वार्ता टाल भारत ने पाकिस्तान को दिया कार्रवाई का वक्त
पाकिस्तान से बातचीत की गाड़ी पटरी से उतरते उतरते संभल जरूर गई है, मगर भविष्य की राह इतनी भी आसान नहीं है। दरअसल भारत ने कूटनीतिक चतुराई दिखाते हुए विदेश सचिव स्तर की वार्ता को टाल कर पाकिस्तान को पठानकोट हमला मामले में कार्रवाई का वक्त दिया है।
वार्ता से पहले भारत इस हमले में शामिल लोगों के खिलाफ पाकिस्तान के भावी रुख को ठोक बजा कर देख लेना चाहता है। अगर निकट भविष्य में भारत के मन मुताबिक कार्रवाई नहीं हुई तो विदेश सचिव स्तर की वार्ता की तारीख और आगे बढ़ाई जा सकती है।
भारत दरअसल हमले में शामिल आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के मुखिया मौलाना मसूद अजहर पर हर हाल में शिकंजा कसना चाहता है। पाकिस्तान ने बुधवार को इस संगठन के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई तो की, मगर बाद में मसूद अजहर की हिरासत या गिरफ्तारी की सूचना गलत निकली।
जैश के मुखिया पर हर हाल में शिकंजा कसना चाहता है भारत
कूटनीतिक और विदेश मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि विदेश सचिव स्तर की
वार्ता की तारीख नए सिरे से घोषित करने का फैसला कर भारत ने दरअसल
पाकिस्तान पर कार्रवाई का दबाव बनाए रखा है। दोनों देशों के रिश्ते सुधारने
की कवायद का अंजाम इस मामले में पाकिस्तान के भावी रुख पर निर्भर करेगा।
दरअसल
बुधवार को जैश ए मोहम्मद के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई से पाकिस्तान ने
भारत को ही नहीं, बल्कि दुनिया को आतंकवाद के खिलाफ संजीदगी से कार्रवाई का
संदेश दिया। पाकिस्तान की रणनीति थी कि इस कार्रवाई के आधार पर वह भारत को
विदेश सचिव स्तर की 15 जनवरी को होने वाली वार्ता के लिए राजी कर ले।
पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल कहते हैं भारत ने वार्ता को टाल कर पाकिस्तान
पर कार्रवाई का दबाव बदस्तूर जारी रखा है। चूंकि भारत ने वार्ता रद्द नहीं
कर नई तारीख की बात की है, ऐसे में पाकिस्तान भारत पर वार्ता से पीछे हटने
का आरोप नहीं लगा सकेगा। सिब्बल को हालांकि पाकिस्तान की ओर से कार्रवाई
पर संदेह है।
वह कहते हैं कि आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद और लश्कर ए तयबा
दोनों का आधार पंजाब प्रांत है, जो कि सत्तारूढ़ मुस्लिम लीग का भी आधार
है। ऐसे में नवाज शरीफ इन संगठनों के खिलाफ कार्रवाई का खतरा उठा कर अपने
लिए संकट पैदा नहीं कर सकते।