बीफ पर ब्राजील देगा भारत को झटका?
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महाराष्ट्र सरकार ने मार्च के पहले हफ्ते में जब गोहत्या और बीफ की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया तो उसी दौरान इराक ने ब्राजील से बीफ के आयात को फिर से शुरू करने का फैसला लिया।
लातिनी अमेरिकी देश ब्राजील में मैड काऊ बीमारी का एक मामला सामने आने के कारण इराक ने अप्रैल 2014 में बीफ के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था। हो सकता है कि भारत के राज्यों में लगे प्रतिबंध और इराक के प्रतिबंध हटाने की ये दोनों घटनाएं महज संयोग हों। लेकिन भारत के कई राज्यों में उठाए गए इस कदम से, ब्राजील के लिए बीफ व्यापार में एक बेहतरीन मौका पैदा हो गया है।
आने वाले महीनों में भारत से बीफ निर्यात और इससे होने वाली आमदनी में गिरावट आ सकती है और ब्राजील को भारत के इस नुकसान से फायदा हो सकता है। भारत दुनिया में बीफ का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश है।
भारत के बीफ निर्यात पर पड़ा असर
अमेरिकी कृषि विभाग (यूएसडीए) की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की बाजार हिस्सेदारी 20 प्रतिशत है। ब्राजील पहले पायदान पर है। भारत दक्षिण पूर्वी एशिया और मध्य पूर्व के देशों को बीफ निर्यात करता रहा है, जो कि बड़े पैमाने पर भैंस का मांस होता है। बीफ निर्यात से भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा पाने वाला
ब्राजील इन दोनों इलाके में अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए बहुत कोशिश करता रहा है। ब्राजीलियन एसोसिएशन ऑफ बीफ इंडस्ट्री एंड एक्सपोर्ट (एबीआईईसी) से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार, “साल 2014 में भारत से बीफ के निर्यात में 12 फीसदी बढ़ोतरी हुई और आमदनी में 27 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।”उनका कहना था, “हालांकि अभी तक हम नहीं जानते कि भारत से बीफ निर्यात में क्या कोई गिरावट आई है।
लेकिन यह एक ऐसा मौका है, जिसे हम भुनाना चाहेंगे। हम लगातार बाजार पर नजर बनाए हुए हैं।” हाल के सालों में ब्राजील के कुछ प्रांतों में मैड काऊ बीमारी के कुछ मामले सामने आने से बीफ के निर्यात पर असर पड़ा है।
बीफ निर्यात बढ़ा था
इस कारण चीन, सऊदी अरब और इराक़ जैसे देशों ने ब्राज़ील से बीफ के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था। अब इराक के लिए ब्राजील से निर्यात बढ़ सकता है, तो सऊदी अरब भी इराक के रास्ते पर जा सकता है।
खाड़ी के देश अक्सर सऊदी अरब के नक्शे कदम पर चलते हैं। सऊदी अरब ने ब्राजील के बीफ पर 2012 में ही प्रतिबंध लगा दिया था। एबीआईईसी अधिकारी के अनुसार, “इन कारणों से भारत से बीफ के निर्यात में बढ़ोतरी हुई थी लेकिन इन देशों को बीफ निर्यात बढ़ाने के लिए अब हम फिर से दौड़ में शामिल हो गए हैं।” अप्रैल से अक्तूबर 2014 के बीच भारत ने 2।6 अरब डॉलर (लगभग 16 हजार करोड़ रुपए) का बीफ निर्यात किया।
यह अप्रैल से अक्तूबर 2013 के मुकाबले 16 फीसदी ज्यादा है। गुणवत्ता के लिहाज से अप्रैल से अक्तूबर 2014 के बीच कुल 8,17,844 टन बीफ निर्यात हुआ था, जबकि अप्रैल से अक्तूबर 2013 के मुकाबले यह 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी है।
ब्राजील को फायदा
भारत से बीफ चीन और मध्य पूर्व के देशों को निर्यात हुआ, जहां ब्राजीली मांस प्रतिबंधित था। लेकिन ब्राजील को पिछले साल नवंबर में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई, जब ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन में जी 20 देशों के सम्मेलन के दौरान उसने चीन से मांस व्यापार को दोबारा शुरू करने पर समझौता किया। इसी तरह का एक और समझौता हाल ही में सऊदी अरब के साथ हुआ है।
अब ब्राजील में बीफ़ उत्पादन में तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की संभावना है। साल 2014 की पहली छमाही में ब्राजील से बीफ़ निर्यात 7,60,000 टन को पार कर गया था। एबीआईईसी के आंकड़ों के अनुसार यह दहाई अंक की सालाना बढ़ोतरी है। असल में ब्राजीली मुद्रा रियाल में अवमूल्यन की वजह से दिसंबर से ही खाड़ी और उत्तरी अफ्रीकी देशों को भारतीय बीफ निर्यात में कमी आती जा रही थी।
ब्राजीली मुद्रा में गिरावट
रियाल का छह महीने में ही 20 फीसदी अवमूल्यन हो चुका है। चूंकि इन इलाकों के बाजार पर कब्जे के लिए भारत और ब्राजील सीधे प्रतिद्वंद्विता कर रहे हैं, इसलिए भारत के मुकाबले ब्राजील से आयात ज्यादा सस्ता हो गया है।
साओ पाओलो के एक मीट एक्सपोर्टर ने बताया, “इससे पहले भारत से आने वाला मांस 25 फीसदी सस्ता पड़ता था। अब ब्राजीली मांस ज्यादा सस्ता हो गया है। बीफ पर पाबंदी से ज्यादा झटका तो भारत को ब्राजीली मुद्रा के लुढ़कने से लगने वाला है।”
ब्राजील की मुद्रा में गिरावट और अर्थव्यवस्था में सुस्ती के कारण बीफ़ निर्यात में तेज़ी वरदान साबित हो सकती है। एबीआईईसी के अनुमान के अनुसार, बीफ के निर्यात से ब्राजील को होने वाली आमदनी 2015 में आठ अरब डॉलर तक पहुंच सकती है और निर्यात 17 लाख टन पहुंच सकता है।
ब्राज़ील को 2014 में 7.2 अरब डॉलर की आमदनी हुई थी। रूस को बीफ़ निर्यात और चीन, सऊदी अरब और जापान जैसे बाजारों के खुलने से ब्राज़ील के बीफ़ निर्यात में जल्द ही नाटकीय तेजी आ सकती है।