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ऑस्ट्रेलिया के साथ परमाणु करार पर लग सकती है मुहर
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Wed, 26 Sep 2012 08:05 PM IST
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ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड के 15 अक्तूबर से शुरू हो रहे तीन दिवसीय भारत दौरे पर दोनों देशों के बीच परमाणु करार पर मुहर लग सकती है। पिछले साल दिसंबर में गिलार्ड के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ लेबर पार्टी ने भारत को यूरेनियम की आपूर्ति संबंधी रास्ता साफ कर दिया था।
इस मुद्दे पर पार्टी की 46वीं नेशनल कांफ्रेंस के दौरान लंबी बहस हुई, जिसके बाद यह फैसला किया गया। ऑस्ट्रेलिया दुनियाभर में यूरेनियम के सबसे बड़े स्रोतों में से एक है। ऐसे में भारत लंबे समय से इस समझौते पर हस्ताक्षर होने की प्रतीक्षा कर रहा है। ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री बॉब केर ने भी अपने भारतीय समकक्ष एस. एम. कृष्णा को संदेश दे दिया था कि भारत को यूरेनियम की आपूर्ति में आने वाली रुकावटों को ऑस्ट्रेलिया दूर करने की कोशिश कर रहा है।
भारत को अपने परमाणु कार्यक्रम के लिए वर्ष 2020 तक 20,000 मेगावाट और 2032 तक 63,000 मेगावाट परमाणु क्षमता हासिल करने की उम्मीद है। देश को 2050 तक 25 प्रतिशत बिजली की सप्लाई न्यूक्लियर पावर के जरिए करने का भी भरोसा है। इसके लिए भारत को यूरेनियम की जरूरत होगी। परमाणु करार के साथ ही दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार और कई अन्य रणनीतिक समझौते भी हो सकते हैं।
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इस मुद्दे पर पार्टी की 46वीं नेशनल कांफ्रेंस के दौरान लंबी बहस हुई, जिसके बाद यह फैसला किया गया। ऑस्ट्रेलिया दुनियाभर में यूरेनियम के सबसे बड़े स्रोतों में से एक है। ऐसे में भारत लंबे समय से इस समझौते पर हस्ताक्षर होने की प्रतीक्षा कर रहा है। ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री बॉब केर ने भी अपने भारतीय समकक्ष एस. एम. कृष्णा को संदेश दे दिया था कि भारत को यूरेनियम की आपूर्ति में आने वाली रुकावटों को ऑस्ट्रेलिया दूर करने की कोशिश कर रहा है।
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भारत को अपने परमाणु कार्यक्रम के लिए वर्ष 2020 तक 20,000 मेगावाट और 2032 तक 63,000 मेगावाट परमाणु क्षमता हासिल करने की उम्मीद है। देश को 2050 तक 25 प्रतिशत बिजली की सप्लाई न्यूक्लियर पावर के जरिए करने का भी भरोसा है। इसके लिए भारत को यूरेनियम की जरूरत होगी। परमाणु करार के साथ ही दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार और कई अन्य रणनीतिक समझौते भी हो सकते हैं।
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