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हिंदुस्तानियों की कमजोर नजर लगा रही अरबों की चपत

Sat, 01 Jun 2013 12:47 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Sat, 01 Jun 2013 12:47 PM IST
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India could gain USD 37 billion in extra productivity by vision correction

हमारे-आपके आसपास निगाह कमजोर होने और चश्मे का नम्बर बढ़ाने की बात करने वाले कई लोग होंगे, लेकिन इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है कि इस दिक्कत की वजह से देश कितनी बड़ी कीमत चुका रहा है।

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आप यह जानकर हैरान रह जाएंगे कि वर्कफोर्स की निगाह कमजोर होने की वजह से भारतीय 2,03,500 करोड़ रुपए (37 अरब डॉलर) की सालाना प्रोडक्टिविटी का नुकसान उठा रहे हैं।
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और यह समस्या हमारे देश तक ही सीमित नहीं है। दुनिया भर में इस वजह से करीब 269 अरब डॉलर का घाटा हो रहा है।

दुनिया में करीब 4.2 अरब लोगों को कमजोर नजर की वजह से चश्मे, लेंस या ऑपरेशन की जरूरत है और इनमें से 2.5 अरब लोगों इन उपायों तक पहुंच नहीं रखते। इस दिक्कत से 55 करोड़ भारतीय जूझ रहे हैं।
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देश की कुल वर्कफोर्स में से 42 फीसदी से ज्यादा लोगों को विजन करेक्शन की जरूरत है। आंखों की जांच कराने और चश्मा लगाने जैसे बेहद सरल उपाय से यह तादाद काफी नीचे आ सकती है।

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