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चीन को करारा जवाब, भारत ने उतारा सुपर हरक्यूलिस
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Wed, 21 Aug 2013 01:33 AM IST
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वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीनी सेना की लगातार घुसपैठ से आजिज भारत ने चीन को पहली बार करारा जवाब दिया है।
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भारत ने मंगलवार को लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी में दुनिया के सबसे ऊंचे रनवे पर सबसे बडे़ मालवाहक विमानों में शुमार सी-130 जे सुपर हरक्यूलिस को सफलतापूर्वक उतार कर चीन को कड़ा संदेश दिया है।
वायुसेना का गजराज कहे जाने वाले इस विमान ने गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस से उड़ान भरने के बाद मंगलवार की सुबह लगभग सात बजे दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) में ऐतिहासिक लैंडिंग की।
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चीनी सीमा के नजदीक यह वही क्षेत्र है जहां बीते अप्रैल महीने में चीनी सेना ने 19 किलोमीटर अंदर घुसकर पांच टैंट गाड़ दिए थे। भारत के इसी तीखे प्रतिकार के बाद सकते में आए चीन ने कड़ी आपत्ति जताई है।
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5065 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस रनवे पर बड़े मालवाहक विमान को उतारकर वायुसेना बड़ी कामयाबी हासिल की है।
रक्षा विशेषज्ञों ने भारत के इस कदम को साहसिक और ऐतिहासिक करार दिया है। भारत के इस रुख को चीन को घुसपैठ के मामले में कड़ा संदेश देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक सुपर हरक्यूलिस के लद्दाख भेजे जाने की भनक लगते ही चीन ने विरोध जताना शुरू कर दिया। उसने मालवाहक विमान न उतारने की चेतावनी भी दी। मगर भारत ने चीन की इस धमकी को सिरे से खारिज कर दिया।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक हिंडन एयरबेस से सुपर हरक्यूलिस कमांडिंग ऑफिसर ग्रुप कैप्टन तेजबीर सिंह और वील्ड वाइपर्स की टुकड़ी के साथ विमान को तड़के रवाना किया गया।
डीबीओ की छोटी हवाई पट्टी पर विमान को तड़के 6.54 बजे सफलतापूर्वक उतारने के बाद इसे फिर वापस गाजियाबाद ले आया गया।
पिछले दिनों विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा था कि हम चीन से दब्बू बन कर बातचीत के पक्ष में नहीं हैं। इसके बाद ही माना जा रहा था कि भारत घुसपैठ की बढ़ती घटनाओं पर चीन को कड़ा संदेश देगा।
वैसे भी चीनी प्रधानमंत्री के भारत दौरे के पूर्व 15 अप्रैल को इसी इलाके में 50 चीनी सैनिकों के 19 किलोमीटर अंदर तक घुस आने और टैंट गाड़ कर दो सप्ताह से भी अधिक समय तक डटे रहने के बाद ही भारत ने इस पोस्ट के इस्तेमाल पर गंभीरतापूर्वक सोचना शुरू किया।
दौलत बेग ओल्डी की हवाई पट्टी
16614 फीट यानी 5065 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह हवाई पट्टी और पोस्ट भारत के लिए सामरिक दृष्टि से बेहद अहम है। भारत इस पोस्ट से चीन और पाकिस्तान दोनों पर समान रूप से नजर रख सकता है।
यह चीन की ओर जाने वाले पुराने सिल्क रूट को जोड़ती है। साल 1965 में पाकिस्तान से युद्ध के दौरान इस पोस्ट से भारत को अहम मदद मिली थी। वर्ष 1962 में चीन के साथ युद्ध में भी भारतीय सेना ने इसे बेस बनाया था।
सी-130जे सुपर हरक्यूलिस विमान
भारत ने 95 करोड़ डॉलर में अमेरिका से इस मालवाहक विमान को हासिल किया है। 20 टन तक भार ले जाने में सक्षम यह विमान इंफ्रारेड डिटेक्टशन सेट लगा होने के कारण न केवल कम ऊंचाई पर उड़ान भर सकता है, बल्कि अंधरे में उतरने में भी सक्षम है।
लंबे अभियान के लिए इस विमान में हवा में ही ईंधन भरने की सुविधा है। इसमें आटोमेटिक सिक्योरिटी सिस्टम सहित कई अन्य सामरिक महत्व की आधुनिकतम प्रणालियां जुड़ी हैं।
अपनी इस क्षमता के कारण यह विमान थल और वायुसेना दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह युद्धक साजो समान के अलावा सैन्य टुकड़ियों को दुर्गम इलाकों में पहुंचाने में भी सक्षम है।
43 साल बाद सक्रिय की गई हवाई पट्टी
डीबीओ की हवाई पट्टी 1962 की जंग के दौरान बनाई गई थी और 1965 तक वहां से वायु सेना के पैकेट विमान का संचालन किया गया था। चीन की बढ़ती चुनौती के मद्देनजर 43 साल बाद वायुसेना ने इस हवाई पट्टी को फिर से सक्रिय किया और यहां पहली बार वायुसेना ने 2008 में एन-32 विमान उतारा।
यह बेहद महत्वपूर्ण और साहसिक फैसला है। चीन के अड़ियल रुख के बाद भारत ने सबसे बड़ा सामरिक मालवाहक विमान उतार कर कड़ा संदेश देने की कोशिश की है। हालांकि चीन भारत के इस रुख के बाद पीछे हटेगा या नहीं इस पर अभी कुछ कह पाना कठिन है। मगर भारत ने पहली बार सीधा विरोध जता कर महत्वपूर्ण फैसला लिया है।--सी उदयभास्कर, रक्षा विशेषज्ञ
सी-130 जे सुपर हरक्यूलिस
सैन्य परिवहन एयरक्राफ्ट
इंजन: चार
इंजन क्षमता: 4,700 हॉर्सपावर
निर्माण: अमेरिका के लॉकहीड मार्टिन कंपनी द्वारा। इसे सी-130 हरक्यूलिस का नया अवतार माना जाता है।
गति: करीब 417 मील प्रति घंटा।
वजन उठाने की क्षमता: 33 हजार किलोग्राम तक वजन उठा सकता है।
खासियत: यह इंफ्रारेड तकनीक से लैस है और खराब हवाई पट्टी पर भी उतर सकता है। इसलिए इसे दुर्गम इलाकों में सैनिक कार्रवाई और विपरीत परिस्थितियों में भी सैनिकों को वहां तक पहुंचाने में सक्षम माना जाता है। इसकी खासियत वह ‘कार्गो हैंडलिंग सिस्टम’ भी है, जिसमें कंप्यूटर की सहायता से सुनियोजित तरीके से माल की ढुलाई होती है।
हरक्यूलिस विमान का इस्तेमाल करने वाले देश: भारत के अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, इटली, डेनमार्क, नॉर्वे और कनाडा। 2008 में इस तरह के 6 हरक्यूलिस विमान खरीदने का अमेरिका से सौदा हुआ था। 2 विमानों का पहली खेप जनवरी 2011 में भारतीय वायुसेना के पास पहुंची थी।