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मधेसियों के लिए नेपाल पर दबाव बनाए रखेगा भारत

Tue, 29 Sep 2015 08:15 AM IST
Updated Tue, 29 Sep 2015 08:15 AM IST
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India will  pressure on Nepal

नेपाल के नए संविधान में अपने लिए पर्याप्त प्रतिनिधित्व की मांग कर रहे मधेसियों के प्रति भारत अपना समर्थन लगातार जारी रखेगा। भले ही नेपाल चीन से नजदीकियां बढ़ा रहा हो, मगर संविधान में मधेसियों और जनजातियों को उचित प्रतिनिधित्व के मामले में भारत नेपाल सरकार पर दबाव बरकरार रखेगा।

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इस दिशा में कूटनीतिक पहल करने वालों का मानना है कि नेपाल खुद पर दबाव कम करने और भारत को अपने रुख से पीछे हटने के लिए ही चीन से नजदीकियां बढ़ाने का लगातार संदेश दे रहा है।
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हालांकि, भारत नेपाल में देश विरोधी भावनाओं के मजबूत होने और नेपाल के चीन के करीब होने के दिए जा रहे संकेत से चिंतित है, मगर फिलहाल उसकी पहली प्राथमिकता मधेसियों और जनजातियों की लड़ाई लड़ कर नेपाल को झुकने के लिए मजबूर करने की है।
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नेपाल के नए संविधान के प्रावधानों से नाराज मधेस क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने जहां इससे संबंधित प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया था, वहीं हाल ही में इसी सवाल पर एकीकृत नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के संस्थापक और नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टराई ने पार्टी के साथ-साथ संसद की सदस्यता भी छोड़ दी।

माना जा रहा है कि संविधान के कुछ प्रावधानों से नाराज नेपाल के अन्य दलों के कुछ नेता भी भट्टराई की तरह इस्तीफे की राह पकड़ सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि मधेसियों के उग्र आंदोलन, हड़ताल और सड़क जाम के कारण नेपाल की मुश्किलें बढ़ी हैं। वहां तेल और खाने-पीने के जरूरी सामानों की कमी हो गई है। इस संकट से पार पाने के लिए नेपाल ने चीन से मदद मांगी है।

दोनों देशों के बीच रस्साकसी जारी

India will  pressure on Nepal

भारत संविधान में अपनी इच्छा के मुताबिक, सात संशोधनों पर हामी भरने तक नेपाल पर दबाव बनाए रखेगा। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार नेपाल भले ही चीन से नजदीकी बढ़ाने की बात करे, मगर उसे पता है कि भारत के बिना उसकी आगे की राह आसान नहीं है।

फिर उसे यह भी समझना होगा कि संविधान में मधेसियों को अधिकार न मिलने से उपजे असंतोष से नेपाल की ही नहीं बल्कि भारत की भी परेशानी बढ़ेगी।

यही कारण है कि भारत नेपाल पर अपने सुझाव को स्वीकार करने के लिए दबाव बनाए रखेगा। विवाद सुलझाने के लिए दोनों देशों के बीच कूटनीतिक पहल जारी है।

हालांकि नेपाल ने सोमवार तक भारत के सुझावों के अनुरूप संविधान में तत्काल सात संशोधन करने से मना कर दिया है। नेपाल इसके लिए भारत से कुछ समय चाहता है, जबकि भारत इसे जल्द से जल्द पूरा करना चाहता है।

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