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दुनिया का हर पांचवां मधुमेह रोगी भारतीय
मुंबई/एजेंसी
Updated Sat, 10 Nov 2012 08:02 PM IST
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मधुमेह या शुगर अब देश में गंभीर बीमारी का रूप लेता जा रहा है। 2007 में जहां भारत में करीब 4 करोड़ लोग इस बीमारी से पीड़ित थे, वहीं अनुमान है कि 2025 तक यह संख्या बढ़कर 7 करोड़ तक पहुंच सकती है।
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डायबिटीज एटलस के मुताबिक भारत में मधुमेह महामारी की तरह फैल रही है। इसी वजह से भारत में स्वास्थ्य को गंभीर खतरे पैदा हो गए हैं। 2030 तक भारत, चीन और अमेरिका में मधुमेह के सबसे अधिक रोगी होने की संभावना है।
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यह माना जा रहा है कि शुगर से पीड़ित हर पांचवां व्यक्ति भारतीय है। इसी वजह से भारत में पड़ने वाला आर्थिक बोझ भी दुनिया में सबसे ज्यादा है। मगर मुख्य समस्या तेजी से बढ़ती रुग्णता और मृत्यु दर है। लोगों की लाइफ स्टाइल में आ रहे बदलाव के चलते यह बीमारी भविष्य में और भी भयानक रूप धारण कर सकती है।
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भारत में युवा भी इसका शिकार हो रहे हैं, पश्चिमी देशों की तुलना में हमारे देश में 10-15 साल पहले यह बीमारी लोगों में घर कर रही है। मधुमेह को खतरनाक स्टेज तक पहुंचने में काफी समय लगता है। लेकिन अक्सर देखा गया है कि लोग मधुमेह के शुरुआती लक्षणों को हलके में लेते हैं और तब तक इलाज नहीं कराते, जब तक यह गंभीर रूप धारण न कर ले।
इस बीमारी का बुरा असर मरीज की किडनी, आंखों और दिल पर भी होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि हाइपर डायबिटीज से पीड़ित लोग आमतौर पर इंसुलिन नहीं लेते हैं, जिससे स्थिति और भी ज्यादा बिगड़ जाती है। यह भी देखा गया है कि पश्चिमी देशों के मुकाबले भारतीय इंसुलिन का इस्तेमाल करना कम पसंद करते हैं। सबसे बड़ी समस्या यही है कि मधुमेह को हमारे देश में तब तक गंभीर बीमारी के रूप में नहीं देखा जाता है, जब तक जान पर न बन जाए।
हो सकता है बचाव
बदलते लाइफस्टाइल और मोटापे की वजह से देश में मधुमेह का खतरा बढ़ गया है। मगर इसकी रोकथाम भी व्यक्ति के ही हाथ में है। अगर नियमित व्यायाम करने के साथ हेल्दी खाना खाया जाए तो इस बीमारी के असर को कम किया जा सकता है। उचित तनाव प्रबंधन भी इस मामले में काफी फायदेमंद है।