आज से 111 बस्तियां बांग्लादेश के हिस्से, तो 51 बस्तियां भारत की
सरहदी बस्तियों की अदला-बदली के लिए भारत और बांग्लादेश के बीच हुआ जमीन समझौता शुक्रवार से लागू हो गया। इसी साल जून में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बांग्लादेश दौरे के समय दोनों देशों ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
इस समझौते के तहत भारत की 111 बस्तियां बांग्लादेश की हो जाएंगी जबकि बांग्लादेश की 51 बस्तियां भारत की हो जाएंगी। भारत, बांग्लादेश को 17,160 एकड़ जमीन लौटाएगा जबकि भारत के हिस्से में 7110 एकड़ जमीन शामिल होगी।
बांग्लादेश स्थित भारतीय भूखंडों में रहने वाले लगभग 37 हजार लोगों में से महज 979 ने ही भारत लौटने का फैसला किया है। दूसरी ओर, भारत स्थित बांग्लादेशी बस्तियों में से किसी भी व्यक्ति ने बांग्लादेश का नागरिक बनने की इच्छा नहीं जताई है।
समझौते के कई प्रावधानों को चरणबद्धे तरीके से अगले 11 महीनों में लागू किया जाना है। केंद्र ने इन बस्तियों में रहने वाले लोगों के पुनर्वास के लिए राज्य सरकार को 3048 करोड़ रुपये का भारी-भरकम पैकेज दिया है।
आज से दोनों ओर के लोग मनाएंगे नई आजादी का जश्न
भारत और बांग्लादेश के बीच जमीन की अदला-बदली का पहला समझौता 16 मई, 1974 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और बांग्लादेश के प्रधानमंत्री शेख मुजीबुर्रहमान के बीच हुआ था।
बांग्लादेश की संसद ने इस समझौते को 1974 में ही मंजूरी दे दी थी, लेकिन समझौते के लिए जमीन की अदला-बदली के लिए भारत में संविधान संशोधन की जरूरत की वजह से इसे आखिरी रूप देने में इतना लंबा समय लग गया। मई में संसद ने इस पर मुहर लगाई थी।
दरअसल, आजादी के बाद बंटवारे और भारत में तत्कालीन कूचबिहार राज्य के विलय के चलते भारत में ऐसे 51 भूखंड आ गए, जिन पर बांग्लादेश का मालिकाना हक था।
इसी तरह बांग्लादेश में 111 भारतीय भूखंड चले गए। दूसरे देश की सीमा से घिरे होने की वजह से इन भूखंडों में रहने वाले लोग अब तक तमाम मौलिक और संवैधानिक अधिकारों से वंचित थे।
कूचबिहार जिले में पसरे इन 51 भूखंडों में लगभग 14 हजार लोग रहते हैं। अब समझौते के औपचारिक रूप से लागू होने के बाद शनिवार से ये तमाम लोग भारतीय नागरिक बन गए हैं।
भारत-बांग्लादेश भूखंड विनिमय समिति के मुख्य संयोजक दीप्तिमान सेनगुप्ता कहते हैं कि यह समझौता हमारे आंदोलन की जीत है। इसने हजारों लोगों को एक नई पहचान दे दी है।
इंदिरा गांधी और शेख मुजीबुर्रहमान के बीच हुआ था समझौता
नए पिन कोड का तोहफा
भारत में जिन राज्यों की कॉलोनियों की अदला-बदली होगी, वे हैं असम, मेघालय, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल। एक अनुमान के मुताबिक इस फैसले की जद में आने वाली भारतीय कॉलोनियों में 37 हजार लोग रहते हैं।
वहीं बांग्लादेशी कॉलोनियों में 14 हजार लोग रहते हैं। यानी देश में इन नए 14 हजार नागरिकों को नए पिन कोड का तोहफा मिलेगा। 16 मई 1974 को हुआ इंदिरा गांधी और शेख मुजीबुर्रहमान के बीच समझौता हुआ था।
जमीन का बंटवारा
51 बांग्लादेशी बस्तियां भारत के हिस्से
111 भारतीय बस्तियां बांग्लादेश के हिस्से
बांग्लादेश को मिलेगी 17,160 एकड़
भारत को मिलेगी सिर्फ 7110 एकड़