बैद्य खेमे ने प्रधानमंत्री डॉ.बाबूराम भट्टाराई द्वारा भारतीयों को सुरक्षा देने के बयान को चुनौती दी है। अत: वे भारतीय गाड़ियों पर हमले कर रहे हैं। यह संकट पूरी तरह राजनीतिक है।
चीन समर्थक हैं मोहन बैद्य किरण
सीपीएन-एम के नेता मोहन बैद्य किरण हैं, जो सदा ही भारत विरोधी और चीन के समर्थक रहे हैं। सरकार से अलग होने के बाद वह एक महीने पहले चीन होकर लौटे हैं। उनका आरोप है कि सत्ताधारी पार्टी भारत समर्थक है और नेपाल के हितों को ताक पर रख कर भारतीय हित के काम करती है। उनकी पार्टी ने 70 बिंदुओं का मांग पत्र भट्टाराई को दिया है, जिसमें भारत से आयात से लेकर भारत से कारोबार तक का विरोध किया गया है।
भारतीय वाहनों कों देंगे सुरक्षा: सचिवालय
नेपाली प्रधानमंत्री के निजी सचिवालय से जारी पत्र में भारतीय वाहनों को सुरक्षा मुहैया कराने तथा गुंडागर्दी करने वालों के साथ कड़ाई से निपटने का बीत कही गई है।
बैकफुट पर आए माओवादी
भारतीय गाड़ियों पर रोक लगाने की मांग पर विभिन्न दलों द्वारा आलोचना के बाद बैद्य गुट अब बैकफुट पर आ गया है। शनिवार को इस गुट और इससे जुड़े संगठनों ने कहा कि पेट्रोल, डीजल, गैस सहित दैनिक उपभोग की वस्तुएं लाने-ले जाने वाले भारतीय वाहनों की राह में अवरोध उत्पन्न नही करेगें। उन्होंने आम नागरिकों को भी परेशान न करने की बात कही है।
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असल में नेपाल के सत्ताधारी माओवादियों (यूसीपीएन-एम) से अलग हुए गुट (सीपीएन-एम) ने भारत विरोधी आंदोलन चला रखा है। बीते कुछ दिनों से चल रहा सीपीएन-एम का आंदोलन बृहस्पतिवार से हिंसक हो गया। शनिवार को महराजगंज जिले के सोनौली और बढ़नी बार्डर के आगे भारतीय वाहनों का प्रवेश नेपाल में नहीं हो सका। बीती रात यहां से थोड़ी ढील मिलने पर कुछ वाहन नेपाल गए, मगर लौटते समय माओवादियों ने उनके शीशे तोड़े और कागजात छीन लिए। इसके अलावा दर्जन भर बाइक सवारों को पीटा गया।
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इन बातों से सीमा पर तनाव बढ़ गया है। पर्यटक नेपाल जाने से डर कर बॉर्डर पर रुके हैं। वैसे देर शाम विद्रोही माओवादियों ने एक बयान जारी कर कहा है कि आवश्यक वस्तुओं से लदे वाहनों को नहीं रोका जाएगा। विरोधियों ने अपने आंदोलन को ‘फिलहाल प्रतीकात्मक’ बताते हुए इसे 25 अक्तूबर तक चलाने की घोषणा की है। उसने नेपाली प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टाराई को चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गई, तो ‘जनविद्रोह और जनयुद्ध’ किया जाएगा। हालांकि विभिन्न राजनीतिक दलों ने सीपीएन-एम के विरोध की आलोचना की है।
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उल्लेखनीय है कि गोरखपुर, सिद्धार्थनगर और महराजगंज से रोजाना करीब 1000 वाहनों का नेपाल आना-जाना होता है। सिद्धार्थनगर बार्डर पर तीन दिन से मौसमी फल लादकर आए सीतापुर के ट्रक ड्राइवर मंजीत सिंह ने बताया कि नेपाल में माओवादी मालवाहक गाड़ियों पर हमले कर रहे हैं। इसलिए हम आगे नहीं बढ़ रहे हैं। इस बीच नेपाल के कई जनपदों में सब्जियों और खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ गए हैं। शनिवार को आलू लदे पांच ट्रकों को पुलिस सुरक्षा में नेपाल भेजा गया।
गोरखपुर से गाड़ियां नेपाल नहीं जा रही हैं। दो दिनों से बुकिंग बंद है। पर्यटन विभाग के मुताबिक, गोरखपुर से नेपाल को रोजाना 300 विदेशी पर्यटक जाते हैं। यात्रियों के न मिलने से वाहन स्वामियों की रोजी-रोटी पर संकट मंडराने लगा है। इसी तरह से गोरखपुर के रास्ते रोजाना 200-250 ट्रकों में नमक, चावल, कपड़ा, दैनिक उपभोग की सामग्री, जनरल मर्चेंट, किराना, मसाला, पेट्रोल, डीजल, केरोसिन नेपाल जाता है। नेपाल का बड़ा बाजार गोरखपुर है। वहां दिक्कत जारी रही तो इसका असर व्यापार पर पड़ना तय है।
भारत विरोधियों की मांग
- भारतीय नंबर प्लेट वाली गाड़ियों का नेपाल में प्रवेश बंद हो।
- भारतीय फिल्मों और हिंदी गानों पर सरकार प्रतिबंध लगाए।
- भारतीय निवेश वाले कारोबार पर नेपाल में रोक लगाई जाए।
- भारतीय शैक्षणिक संस्थाओं का नेपाल में संचालन बंद हो।
राजनीतिक है संकट
सत्ताधारी माओवादियों के दो खेमों में बंट जाने से यह संकट खड़ा हुआ है। एक गुट (यूसीपीएन-एम) सत्तासीन है तो दूसरा (सीपीएन-एम) बागी होकर सामने आया है। विरोधी गुट का नेतृत्व वहां के माओवादी नेता मोहन बैद्य किरण कर रहे हैं। बैद्य खेमे ने प्रधानमंत्री डॉ.बाबूराम भट्टाराई द्वारा भारतीयों को सुरक्षा देने के बयान को चुनौती दी है। अत: वे भारतीय गाड़ियों पर हमले कर रहे हैं। यह संकट पूरी तरह राजनीतिक है।
चीन समर्थक हैं मोहन बैद्य किरण
सीपीएन-एम के नेता मोहन बैद्य किरण हैं, जो सदा ही भारत विरोधी और चीन के समर्थक रहे हैं। सरकार से अलग होने के बाद वह एक महीने पहले चीन होकर लौटे हैं। उनका आरोप है कि सत्ताधारी पार्टी भारत समर्थक है और नेपाल के हितों को ताक पर रख कर भारतीय हित के काम करती है। उनकी पार्टी ने 70 बिंदुओं का मांग पत्र भट्टाराई को दिया है, जिसमें भारत से आयात से लेकर भारत से कारोबार तक का विरोध किया गया है।
भारतीय वाहनों कों देंगे सुरक्षा: सचिवालय
नेपाली प्रधानमंत्री के निजी सचिवालय से जारी पत्र में भारतीय वाहनों को सुरक्षा मुहैया कराने तथा गुंडागर्दी करने वालों के साथ कड़ाई से निपटने का बीत कही गई है।
बैकफुट पर आए माओवादी
भारतीय गाड़ियों पर रोक लगाने की मांग पर विभिन्न दलों द्वारा आलोचना के बाद बैद्य गुट अब बैकफुट पर आ गया है। शनिवार को इस गुट और इससे जुड़े संगठनों ने कहा कि पेट्रोल, डीजल, गैस सहित दैनिक उपभोग की वस्तुएं लाने-ले जाने वाले भारतीय वाहनों की राह में अवरोध उत्पन्न नही करेगें। उन्होंने आम नागरिकों को भी परेशान न करने की बात कही है।