दिखने लगी मंदी की आहट, ये रहा पुख्ता सबूत
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फिनिश्ड लेदर की किल्लत, कच्चे माल के ऊंचे भाव, दुनिया भर में मौसम में बदलाव और यूरो के उतार-चढ़ाव ने भारतीय जूते की चमक फीकी कर दी है। चीन की चुनौती के बीच बाजार में लगातार हिस्सेदारी बढ़ा रहे भारतीय जूता बाजार को तगड़ा झटका लगा है।
हाल ये है कि निर्यातक 2009 की वैश्विक मंदी के बाद साल 2015 को खराब बता रहे हैं। यूरोपीय बाजार के डूबने से करीब 30 फीसदी तक की गिरावट निर्यात में इस साल दर्ज की जा सकती है।
नए बाजारों में आगरा के जूते की चमक बढ़ती उससे पहले ही यूरोप की राहों पर जूता फिसलने लगा। फिसला भी ऐसा कि इस साल 30 फीसदी तक की गिरावट आ गई। यूरोपीय मुद्रा यूरो के उतार-चढ़ाव का पता नहीं कि आर्डर पर किस रेट पर पहुंच जाए और भुगतान के वक्त कहां। यूरोपीय देशों में सर्दियों के देरे से आने का खामियाजा भी आगरा के जूता निर्यातकों को भुगतना पड़ा। साल की पहली तिमाही में जूता निर्यात में तेजी से गिरावट आई है।
भारतीय निर्यातकों को गारडा फेयर से उम्मीदें
13 से 16 जून तक इटली के 84वें एक्सपो रीवा गारडा फेयर में ताजनगरी से 26 जूता निर्यातकों ने हिस्सा लिया। स्प्रिंग-समर:2016 सीजन के लिए गारडा फेयर में भारतीय निर्यातकों को अच्छा रिस्पांस मिला। दरअसल, चीन के बाद गारडा फेयर में सबसे ज्यादा 100 स्टाल भारतीय कंपनियों के थे।
आगरा से गुप्ता ओवरसीज, डावर फुटवियर, विरोला इंटरनेशनल, रोजर इंडस्ट्रीज, तेज इंटरनेशनल, पार्क एक्सपोर्ट, नोवा शूज, अमर शूज, फुट स्टाइल, राना ओवरसीज, मेन्यूफेक्स आदि निर्यातक कंपनियों ने फेयर में अपने स्टाल लगाए थे। महंगे लेदर, यूरोपीय बाजार के ढह जाने के बाद गारडा फेयर में मिले रिस्पांस पर ही निर्यातकों की उम्मीदें टिकी हुई हैं।
मंदी से यूरोप का बाजार ठंडा हो चुका है। जहां डिमांड रहती थी, मौसम में बदलाव से वहां सर्दियां लेट शुरू हुईं, इससे इस तिमाही एक्सपोर्ट कम हुआ है। गारडा फेयर से उम्मीदें हैं कि शायद नए सीजन के लिए बाजार में कुछ मांग बढ़े।
- पूरन डावर, अध्यक्ष, एफमेक
यूरोपीय बाजार पूरी तरह से डूब चुका है। स्पेन और ग्रीस के संकट ने पूरे यूरोपीय बाजार को बर्बाद कर दिया है। यह साल निर्यात के लिए बेहद खराब रहा है। नए बाजारों की तलाश के बाद भी निर्यात में गिरावट है।
- प्रदीप वासन, जूता निर्यातक
खाड़ी देशों, खासकर सऊदी अरब, यूएई में निर्यात बढ़ा है, लेकिन ओवरऑल निर्यात घटा है। लेदर की किल्लत और कीमत परेशान कर रही है। मेक इन इंडिया प्रोग्राम से लेदर सेक्टर की उम्मीद है कि कठिन समय से हम निकलेंगे।
-जितेंद्र त्रिलोकानी, जूता निर्यातक
इन देशों ने बरकरार रखीं संभावनाएं
सऊदी अरब, यूएई, कोरिया, न्यूजीलैंड, चीन, पुर्तगाल, नीदरलैंड, फिनलैंड, दक्षिण अफ्रीका, जापान, कनाडा से बीते साल अप्रैल से इस साल मार्च तक भारतीय जूतों की मांग में इजाफा हुआ है। लेदर गारमेंट के निर्यात में जबरदस्त कमी आई है, लेकिन नए बाजारों की तलाश कर जूता निर्यातकों ने फुटवियर सेक्टर के आर्डर बरकरार रखे हैं।