फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   india asks china to pull back troops in ladakh

भारत ने चीन को चेताया, हटाने ही होंगे सैनिक

Wed, 24 Apr 2013 12:53 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Wed, 24 Apr 2013 12:53 AM IST
विज्ञापन
india asks china to pull back troops in ladakh

भारत ने चीन से दो टूक कहा है कि उसे लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) से अपने सैनिक हटाने ही होंगे।

विज्ञापन


पिछले सात दिनों से वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर आमने-सामने की स्थिति के बीच मंगलवार को भारत और चीनी सेना के ब्रिगेडियरों की इस विवाद पर दूसरी फ्लैग मीटिंग हुई। जो बेनतीजन रही।

चीन के अड़ियल रवैये को देखते हुए सेना प्रमुख बिक्रम सिंह हालात का जायजा लेने जम्मू-कश्मीर पहुंच गए हैं। जहां जीओसी केटी परनाइक ने उन्हें चीनी सेना की घुसपैठ करने की पूरी रिपोर्ट भी सौंपी।
विज्ञापन


रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक एलएससी की पश्चिमी सीमा के दस किलोमीटर भीतर घुस कर चौकी स्थापित करने में चीनी सैनिकों की मदद उसकी सेना के हेलीकॉप्टर ने की है।
विज्ञापन
विज्ञापन


यानि इस बार चीन ने वायु सीमा का भी उल्लंघन किया है। दोनों देशों के बीच एलएसी की अलग-अलग अवधारणा के चलते घुसपैठ की छिटपुट घटनाएं अक्सर दोनों ओर से हो जाती हैं।

लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि चीनी सेना ने भारतीय सीमा में दस किलोमीटर भीतर घुस कर चौकी तैयार की है। भारत इस मामले को फिलहाल खुले तौर पर तूल नहीं दे रहा।

लेकिन अंदरखाने चिंता की स्थित बनी हुई है। मंगलवार को हुई फ्लैग मीटिंग पहले मीटिंग की ही तरह बेनतीजतन रही।

चीन ने इस घुसपैठ पर भारत के आरोप को खारिज कर दिया है। लेकिन भारत ने कह दिया है कि उसे अपनी सेना को हटा कर पहले वाली स्थित में ले जाना होगा।
 
विदेश मंत्रालय (एमइए) के प्रवक्ता सैयद अकबरउद्दीन ने कहा है कि एलएसी पर इस तरह के विवाद पहले भी दोनों देशों ने बातचीत से सुलझाया है। इस विवाद को भी जल्द ही सुलझा लिया जाएगा।

अकबरउद्दीन के मुताबिक सीमा पर आमने सामने की स्थित बनी हुई है। हालांकि सरकार इसे अति तनावपूर्ण स्थित नहीं मान रही।

अकबरउद्दीन के मुताबिक 2005 के भारत चीन प्रोटोकॉल के तहत सीमा अवधारणा के फर्क या किसी दूसरी वजह से आमने सामने की स्थित आ जाती है तो दोनों सेना पूरा संयम बरतेगी।

प्रोटोकॉल के मुताबिक दोनों सेना बिना समय गंवाए सरकार स्तर पर बातचीत से इस विवाद को दूर करेंगे।

अकबरउद्दीन ने कहा है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को चीन की यात्रा करनी है और चीनी राष्ट्रपति के पास भी भारत की न्यौता है। दोनों देश इन यात्रा के प्रति गंभीर हैं और तारीखें तय की जा रही है।

यह है चीन की चालाकी
-रक्षा मंत्रालय के एक तजुर्बेकार अधिकारी ने चीन की इस हरकत को सामरिक चाल बताया है। उसके मुताबिक 1962 की लड़ाई में भारत ने डीबीओ में अपनी अच्छी पैठ बनाई है।

चीनी सेना डीबीओ से हटेगी जरूर लेकिन इसके एवज में एलएसी के किसी दूसरे सेक्टर में रिआयत की मांग करेगी।

जारी है बातचीत का दौर

- दोनों सेनाओं के बीच बातचीत के अतिरिक्त विदेश सचिव रंजन मथाई भारत में चीन के राजदूत को तलब कर अपना पक्ष रख चुके हैं।

इसके अलवा विदेश मंत्रालय के इंडो-चाइना ज्वायंट वर्किंग मैकेनिज्म के संयुक्त सचिव गौतम बंबावाले ने अपने चीनी समकक्ष से फोन पर बातचीत पर भारत के रुख से अवगत कराया है।

भारत की ओर से शांतिपूर्ण हल के तमाम पहल के बावजूद चीन लगातार इस घुसपैठ से इनकार कर रहा है।

भारत भेजेगा और सैनिक
- चीन घुसपैठ और उसके अड़ियल रवैये को देखते हुए भारत डीओबी में और सैनिक टुकड़ियां भेज सकता है। हालांकि उसका किसी प्रकार की टक्कर लेने का इरादा नहीं है।

तनाव की स्थिति को देखते हुए भारतीय सेना की इंफेंट्री रेजीमेंट लद्दाख स्काउट को पहले ही भेजा चुका है। इस रेजीमेंट को पहाड़ों पर युद्ध की विशेषज्ञता हासिल है।

यहां भारत तिब्बत सीमा पुलिस भी पहले से मौजूद है। सूत्रों ने कहा कि यदि तनाव कम नहीं होता है और चीन पीछे हटने से इंकार कर देता है तो भारत इस क्षेत्र में और सैनिक टुकड़ियां भेज सकता है।

क्या है मामला
-चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की एक पलटन ने 15 अप्रैल की रात को भारतीय सरजमीं में 10 किमी अंदर तक डीबीओ सेक्टर के बरथे में घुसपैठ की।

यह जगह करीब 17000 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। चीनी सैनिकों ने यहां तंबू लगाकर एक चौकी बना ली। चीनी सेना की पलटन में आमतौर पर 50 सैन्यकर्मी होते हैं।

इस घुसपैठ के विरुद्ध भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों ने भी उस चौकी के सामने करीब 300 मीटर की दूरी अपना कैंप स्थापित कर लिया है। इलाके में तनाव की स्थिति है।

डीबीओ है ठंडा रेगिस्तान
- दौलत बेग ओल्दी उत्तरी लद्दाख में स्थित एक ऐतिहासिक कैंप साइट है। यह लद्दाख और चीन के झिंजियांग में यारकंद के बीच प्राचीन व्यापारिक मार्ग है।

यह भारत के सुदूर उत्तर में कराकोरम रेंज में स्थित ठंडा रेगिस्तानी इलाका है। यह चीन सीमा से मात्र 8 किमी दक्षिण और भारत-चीन के बीच स्थित अक्साई चिन एनएसी के उत्तर पूर्व में 9 किमी दूर है।

सर्दियों में यहां का तापमान माइनस 30 डिग्री सेल्सियस तक रहता है। डीबीओ में स्थायी रूप से कोई नहीं रहता है।

अन्य देशों से भी हैं चीन के सीमा विवाद
- चीन का सीमा विवाद भारत के अलावा उसके अन्य पड़ोसी देशों से भी है।

दक्षिण चीन में वह वियतनाम और फिलीपींस से दक्षिण चीन सागर की सीमाओं के लिए टकराता रहा है। पूवी चीन साग में भी कुछ द्वीपों को लेकर उसका जापान से विवाद है।

विवाद सुलझाना जरूरी: चीन
- दोनों देशों को आपसी संबंध बेहतर बनाने के लिए सीमा विवादों को सुलझाना होगा। दोनों देशों के संबंध सही दिशा में विकसित हो रहे हैं और सीमा विवाद पर सहयोगपूर्ण बातचीत जारी है।

अतीत में अनसुलझे रह गए विवादों का शांतिपूर्ण निपटारा जरूरी है, ताकि भविष्य में अच्छे संबंध बनें। हमारे सैनिक दोनों देशों के बीच हुए समझौतों से बंधे हैं और वे चीन की सीमा में रह कर ही अपने कर्तव्य निभा रहे हैं। उन्होंने नियंत्रण रेखा पार नहीं की है।
हुआ चुनयिंग, बीजिंग में चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता

सरकार का रवैया बेहद कमजोर: जोशी
- चीन के प्रति सरकार का रवैया बेहद कमजोर है। चीन को लेकर सरकार की नीतियां सेना का उत्साह गिराने वाली हैं।

करीब 13 से 14 बार चीन ऐसी घुसपैठ कर चुका है और अब तो वह दस किलोमीटर अंदर तक घुस आया है। इसके बावजूद सरकार विरोध नहीं जता रही। इससे साफ है कि हमारी रक्षा नीतियां कमजोर हैं।


सरकार को चीन को लेकर अपनी नीति की तत्काल पूर्ण समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने ब्रह्मपुत्र से हमारा पानी छीन लिया, पाकिस्तान को हमारे खिलाफ लगातार उकसाया, उससे हमारे संबंध बिगड़ाने में बड़ी भूमिका निभाई। हमें नए सिरे से चीन के बारे में सोचना चाहिए।
मुरली मनोहर जोशी, वरिष्ठ भाजपा नेता

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed