देश के सपूतों का यही है कातिल, म्यांमार में करा रहा इलाज
उत्तर पूर्व में उग्रवाद का बड़ा नाम बने इस 75 वर्षीय शख्स के खिलाफ मोदी सरकार सख्त हो गई है। केंद्र ने म्यांमार सरकार से इसके खिलाफ जंग छेड़ने और उसके कैंपो ध्वस्त करने की मांग की है।
इसके लिए बाकायदा म्यांमार सरकार पर दबाव भी बनाया जा रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं उत्तर पूर्व में उग्रवाद का सबसे बड़ा नाम बने इस शख्स की पहचान क्या है?
आखिर कैसे ये शख्स उग्रवाद की दुनिया का 'मोस्टवांटेड' बन गया? अचानक ऐसा क्या हुआ जो भारत सरकार ने इसके खिलाफ जंग का ऐलान किया है?
4 जून को मणिपुर में उग्रवादियों ने भारतीय सेना की एक टीम पर हमला किया। इस हमले में 18 जवान शहीद हो गए। जिसके बाद भारत सरकार ने सख्ती दिखाते हुए म्यांमार ऑपरेशन को अंजाम दिया।
आखिर कौन है खाप्लांग?
भारत सरकार ने म्यांमार की धरती पर जाकर उग्रवादियों के खिलाफ इस जंग को अंजाम तक पहुंचाया। लेकिन 4 जून को उग्रवादियों ने सेना पर जो हमला किया उसकी पूरी साजिश 75 वर्षीय एसएस खाप्लांग ने रची।
एसएस खाप्लांग, जो नगालैंड के उग्रवादी संगठन नेशनलिस्ट सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (एनएससीएन-के) का मुखिया है। जिसने उत्तर पूर्व में उग्रवाद को बढ़ावा देने के लिए मोर्चा संभाल रखा है।
इस मोस्टवांटेड उग्रवादी के बारे में जो जानकारियां मिली हैं उसके मुताबिक खाप्लांग का जन्म म्यांमार के पांगसाउ पास के वक्थाम गांव में हुआ। खाप्लांग अपने 10 भाई-बहनों में सबसे छोटा था। उसने ही यूनाइटेड लेबरेशन फ्रंट ऑफ वेस्टर्न साउथ ईस्ट एशिया (यूएनएलएफडब्ल्यू) का गठन किया। यूएनएलएफडब्ल्यू ने ही 4 जून को सेना पर हुए हमले की जिम्मेदारी ली थी।
खाप्लांग के दो घर हैं जिनमें एक घर चीन के युवान में और एक म्यांमार में है। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक खाप्लांग के तीन बेटे हैं और एक बेटी है। ये सभी उससे अलग रहते हैं। खाप्लांग के जीवन में विद्रोह के बीज बहुत जल्दी पड़ गए। जब वह बच्चा था उस समय विश्व युद्ध के मंजर का गवाह बना।
सबसे बड़े उग्रवादी संगठन का किया गठन
इंडियन एक्सप्रेस के एक और लेख के मुताबिक खाप्लांग 1964 में नागा डिफेंस फोर्स में शामिल हुआ। 1965 में खाप्लांग इसका उपाध्यक्ष बना और कुछ ही दिनों बाद वह ईस्टर्न नागा रिवोल्यूशनरी काउंसिल का अध्यक्ष बन गया।
जानकारी के मुताबिक खाप्लांग जिस समय गौहाटी विश्वविद्यालय में एमए कर रहा था उसे थिउंगालेंग मुईवाह के करीब आने का मौका मिला। इतना ही नहीं ईस्टर्न नागा रिवोल्यूशनरी काउंसिल का अध्यक्ष बनने के बाद उसने जिन्हें भी टीम में शामिल किया उन्हें ट्रेनिंग के लिए चीन में ट्रेनिंग के लिए भेजा।
बाद में खाप्लांग ने दो संगठनों को मिलाकर अब तक के सबसे खतरनाक संगठन नेशनलिस्ट सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड का गठन किया। इस संगठन के सदस्य बर्मा में रहते हैं और सीमा पार करके भारतीय सीमाओं पर कार्रवाई करते रहते हैं।
ये संगठन नगालैंड के साथ-साथ मणिपुर और अरूणाचल प्रदेश में उग्रवादी घटनाओं को बढ़ा रहे हैं। खाप्लांग संगठन की बड़ी मांग नगालैंड को अलग करने की है। हालांकि जानकार उनकी मांगों को स्वीकार नहीं कर रहे।
भारत सरकार ने म्यांमार से की कार्रवाई की मांग
खाप्लांग का संगठन कितना खतरनाक है इसकी तस्दीक साउथ एशिया टेररिज्म पोर्टल के आंकड़ों से हो जाता है। इसके मुताबिक एनएससीएन-के ने 1992 से 2000 के बीच 62 नागरिकों और 26 सुरक्षाकर्मियों को अपना शिकार बनाया। इस दौरान में करीब 245 लोगों की मौत हो गई।
खाप्लांग पिछले दो दशकों से आतंक का पर्याय बना हुआ है। लगातार उसने उग्रवादी गतिविधियां इन क्षेत्रों में बढ़ाई है। खाप्लांग को सबसे बड़ी कामयाबी तब मिली जब उसने अपने साथ पांच और ग्रुप्स को शामिल कर लिया।
यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (इंडिपेंडेंट), नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (खाप्लांग), कामतापुर लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन (केएलओ) और नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोरोलैंड (सांगबिजित), सभी को मिलाकर यूएनएलएफडब्ल्यू का गठन किया गया।
यांगून के अस्पताल में करा रहा इलाज
4 जून को भारतीय सेना पर हमले की साजिश रचने वाले इस शख्स के खिलाफ भारत ने जंग तेज कर दी है। सरकार ने म्यांमार सरकार के साथ-साथ अपनी सेना को
भी इसके खात्मे के लिए छूट दे दी है।
इस बीच खाप्लांग के बारे में खबर है कि वह गंभीर रूप से बीमार है और म्यांमार के यांगून में एक अस्पताल में इलाज करा रहा है।
इस खबर के सामने आने के बाद ही भारत सरकार ने म्यांमार सरकार से बात की है और कार्रवाई की बात कही है। फिलहाल अब ये
कोशिश कितनी कामयाब होगी और उत्तर पूर्व का ये मोस्टवांटेड गिरफ्त में कब
आएगा इसका इंतजार सभी को है।