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दुनिया पर दबाव बनाने को तैयार भारत, जानें कैसे?

Fri, 30 Oct 2015 01:52 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 30 Oct 2015 01:52 AM IST
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India gets support of African nations to permanent membership in UN

भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र में स्थाई सदस्यता पर दावा जताने संबंधी प्रस्ताव पारित किया जा सकता है। भारत इस क्रम में दो दिनों से अफ्रीकी देशों के साथ जारी द्विपक्षीय वार्ता में इस बारे में सहमति बनाने में जुटा है।

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भारत चाहता है कि प्रस्ताव में उसके साथ यूएन में अफ्रीकी महाद्वीप को प्रतिनिधित्व देने की मांग शामिल हो। खासतौर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मामले में खुद मोर्चा संभाल रखा है।
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बुधवार को उनकी 19 अफ्रीकी देशों केसाथ हुई द्विपक्षीय वार्ता में प्रस्ताव लाए जाने संबंधी मुद्दा अहम एजेंडे में शामिल था। इसके अलावा विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी दो दिनों में 21 विदेश मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता के दौरान इस मुद्दे पर सहमति बनाने की कोशिश की। भारत की लिए राहत की बात यह है कि इस मामले में अफ्रीकी देशों का रुख सकारात्मक है।
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अफ्रीकी देशों में सर्वाधिक ताकतवर दक्षिण अफ्रीका ने तो मंगलवार को यूएन पर वैश्विक शांति, स्थिरता स्थापित करने और विकास का लक्ष्य हासिल करने में नाकाम रहने तक का आरोप लगाया था। जबकि सुषमा ने यूएन के वर्तमान ढांचे पर यह कहकर सवाल खड़ा किया था कि इसमें दुनिया की आबादी के छठवें हिस्से को संतुलित भागीदारी से दूर रखा गया है।

चीन सबसे बड़ा रोड़ा

India gets support of African nations to permanent membership in UN

विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक इस आशय का प्रस्ताव लाने का एजेंडा काफी पहले तय कर लिया गया था। सम्मेलन के लिए निमंत्रण देने के दौरान भी भारत ने इस संबंध में सहमति बनाने की कोशिश की थी। जबकि सम्मेलन में भी यह कोशिश जारी है।

उक्त अधिकारी के मुताबिक शीर्ष स्तर पर सम्मेलन में शिरकत करने आए देशों में से 50 फीसदी का मन टटोला जा चुका है। इनका रुख प्रस्ताव के प्रति सकारात्मक है। इसलिए सम्मेलन में इस आशय का प्रस्ताव लाने जाने और इसे पारित किए जाने की भरपूर संभावना है।

गौरतलब है कि यूएन महासभा की बैठक में भी भारत ने स्थाई सदस्यता का दावा ठोका था। इस दौरान पीएम मोदी के अमेरिकी दौरे में राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी भारत की दावेदारी का समर्थन किया था। बहरहाल भारत की दावेदारी की राह में यूएन का स्थाई सदस्य चीन सबसे बड़ा रोड़ा है।

भारत की कोशिश अब दुनिया के छोटे और अहम देशों का समर्थन हासिल कर यूएन पर दबाव बनाने की है। यही कारण है कि इस सम्मेलन के इतर भी पीएम मोदी अपने विदेश दौरे में भारत की स्थाई सदस्यता के लिए समर्थन जुटाने में लगे हैं।

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