भारत नए साल पर अफगानिस्तान को देगा तोहफा
भारत अफगानिस्तान को लोकतंत्र का प्रतीकात्मक तोहफा देने वाला है। भारत की मदद से बनने वाली अफगानिस्तान की नई संसद तकरीबन बनकर तैयार है। जिसका आधिकारिक उद्घाटन आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे।
यह कहना है अफगान न्यूज एजेंसी टोलो न्यूज का। मीडिया रिपोर्ट का कहना है कि दरअसल भारत अफगानिस्तान के जरिए क्षेत्र में अपनी बड़ी भूमिका को और मजबूत बनाने की फिराक में है। वहीं पाकिस्तान की मीडिया ने भी इस खबर को प्रमुखता से लिया है और इसे ‘मेड बाय इंडिया’ के शीर्षक से इसे जगह दी है।
एजेंसी के मुताबिक, भारतीय मीडिया ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री कार्यालय अफगान संसद को बनाने में लगे सभी भागीदारों पर इस परियोजना को जल्द से जल्द पूरा करने का दबाव बना रहा है।
मोदी भी हैं काफी उत्सुक
खुद पीएम मोदी इसके लिए काफी उत्सुक नजर आ रहे हैं जो इसके उद्घाटन समारोह में हिस्सा लेंगे। हाल में इसके काम की समीक्षा का दायित्व भारत के शहरी विकास के सचिव मधुसूदन प्रसाद और केंद्रीय लोकनिर्माण विभाग को सौंपा गया था।
जिन्होंने अपनी समीक्षा में पाया कि अफगान की नई संसद के निर्माण का कार्य करीब 96 फीसदी तक पूरा हो चुका है। इस परियोजना में लगी टीम इसे अंतिम रूप देने में लगी है।
अफगान संसद के निर्माण की यह परियोजना 2007 में भारत सरकार द्वारा दोस्ती और सहयोग के तौर पर शुरू की गई थी। इसके तहत युद्ध और हिंसा से जूझ रहे अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण में भारत ने मदद और सहयोग की प्रतिबद्धता जताई थी। फिलहाल इसे पूरा करने की समयसीमा 31 दिसंबर रखी गई है। पाक के प्रमुख अखबार डॉन ने इसे ‘मेड बाय इंडिया’ के शीर्षक से जगह दी है।
2011 में ही बन जानी थी नई संसद
एशिया में सबसे बड़ा होगा संसद का गुंबद
अफगानिस्तान की नई संसद को बनाने में मुगल और आधुनिक स्थापत्य शैलियों का इस्तेमाल किया गया है। माना जा रहा है कि इसका गुंबद एशिया का सबसे बड़ा गुंबद होगा।
जो कि इसकी खासियत होगा। यह ऐतिहासिक सुल्तान महल ‘दारुलअमन’ और बेगम महल के बीच स्थित है। इमारत में 294 लोगों के बैठने की क्षमता वाला वोलेसी जिरगा (निचला सदन) और 190 सीटों वाला मेशरानो जिरगा (उच्च सदन) के अलावा बड़ी सी लॉबी, कार्यालय सम्मेलन हॉल, भोजन कक्ष और समाचार कक्ष समेत कई अन्य कक्ष होंगे।