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हेलीकॉप्टर सौदा रद्द, इटली जाकर जांच करेगी सीबीआई

Sat, 16 Feb 2013 12:28 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Sat, 16 Feb 2013 12:28 AM IST
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india moves to scrap chopper deal to send cbi team to italy

हेलीकॉप्टर घूसकांड को लेकर घिरी सरकार ने आखिरकार इस सौदे को रद्द करने का फैसला कर लिया है। वीवीआईपी हेलीकॉप्टर के इस सौदे में दलाली की सीबीआई जांच की पुख्ता शुरुआत होने से पहले ही सरकार ने करीब 3600 करोड़ रुपये की डील को रद्द करने की दिशा में शुक्रवार को कदम बढ़ा दिया।

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रक्षा मंत्रालय ने इसकी औपचारिक प्रक्रिया शुरू करते हुए इटली की अगस्ता वेस्टलैंड कंपनी को नोटिस भेज दिया है। कंपनी को अपनी सफाई के लिए सात दिन का वक्त दिया गया है। अब तक सीबीआई जांच के बाद कार्रवाई की बात कर रही सरकार ने यह कदम उठा कर इसका पुख्ता इशारा कर दिया है कि हेलीकॉप्टर डील में पहली नजर में रिश्वत का लेनदेन हुआ है।
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सूत्रों ने बताया कि इटली से मिली कुछ रिपोर्टों के बाद सरकार ने यह फैसला किया है। इससे पहले रक्षा मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को फिनमेकानिका कंपनी से उन भारतीय लोगों के नाम जाहिर करने को कहा था जिन्हें दलाली की रकम दी गई। मालूम हो कि सौदा हासिल करने के लिए 362 करोड़ रुपये की दलाली दिए जाने की बात सामने आ रही है। अगस्ता वेस्टलैंड फिनमेकानिका की ही सहायक कंपनी है।
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विदेश मंत्रालय ने भी सौदे को लेकर इटली सरकार से जानकारी मांगी है। साथ ही सीबीआई की एक टीम को इटली भेजने का फैसला भी किया गया है। सीबीआई की एक टीम शुक्रवार को रक्षा मंत्रालय पहुंची और उच्च अधिकारियों से मामले की बारीकियों से जुड़े पहलुओं पर बात की।

ऐसा माना जा रहा है कि अपनी 'मिस्टर क्लीन' छवि पर उठे सवालों से बेचैन रक्षा मंत्री एके एंटनी बजट सत्र की शुरुआत के पहले ही राजनीतिक हड़कंप मचाने वाले इस घूसकांड को थामना चाहते हैं। गौरतलब है कि एंटनी पर इस बात को लेकर उंगली उठने लगी है कि हेलीकॉप्टर सौदे में घूसखोरी की पिछले एक साल से हो रही चर्चा के बावजूद मामले की जांच में देरी क्यों की गई।

इटली की कंपनी के साथ 12 एडब्लू-101 हेलीकॉप्टर के लिए हुए इस सौदे में सरकार ने अब तक सिर्फ तीन हेलीकॉप्टर हासिल किए हैं। बाकी नौ हेलीकॉप्टर मार्च, मई और जुलाई महीने में तीन-तीन की खेप में आने की योजना थी। लेकिन सौदे में घूसखोरी के उजागर होने के बाद रक्षा मंत्रालय ने पूरी डील को ही रद्द करने का कड़ा फैसला ले लिया।

गौरतलब है कि सरकार और कंपनी ने इस सौदे के साथ इंटीग्रिटी समझौता भी किया था। इसमें साफ कहा गया है कि अगर सौदे में किसी बिचौलिए या दलाल को घूस देने की बात सामने आती है तो सौदा रदद् किया जा सकता है।

करार के मुताबिक कंपनी को भुगतान की गई रकम भी वापस करनी होगी और उसे ब्लैक लिस्ट कर दिया जाएगा। इस समझौते का प्रथम दृष्टया उल्लंघन सामने आने को ही आधार बनाते हुए रक्षा मंत्रालय ने डील रद्द करने की यह कार्रवाई शुरू की है।

ओरसी ने अमेरिकी कंपनी की चुटकी ली थी
इटली की कंपनी फिनमेकानिका के सीईओ गियूसेप्पे ओरसी को भारत से हेलीकॉप्टर सौदा हासिल होने का पूरा भरोसा था। इस सौदे का आवंटन होने से एक दिन पहले ही ओरसी ने प्रतिद्वंद्वी अमेरिकी कंपनी सिकोरस्की के अधिकारियों की यह कहकर चुटकी ली थी, आप हमेशा नहीं जीत सकते।

ओरसी ने फरवरी, 2010 में दिल्ली के एक फाइव स्टार होटल में सिकोरस्की के प्रतिनिधिमंडल को शैंपेन की एक बोतल के साथ यह संदेश भिजवाया था। इटली के जांचकर्ताओं की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। 3600 करोड़ के हेलीकॉप्टर सौदे के अंतिम दौर में फिनमेकानिका और सेकोरस्की दो ही कंपनियां थीं और बाद में यह सौदा फिनमेकानिका को हासिल हुआ था।

ओरसी दिल्ली के होटल के रेस्टोरेंट में थे। अचानक उन्हें वहां सिकोरस्की के अधिकारी भी दिखे। तब उन्होंने अमेरिकी कंपनी के अधिकारियों को यह संदेश भिजवाया। ओरसी की इस हरकत से नाराज होकर अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख वहां से उठकर चले गए थे।

सीबीआई ने दर्ज की शिकायत
सीबीआई ने हेलीकॉप्टर घूसकांड की जांच के लिए रक्षा मंत्रालय की ओर से दी गई शिकायत आखिरकार शुक्रवार को दर्ज कर ली। इससे पहले मंत्रालय के अधिकारियों ने इस सौदे से जुड़े दस्तावेज भी जांच एजेंसी को सौंप दिए। शिकायत दर्ज होने के बाद अब जल्द ही सीबीआई की एक टीम जांच के लिए इटली जाएगी। सीबीआई को मामले की जांच दो दिन पहले ही सौंप दी गई थी, लेकिन दस्तावेजों के अभाव में वह जांच की दिशा में कोई भी कदम नहीं उठा पा रही थी।

कंपनी को 30 फीसदी भुगतान हुआ
12 हेलीकॉप्टरों की इस डील में से तीन हेलीकॉप्टर भारत को मिल चुके हैं, जबकि 3600 करोड़ रुपये के इस सौदे में से 30 फीसदी रकम का भुगतान भारत इटली की कंपनी को कर चुका है।

तो क्या भारत को वापस मिलेगी रकम?

रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक सौदे को भ्रष्टाचार से दूर रखने के लिए अगस्ता वेस्टलैंड के साथ इंटीग्रिटी समझौता किया गया था। इस करार के अनुच्छेद 22 और 23 में साफ लिखा है कि करार के उल्लंघन की स्थिति में सौदा रद्द किया जा सकता है। कंपनी को किया भुगतान ब्याज समेत वसूला जा सकता है और उसे ब्लैकलिस्ट करने समेत उसके खिलाफ अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे स्थिति में सौदा रद्द होने पर कंपनी कोई मुआवजा पाने की हकदार भी नहीं होगी।


रक्षा मंत्रालय ने सौदा रद्द करने और करार के मुताबिक अन्य कदम उठाने के लिए अगस्ता वेस्टलैंड को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।--सितांशु कार, रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता

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