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समाज की सोच का आईना है ‘इंडियाज डॉटर’
एजेंसी/वाशिंगटन
Updated Thu, 12 Mar 2015 07:44 PM IST
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दिल्ली गैंगरेप पर फिल्म ‘इंडियाज डॉटर’ यानी भारत की बेटी, बनाकर चर्चा में आईं ब्रिटिश फिल्म निर्माता लेस्ली उड्विन ने इन आरोपों को खारिज कर दिया कि उन्होंने यह फिल्म व्यावसायिक लाभ के लिए बनाई है।
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उन्होंने कहा कि यह उनका जुनून है, समाज क्या सोचता है, प्रतिबंधित डॉक्यूमेंट्री उसका वास्तविक प्रतिबिंब है। उड्विन ने एक चैनल से बातचीत में कहा कि इस फिल्म में कुछ भी आश्चर्यजनक नहीं है।
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यह डॉक्यूमेंट्री समाज की उस सोच को दर्शाती है, जिसमें जन्म के साथ ही बेटी और बेटे में अंतर किया जाता है। प्राय: देखा जाता है कि लड़के के जन्म पर मिठाइयां बांटी जाती हैं और लड़की के जन्म पर निराशा होती है। लड़की के जीवन में यह सिलसिला आगे भी जारी रहता है और वह लगातार इस भेदभाव का शिकार होती रहती है।
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हमें ऐसी सामाजिक विषमता समाप्त करनी होगी जिसमें पुरुष सोचता है कि वह किसी महिला के साथ कुछ भी कर सकता है, क्योंकि उसकी कोई कीमत नहीं है। मालूम हो कि न्यूयॉर्क में इसी सप्ताह उड्विन की फिल्म का प्रीमियर हुआ है, जबकि भारत में इस फिल्म पर प्रतिबंध है।