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जलवायु परिवर्तन पर भारत ने उठाया ठोस कदम

Tue, 01 Dec 2015 08:45 AM IST
Updated Tue, 01 Dec 2015 08:45 AM IST
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India step forward in the way of become Climate champions

जलवायु परिवर्तन पर पेरिस में हो रहे विश्व सम्मेलन के क्रम में भारत ने क्लाइमेट चैंपियन बनने की राह में अहम कदम उठाया है। इंटरनेशनल सोलर एलायंस की पहल को पर्यावरणविदों ने महत्वपूर्ण बताया है। भारत ने विकासशील देशों की आवाज बनने की कोशिश भी है और विकसित देशों की जिम्मेदारी को भी रेखांकित करने का प्रयास किया है।

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भारत ने न्यायोचित वैश्विक करार के लिए विकसित देशों पर प्रभाव भी बनाया है। सेंटर फार एनर्जी एनवायरमेंट एंड वाटर (सीईईडब्ल्यू) की सीईओ अनुराधा घोष के अनुसार, विश्व सौर संधि की पहल कार्बन उत्सर्जन घटाने की दिशा में सबसे बड़ा कदम है। भारत के नेतृत्व में यह समझौता विकसित और विकासशील देशों को नई राह दिखा सकता है। इसमें कम लागत पर स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन का संदेश निहित है।
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इस करार से अन्य देशों को भी कम लागत में सौर ऊर्जा हासिल हो सकेगी। यह करार ऊष्ण कटिबंधीय क्षेत्र में मकर और कर्क रेखा के बीच स्थित लगभग सौ देशों में हो रहा है जहां सौर ऊर्जा कम लागत में हासिल हो सकती है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट की महानिदेशक सुनीता नारायण के अनुसार, विकसित देशों को खुद को अनुशासित करना होगा। अमेरिका अपनी जीवनशैली में बदलाव किए बगैर विकासशील देशों पर दबाब बना रहा है। यह न्यायपूर्ण नहीं है

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विकसित देश करें ज्यादा मदद

India step forward in the way of become Climate champions

पेरिस सम्मेलन में भारत विकसित देशों की भूमिका का मामला मजबूती से उठाने वाला है। चूंकि ग्लोबल वार्मिंग विकसित देशों की देन है इसलिए उन्हें इससे निपटने के उपायों में ज्यादा बड़ी भूमिका अदा करनी होगी। सिर्फ विकासशील देशों को बंदिशों में बांधना उचित नहीं है।

भारत ने विकसित देशों पर एक फंड बनाकर विकासशील देशों की मदद के लिए दबाब बनाया है। यह जरूरी भी है। जलवायु खतरों से निपटने के लिए विकासशील देशों को तकनीक उपलब्ध कराना भी विकसित देशों की ही जिम्मेदारी है।

वसुधा फाउंडेशन के सीईओ श्रीनिवास कृष्णास्वामी के अनुसार, सोलर एलायंस बनाने का भारतीय प्रस्ताव वक्त की जरूरत है। सोलर क्लब से भारत को भी नवीकरणीय ऊर्जा के उत्पादन लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।

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