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अपने विश्वविद्यालयों की रैंकिंग नहीं कराएगा भारत

Tue, 08 Dec 2015 02:02 AM IST
Updated Tue, 08 Dec 2015 02:02 AM IST
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India will not rank its universities

केंद्र सरकार ने फैसला किया है कि वह वैश्विक एजेंसियों से अपने विश्वविद्यालयों की रैंकिंग नहीं कराएगी। सरकार के इस निर्णय को विश्व के शीर्ष संस्थानों में भारतीय संस्थानों के नहीं होने से जोड़कर देखा जा रहा है।

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विशेषज्ञों के मुताबिक इस फैसले के बाद सरकार आलोचना से बच जाएगी और कोई यह आरोप नहीं लगा पाएगा कि भारतीय विश्वविद्यालय दुनिया के अंडर-50 या अंडर-100 संस्थानों में शामिल नहीं हैं।
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मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने सोमवार को लोकसभा को बताया कि वैश्विक एजेंसियों की ओर से जारी होने वाली रैंकिंग का मुख्य आधार शोध और विदेशी फैकल्टी को शामिल होना होता है। संस्थाओं को रैंक देते समय यह एजेंसियां क्षेत्रीय भाषाओं में किए जा रहे शोध को शामिल नहीं करतीं।
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शोध की गुणवत्ता खराब होती है

India will not rank its universities

उन्होंने कहा कि सरकार के लिए शिक्षा एक गैर लाभकारी क्षेत्र है और रैंकिंग का मतलब छात्रों को आकर्षित करने से नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां क्षेत्रीय भाषाओं में किए जा रहे शोध कार्यों को महत्व नहीं देती, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि क्षेत्रीय भाषा में किए गए शोध की गुणवत्ता खराब होती है।

उनका आधार अंग्रेजी भाषा में किया गया शोध है। उच्च शिक्षा और अनुसंधान पर अपने लिखित जवाब में मंत्री ने कहा कि सरकार ने 53 देशों और बहुपक्षीय संस्थाओं संग भारत ने एजुकेशनल एक्सजेंच प्रोग्राम और एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं।

बताया कि गत अगस्त महीने में आस्ट्रेलिया-इंडिया एजुकेशनल काउंसिल की मीटिंग में दोनों देशों के बीच शिक्षा और प्रशिक्षण से संबंधित समझौते हुए।

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