अब भारत में नहीं पढ़ना चाहते प्रवासी छात्र, जानिए क्या है इसका कारण
प्रवासी भारतीय विद्यार्थियों में भारत में पढ़ने की दिलचस्पी घट रही है। हालत यह है कि वर्ष 2014-15 में छात्रवृत्ति योजना के तहत 100 छात्रवृत्तियों के लिए महज 190 प्रवासी विद्यार्थियों ने दिलचस्पी दिखाई। विदेश मामलों की संसदीय समिति का मानना है कि प्रवासी बच्चों की घटती रुचि का सबसे बड़ा कारण देश के संस्थानों की साख में कमी, मान्यता और सीमित पाठ्यक्रम है।
समिति इस मद में बजट आवंटन की राशि से भी संतुष्ट नहीं है। हालांकि विदेश मंत्रालय का कहना है कि प्रवासी बच्चों की घटती रुचि का कारण दी जाने वाली छात्रवृति की राशि और संस्थानों की फीस में भारी अंतर है। मंत्रालय ने संसदीय समिति को बताया है कि सरकार ने वर्तमान में प्रवासी बच्चों को 4000 डॉलर बतौर छात्रवृत्ति मिलती है जबकि देश में एनआईटी की फीस 8500 डॉलर है।
विदेश मंत्रालय ने विभिन्न संस्थानों और विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रमों में प्रवेश केलिए अलग-अलग शर्तों को भी घटती रुचि का कारण बताया है। बहरहाल प्रवासी बच्चों को लुभाने के लिए विदेश मंत्रालय अब छात्रवृत्तियों की संख्या 100 से बढ़ा कर 200 करने और इसकी राशि को 4000 डॉलर से बढ़ा कर 5000 डॉलर करने का मन बनाया है।
2009 से आई अचानक कमी
प्रवासी भारतीय बच्चों में भारत में छात्रवृत्ति के सहारे अध्ययन
करने की रुचि में वर्ष 2009 से अचानक कमी आई है। संसदीय समिति ने इस स्थिति
पर चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि अगर स्थिति ऐसी ही रही तो इस योजना के
सहारे भारत को शिक्षा का लोकप्रिय केंद्र बनाने की सरकार की योजना परवान
नहीं चढ़ पाएगी।
समिति ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि एक तरफ तो सरकार
छात्रवृत्तियों और इसकी राशि में बढ़ोत्तरी की बात कर रही है तो दूसरी तरफ
वर्ष 2013 के मुकाबले वर्ष 2014 में इससे संबंधित बजट में कटौती कर दी गई।
समिति ने विदेश मंत्रालय से जानना चाहा है कि उसने इस मद में अधिक आबंटन की
मांग क्यों नहीं रखी।
इसके जवाब में विदेश मंत्रालय का कहना है कि
चूंकि छात्रवृत्ति की राशि से संस्थानों के पाठ्यक्रमों की फीस नहीं भरी जा
सकती, इसलिए इस योजना के प्रति दिलचस्पी घटी है। इसके अलावा मंत्रालय ने
संस्थानों और विश्वविद्यालयों में प्रवेश के अलग-अलग मानक पर भी चिंता जताई
है।
समिति को दिए जवाब में मंत्रालय ने कहा है कि इस व्यवस्था के कारण
प्रवासी बच्चों में असमंजस की स्थिति पैदा हो जाती है। अलग-अलग मापदंड के
कारण प्रवासी बच्चों में संबंधित पाठ्यक्रम के लिए चुने जाने पर मन में
संदेह रहता है। मंत्रालय ने आश्वस्त किया है कि वह भविष्य में उन छात्रों
को ही छात्रवृत्ति देना सुनिश्चित करेगा जिसका उसकी रुचि के पाठ्यक्रम में
चयन होना तय हो।