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स्थाई सदस्यता के लिए समर्थन जुटाएगा भारत
विनोद अग्निहोत्री/उपराष्ट्रपति के विशेष विमान से
Updated Sat, 26 Oct 2013 01:54 AM IST
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उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी की पेरू और क्यूबा की यात्रा के दौरान भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता के लिए इन दोनों देशों का समर्थन जुटाने की पूरी कोशिश करेगा।
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यह बात इन दोनों लैटिन अमेरिकी देशों की यात्रा शुरु करते हुए विशेष विमान में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कही।
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के ढांचे के पुनर्गठन का मुद्दा भारतीय विदेश नीति का स्थाई एजेंडा है जब तक कि यह उद्देश्य पूरा न होजाए। उपराष्ट्रपति अंसारी ने क्यूबा के शीर्ष नेता फिदेल कास्त्रो को मौजूदा विश्व में एक महानायक करार दिया। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति कास्त्रो अभी भी एक महानायक हैं।
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अमर उजाला द्वारा इस संबंध में पूछे गए सवाल के जवाब में उपराष्ट्रपति ने कहा कि 1949 में जब संयुक्त राष्ट्र का गठन हुआ था तब से अब विश्व का परिदृश्य बदल चुका है। लेकिन जो ताकतवर देश सुरक्षा परिषद में स्थाई रूप से हैं, वह आसानी से इसके ढांचे में सुधार के लिए तैयार नहीं होंगे। यह एक लंबी प्रक्रिया है और भारत इसके लिए विश्व जनमत जुटाने का काम निरंतर करता रहेगा।
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उन्होंने कहा कि इस यात्रा में भी वह भारत के इस एजेंडे को आगे बढ़ाएंगे। यह पूछने पर कि पेरू, क्यूबा जैसे देश जो भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, की उच्च स्तरीय यात्राओं में इतना लंबा अंतराल क्यों होता है, अंसारी ने कहा कि ऐसा नहीं है। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या उपराष्ट्रपति केअलावा भी मंत्री स्तर और अधिकारिक स्तर के प्रतिनिधि मंडल सभी देशों में आते जाते रहते हैं।
उपराष्ट्रपति ने लैटिन अमेरिका की अपनी इस यात्रा को भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि दक्षिण अमेरिका के देशों में प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक संसाधन हैं, जिनके लिए भारत इन देशों के साथ अपने रिश्ते और मजबूत कर रहा है।
उन्होंने कहा कि कई भारतीय कंपनियां लैटिन अमेरिकी देशों में निवेश कर रही हैं। उपराष्ट्रपति के मुताबिक खनिज, कच्चे तेल, दवाएं, वनस्पतियों और कुछ कृषि उत्पादों के क्षेत्र में भारत पेरु और क्यूबा के साथ अपने आर्थिक और व्यापारिक रिश्तों के विस्तार की संभावनाएं खोज रहा है।
क्यूबा को भारत का पुराना दोस्त बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रपति कास्त्रो 1983 में तब भारत आए थे जब वह गुट निरपेक्ष आंदोलन के अध्यक्ष थे और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी उनके बाद गुट निरपेक्ष आंदोलन की अध्यक्ष बनी थीं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत के लिए लैटिन अमेरिका के सभी देश ब्राजील, क्यूबा, वेनेजुएला, चिली, पेरू आदि खासे महत्वपूर्ण हैं और हम इनकेसाथ अपने आर्थिक, व्यापारिक, कूटनीतिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक संबंध दिनोदिन मंजबूत करेंगे।
उपराष्ट्रपति यात्रा डायरी
उपराष्ट्रपति हामिद मोहम्मद अंसारी की लैटिन अमेरिकी देशों पेरू और क्यूबा की राजकीय यात्रा का पहला पड़ाव जर्मनी का फ्रैंकफर्त शहर का मौसम बेहद सुहावना है। उपराष्ट्रपति अंसारी यहां स्थानीय समयानुसार दिन में 3.45 बजे पहुंचे। फ्रैंकफर्त में वह रात्रि विश्राम करके अगले दिन सुबह पेरू की राजधानी लीमा के लिए रवाना होंगे। अपनी इस यात्रा में उपराष्ट्रपति 44 घंटे हवाई जहाज में ही बिताएंगे।
जर्मनी का प्रमुख शहर फ्रैंकफर्त एक तरफ दुनिया भर की हवाई उड़ानों का केंद्र है तो दूसरी तरफ यूरोपीय अर्थव्यवस्था का भी एक बडा केंद्र है। यहां दुनिया की हर प्रमुख बैंक की शाखाएं और कार्यालय हैं। यहां के स्टाक एक्सचेंज से पूरा यूरोपीय बाजार प्रभावित होता है।
आम तौर पर यूरोप में लोग यातायात नियमों के पालन को लेकर बेहद अनुशासित हैं। लेकिनउपराष्ट्रपति के साथ गए मीडिया प्रतिनिधियों को ले जाने वाली बस के रास्ते में कई जगह कार चालक ओवर टेकिंग करते दिखाई दिए। इस वजह से लगे जाम ने मीडिया बस को अपना रास्ता बदलने पर भी मजबूर किया।