फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   India preparing to challege China in Satellite Navigation system

नेविगेशन सिस्टम के उपग्रहों में चीन को चुनौती देने की तैयारी में भारत

Mon, 16 Nov 2015 07:57 AM IST
Updated Mon, 16 Nov 2015 07:57 AM IST
विज्ञापन
India preparing to challege China in Satellite Navigation system

कारगिल युद्ध के दौरान सूचनाओं को हासिल करने में हुई दिक्कत से सबक लेते हुए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने घरेलू उपग्रहों की श्रृंखला के अंतिम तीन उपग्रह लांच करने की तैयारी को अंतिम रूप दे दिया है। इसरो नेविगेशन सेटेलाइट में चीन को चुनौती देने की रणनीति पर काम कर रहा है जिसके बेदाउ नेविगेशन सेटेलाइट सिस्टम में 35 उपग्रह हैं।

विज्ञापन


इसरो सूत्रों के मुताबिक भारतीय क्षेत्रीय नौसंचालन उपग्रह प्रणाली (आईआरएनएसएस) के नए उपग्रह आईआरएनएसएस-1ई को अगले महीने लांच किया जाएगा। इस श्रृंखला के दो और उपग्रह मार्च तक अंतरिक्ष में स्थापित कर दिए जाएंगे। आईआरएनएसएस केंद्र के लिए बंगलूरू में कंप्यूटरों और सर्वरों की स्थापना का काम पूरा हो चुका है।
विज्ञापन


इसके अलावा नेविगेशन साफ्टवेयर भी स्थापित हो चुके हैं। इस क्रम में लखनऊ में भी नेविगेशन सेंटर बनाया जा रहा है। इस तरह के बीस स्टेशन बनेंगे। भोपाल, हासन, जोधपुर और शिलांग में स्टेशन बनाने के लिए काम चल रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

युद्ध में होगा फायदा

India preparing to challege China in Satellite Navigation system

आईआरएनएसएस-1ई 1330 किलोग्राम भार का होगा और इसके सोलर पैनल से 1400 वाट ऊर्जा उत्पादित होगी। कारगिल युद्ध के दौरान घरेलू उपग्रह की कमी के कारण भारतीय सेना को सूचनाओं के लिए अमेरिकी जीपीएस सिस्टम पर निर्भर रहना पड़ा था। आईआरएनएसएस के तहत अभी सात उपग्रह की योजना है लेकिन बाद में इस श्रृंखला में चार और उपग्रह जोड़े जाएंगे।

युद्ध की स्थिति में अमेरिकी जीपीएस और यूरोपियन गैलिलियो सेटेलाइट सिस्टम की सेवा की गारंटी नहीं रहती है। लिहाजा भारतीय घरेलू उपग्रह सेवा ही सेना के लिए डाटा और सूचनाओं के एकमात्र विश्वसनीय आधार होंगे। अति आधुनिक गाइडेड मिसाइल में नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल होता है। सेना और विशेष अधिकृत उपभोक्ताओं के अलावा इन उपग्रहों से सामान्य नागरिकों को भी मोबाइल एवं अन्य उपकरणों के लिए सेवाएं मिल सकेंगी।

आईआरएनएसएस के चार उपग्रह 1ए, 1बी, 1सी और 1डी पहले ही लांच हो चुके हैं। अब दिसंबर में 1ई, फरवरी में 1एफ और मार्च में 1जी को लांच करने की तैयारी है। अगले साल मार्च के बाद इस श्रृंखला के सभी सात उपग्रह पूरी तरह काम करने लगेंगे। इस पर लगभग 1420 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस सिस्टम के तहत जमीन पर बनने वाले मास्टर कंट्रोल केंद्र पर लगभग 300 करोड़ रुपये खर्च होंगे। हर उपग्रह पर अलग से 125 करोड़ का खर्च आ रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed