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अर्थव्यवस्था की विकास दर में चीन से आगे रहेगा भारत

Tue, 10 Feb 2015 09:21 AM IST
Updated Tue, 10 Feb 2015 09:21 AM IST
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india defeat china on economic growth

एशिया महाद्वीप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन की विकास दर से भारत के आगे निकलने के दिन आ गए हैं। वर्ष 2014-15 के लिए सरकार की तरफ से जारी किए गए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों के मुताबिक इस वर्ष भारत की विकास दर 7.4 फीसदी रहने के अनुमान है, जबकि चीन के लिए 7.1 फीसदी का अनुमान व्यक्त किया गया है।

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चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में भी भारत की विकास दर बढ़ कर 7.5 पर पहुंच गई है। केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) के अतिरिक्त महानिदेशक आशीष कुमार ने सोमवार को यहां वर्ष 2014-15 की अवधि के लिए जीडीपी के आंकड़ों की घोषणा करते हुए बताया कि इस वर्ष देश की विकास दर 7.4 फीसदी रहने की अनुमान है।
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एक वर्ष पहले यह 6.9 फीसदी थी। उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले ही सरकार ने राष्ट्रीय आय की गणना के लिए आधार वर्ष 2005-06 के बदले 2011-12 तय किया था। उन्होंने बताया कि यह परिवर्तन इसलिए दिखा क्योंकि सकल घरेलू उत्पाद की गणना फैक्टर कॉस्ट के बदले बाजार मूल्य (मार्केट प्राइस) पर की गई।
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चीन की विकास दर 7.1 फीसदी रहने का अनुमान

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ऐसा सिर्फ भारत में नहीं हुआ है, बल्कि दुनिया भर में इसी तरह से बाजार मूल्य पर गणना होती है। गणना की नई प्रद्धति से भारत विकास दर के मामले में इसी वर्ष चीन को पछाड़ सकता है। एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में चीन का पूरे एशिया महाद्वीप में दबदबा है।

चीन के केंद्रीय बैंक ने चालू वर्ष के लिए 7.1 फीसदी के विकास दर का अनुमान व्यक्त किया है। कुमार के मुताबिक भारत में जो नई पद्धति से गणना हो रही है, उसके मुताबिक चालू वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी की विकास दर 6.5 फीसदी, दूसरी तिमाही में 8.2 फीसदी और तीसरी तिमाही में 7.5 फीसदी है।

पूरे वर्ष के लिए 7.4 फीसदी विकास का अनुमान है। हालांकि गणना की पद्धति बदलने के बावजूद कृषि क्षेत्र में विकास दर संतोषजनक नहीं हो पाया है। कुमार ने बताया कि वर्ष 2014-15 में खेती-बारी, बागवानी और मछलीपालन क्षेत्र की विकास दर 1.1 फीसदी रहने का अनुमान है, जबकि एक साल पहले इस क्षेत्र की विकास दर 3.7 फीसदी थी।

खेती-बारी क्षेत्र में पछड़ी हुई है देश की स्थिति

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इसकी वजह इस साल खाद्यान्न के उत्पादन में 2.9 फीसदी की कमी आना है। एक साल पहले देखें, तो तब खाद्यान्नों के उत्पादन में 3.0 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी। इस वर्ष दलहनी फसलों के उत्पादन में जहां 3.4 फीसदी की गिरावट का अनुमान है वहीं, तिलहनी फसलों का उत्पादन 9.6 फीसदी घट रहा है।

पिछले साल दलहनी फसलों का उत्पादन 5 फीसदी बढ़ा था, जबकि तिलहन का उत्पादन 6.3 फीसदी बढ़ा था। हालांकि बागवानी फसलों तथा फल एवं सब्जियों कि उत्पादन में 1.1 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान है।

इस दौरान खनन में 2.3 फीसदी, कंस्ट्रक्शन में 4.5, वित्तीय सेवाओं में 13.7, विनिर्माण में 6.8, सेवा क्षेत्र में 10.6 और उद्योग क्षेत्र में 5.9 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान है।

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