नेपाल के यूएन में जाने को तवज्जो नहीं देगा भारत
नाकेबंदी के मसले पर नेपाल के संयुक्त राष्ट्र का दरवाजा खटखटाने और चीन के करीब जाने का संकेत देने के बावजूद भारत इसे ज्यादा तवज्जो देने के मूड में नहीं है।
हालांकि तनावपूर्ण संबंधों के बावजूद स्थिति संभालने के लिए दोनों देशों के बीच कूटनीतिक चैनलों की ओर से बातचीत जारी है। इस बातचीत में भारत मधेसियों को संविधान में उचित जगह देने के लिए संशोधन की मांग पर अड़ा हुआ है। सूत्रों का कहना है कि हालात संभालने के लिए कूटनीतिक चैनलों के जरिए नेपाल के भावी प्रधानमंत्री के साथ भी कई बार बातचीत हुई है।
माना जा रहा है कि नेपाल के नए प्रधानमंत्री शपथ लेते ही भारत का दौरा कर विवाद का हल निकालेंगे। नए संविधान पर तनातनी के बीच नेपाल ने चीन से संपर्क करने के बाद भले ही यूएन में पहली बार भारत का दरवाजा खटखटाया है, मगर उसके इस पहल से फिलहाल विवाद शांत होता नहीं दिख रहा।
आशय स्पष्ट!
भारत न तो नेपाल के दबाव बनाने की रणनीति को भाव देने के मूड में है, बल्कि
वह अब भी संविधान में सात संशोधन करने की अपनी मांग पर अड़ा हुआ है।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि अब बिगड़े रिश्ते के सुधरने की गुंजाइश नेपाल
में नए पीएम के आने के बाद ही संभव है। उल्लेखनीय है कि समझौते के मुताबिक
संविधान निर्माण के बाद जहां नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और
प्रधानमंत्री सुशील कोइराला को इस्तीफा देना है, वहीं दूसरी सबसे बड़ी
पार्टी सीपीएन (यूएमएल) के हाथों सत्ता की बागडोर देनी है।
समझौते के तहत इस
पार्टी के वरिष्ठ नेता केपी शर्मा ओली का इसी महीने नया प्रधानमंत्री बनना
तय है। सरकारी सूत्रों ने बताया कि नए प्रधानमंत्री शपथ लेने के बाद
भारत का दौरा करेंगे। इसी दौरे में विवाद के बिंदु सुलझाए जाने के आसार
हैं। भावी पीएम ने भी भारतीय कूटनीतिक चैनलों को इस आशय का स्पष्ट संदेश
दिया है।
हालांकि नेपाल चाहता है कि तब तक भारत आर्थिक नाकेबंदी मामले में
ढील दे। जबकि भारत का कहना है कि उसकी ओर से आर्थिक नाकेबंदी नहीं की गई
है। मधेसियों के आंदोलन और हिंसा के डर से खुद ही भारतीय नेपाल जाने से डर
रहे हैं।ो