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'विकास की दौड़ में चीन की राह पर न चले भारत'

Mon, 09 Feb 2015 12:14 AM IST
Updated Mon, 09 Feb 2015 12:14 AM IST
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India did not follow the development of China

राष्ट्रीय स्मारकों पर धुंध की काली परतें पड़ गई हैं। पैदल चलने वाले और ट्रैफिक पुलिसकर्मी सड़कों पर मुंह पर मास्क लगाए आ-जा रहे हैं। स्कूलों में बच्चों को दम घुटा जा रहा है। यह तस्वीर थी तकरीबन दो साल पहले चीन की राजधानी बीजिंग की। जहां प्रदूषण की वजह से सांस लेना तक दूभर हो गया था।

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वातावरण इतना खतरनाक रूप अख्तियार कर चुका था कि आखिरकार सरकार को इस पर तत्काल लगाम लगाने के लिए कुछ कदम उठाना पड़ा। कमोबेश यही हाल आज भारत की राजधानी दिल्ली की भी है, जो दुनिया के सबसे दूषित शहरों में शामिल हो चुकी है।
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भारत का तो मकसद  अगले 30 सालों में चीन की तरह विकास की राह पर दौड़ने का है, वह भी बगैर प्रदूषण के। यानी अपने वातावरण को साफ सुथरा बनाए रखते हुए विकास करना। हालांकि, भारत के लिए यह काम बेहद चुनौतीपूर्ण होगा। वैसे भी भारत को विकास करने के मामले में चीन का अंधानुकरण करने से बचना चाहिए।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चीन से सबक लेते हुए पर्यावरण कानूनों में सुधार करना चाहिए, जो पुराने पड़ चुके हैं। आज जैसे चीन कार्बन उत्सर्जन में कटौती कर रहा है, वैसे ही अगर भारत भी करने लगे तो इससे हरेक को फायदा ही होगा। खासकर भारतीयों को, यह सलाह दी गई एक नए अध्ययन में।

भारत को हासिल है चीन पर बढ़त

India did not follow the development of China

इसके मुताबिक, वायु प्रदूषण की वजह से लोगों की जीवन प्रत्याशा घट रही है। उत्तरी चीन के लोगों में तो जीवन प्रत्याशा में तकरीबन 5.5 साल की कमी देखी गई। शोधकर्ता अब भारत का अध्ययन कर रहे हैं और अभी तक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि भारत में भी वायु प्रदूषण की वजह से जीवन प्रत्याशा में तकरीबन तीन साल की कमी आई है।

हालांकि, भारत को कुछ मामलों में चीन से बढ़त हासिल है। जहां चीन ने सोवियत रूस की तर्ज पर खुद को भारी उद्योगों के विकास में झोंक दिया, जिनसे बेतहाशा वायु प्रदूषण हुआ, वहीं भारत ने इस मामले में सीमित तौर पर उद्योगों के विकास को बढ़ावा दिया। उसका सबसे ज्यादा जोर सेवा क्षेत्र पर रहा।

भारतीय प्रशासन साफ पानी या शुद्ध हवा को दरकिनार कर आर्थिक विकास को बढ़ावा देने का पक्षधर नहीं रहा है, जबकि चीन में किसी भी कीमत पर विकास की रफ्तार को बढ़ाने पर ही जोर ज्यादा रहा। यही नहीं भारतीय अक्सर अपने पर्यावरण का ख्याल रखते हैं।

कैप एंड ट्रेड नीति लागू हो

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उनकी प्राचीन परंपराओं में भी अपने हरे भरे वातावरण को बनाए रखने पर खासा बल दिया जाता रहा है। जैसे कि प्राचीन सम्राट अशोक ने अपने एक अभिलेख में लोगों को संबोधित करते हुए कहा है, ‘बगैर किसी खास वजह के अपने आस-पास के वनों और वन्य जीवों को नष्ट नहीं करना चाहिए।’

हालांकि, इन सबके बावजूद भारत को अपने लचर पर्यावरण कानूनों में खासा सुधार करने की जरूरत है। वहां का सुप्रीम कोर्ट भी पर्यावरण संरक्षण पर निगाह रखता है।

प्रधानमंत्री मोदी को भी पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहतर नीतियां और कानून बनाने चाहिए। अच्छी बात यह है कि भारत ने पर्यावरण संरक्षण के लिए गंभीरता दिखाई है। इसने पिछले ही साल डीजल पर सब्सिडी खत्म कर दी। इस वजह से बेवजह के वाहन, जनरेटर चलाने पर लगाम लगेगी।

खराब बौर गंदे बिजली संयंत्रों को बंद करना चाहिए। सरकार को गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु से सीख लेनी चाहिए, जिन्होंने दुनिया की पहली कैप एंड ट्रेड योजनाएं शुरू की हैं। यानी इस योजना के तहत इकाइयों को प्रदूषण की मात्रा के हिसाब से अतिरिक्त कर देना होगा, इस आय को पर्यावरण के संरक्षण पर खर्च किया जाएगा।

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