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भारतीय सैनिक बंकरों में कर सकेंगे प्रकृति का अनुभव
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Mon, 24 Dec 2012 08:55 AM IST
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सियाचीन में बंकरों में रहने वाले सैनिकों को अकेलेपन और अवसाद से दूर रखने के लिए विशेष बंकरों का विकास कर उन्हें सजीव वातावरण दिया जाएगा। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ऐसे बंकरों का विकास कर रहा है जिससे उन्हें समुद्र की लहरों, चिड़िया की चहचहाट और जंगल से हवा के गुजरने की आवाजें सुनाई देंगी। इस तरह से सैनिकों को दुनिया से जुड़े होने का अहसास होगा।
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दुनिया की सबसे ऊंचे जंग के मैदान में दूरदराज के ठिकानों पर तैनात सैनिकों को सजीव वातावरण का अनुभव कराने के लिए डीआरडीओ प्रोजेक्ट ध्रुव पर काम कर रहा है। इसके तहत सैनिकों के मनोवैज्ञानिक मुद्दों को निपटाने के लिए ऐसे बंकर बनाए जाएंगे।
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डीआरडीओ के मुख्य नियंत्रक (जीवन विज्ञान) डब्ल्यू सेल्वामूर्ति ने कहा कि प्रोजेक्ट ध्रुव का उद्देश्य सैनिकों के बंकर में माहौल को बेहतर करना है। दूरदराज के इलाकों में सैनिकों के तनाव को दूर करने के लिए ऐसा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक जैसे माहौल में लगातार रहने की वजह से तनाव का शिकार होने वाले सैनिकों के लिए ये उपाय किए जा रहे है। ताकि बंकरों के भीतर एक सजीव वातावरण बनाया जा सके। इसके लिए एक अध्ययन किया जा रहा है जो एक साल में पूरा हो जाएगा। इससे आगे बढ़ने के लिए ठोस आधार मिलेंगे।
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उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ समय में अकेलेपन और अवसाद की वजह से सैनिकों ने आत्महत्या कर ली और कई ने दूसरे सैनिकों को भी मार डाला।
रूसी तकनीक के विकास और समयबद्ध तरीके से शोध करने के निर्देश दिए गए हैं। यह बंकर सौर और पवन उर्जा संयंत्रों के रूप में हरित उर्जा से लैस होंगे। इनमें खुद का बायो-डाइजेस्टर होगा, जिससे मानव अपशिष्ट का निपटान भी किया जाएगा। साथ ही इनमें ऐसे उपकरण भी होंगे जिनसे ऊंचे पर्वतीय स्थलों पर होने वाली बीमारियों और सांस की तकलीफों का निपटारा भी किया जा सके।
पहले प्रोजेक्ट ध्रुव के तहत केवल थल सेना आएगी। लेकिन बाद में नौसेना को भी इसमें शामिल किया जा सकता है। क्योंकि नौसैनिक भी लंबे समय के लिए समुद्र में जाते हैं और ऐसी ही दूसरी समस्याओं का सामना करते हैं।