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भारत पर 3.40 लाख करोड़ से भी ज्यादा का कर्ज
नई दिल्ली/पीयूष पांडेय
Updated Fri, 26 Oct 2012 08:39 PM IST
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भारत पर 3.40 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा का कर्ज बकाया है। कर्ज देने वालों में सात देशों के अलावा अंतरराष्ट्रीय बैंक भी शामिल हैं। जर्मनी, फ्रांस, इटली, जापान, रूसी फेडरेशन, स्विट्जरलैंड और अमेरिका ने भारत सरकार को 1.09 लाख करोड़ से अधिक ऋण दिया है। जबकि एशियन डेवलपमेंट बैंक, वर्ल्ड बैंक और आर्गेनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्पोर्टिंग कंट्रीज से भारत ने 2.31 लाख करोड़ से ज्यादा का लोन लिया है।
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वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत किए गए सवाल के जवाब में यह जानकारी दी है। हालांकि मंत्रालय के इस विभाग ने भारत का रुपया किन देशों पर बकाया है, इसकी सूचना कार्यालय से संबंधित न होने से इनकार करते हुए आरटीआई की प्रति संबंधित जन सूचनाधिकारी को भेज दी है।
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विदेशी ऋण से संबंधित सूचना आरटीआई कार्यकर्ता गौरव अग्रवाल ने प्रधानमंत्री कार्यालय से मांगी थी, जिसके जवाब में वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सात देशों और छह अंतरराष्ट्रीय बैंकों व संगठनों का ऋण 3 लाख 40 हजार 099 करोड़ रुपया भारत सरकार को देना है। भारत सरकार को यह लोन द्विपक्षीय समझौते के आधार पर इन देशों ने दिया है। जबकि अंतरराष्ट्रीय बैंक व संगठनों ने बहुपक्षीय समझौते के आधार पर यह कर्ज भारत को दिया है।
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मंत्रालय ने बैंकों व संगठनों से बहुपक्षीय समझौते के आधार पर लिए गए गैर-सरकारी ऋण की सूचना भी आरटीआई में दी है, जो 28 हजार 464 करोड़ रुपये से ज्यादा है। इसके अलावा जर्मनी, फ्रांस और जापान से द्विपक्षीय समझौते के तहत एक लाख 80 हजार 547 करोड़ रुपये से भी ज्यादा रकम देश पर बकाया है। आरटीआई के जवाब में भेजे गए विवरण के मुताबिक भारत सरकार को देशों की सूची में सबसे बड़ा कर्ज जापान ने दिया है, जो 85 हजार 548 करोड़ रुपये है।
वहीं जर्मनी ने 13,624, फ्रांस ने 1579, रूसी फेडरेशन ने 6717 और अमेरिका ने 1516 करोड़ रुपये भारत को दिए हैं। जबकि इटली ने 1.9 और स्विट्जरलैंड ने 1.6 करोड़ रुपये का लोन भारत सरकार को दिया है। वित्त मंत्रालय की ओर से आरटीआई के जवाब में यह सूचना 5 अक्तूबर को जारी की गई है। हालांकि जवाब में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह ऋण कब और किसकी सरकार में लिया गया था।