नेपाल में भारत और चीन, मदद के साथ-साथ शक्तिप्रदर्शन भी
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नेपाल में आई त्रासदी के बहाने भारत और चीन शक्ति प्रदर्शन से नहीं चूके। दोनों मुल्कों ने राहत और बचाव कार्य में जैसी सक्रियता दिखाई है, वह हिमालय में राजनीतिक वर्चस्व स्थापित में करने की नई मुहिम के रूप में देखा जा रहा है।
चीन ने रविवार को 62 सदस्यों की टीम नेपाल के लिए भेजी। टीम के साथ 6 खोजी कुत्ते, 20.5 टन राहत सामग्री भी भेजी गई है।
चीन ने नेपाल को लगभग 3.2 मिलियन डॉलर की आर्थिक सहायता देने का वादा किया है। चीन ने वर्ष की शुरुआत में भी नेपाल को 300 मिलियन डॉलर की सहायता देने का वादा किया था। चीन की सहायता को नेपाल में भारत का अर्थिक वर्चस्व खत्म करने के प्रयास के रूप में देखा गया था।
(तस्वीरः नेपाल की सहायता के लिए तैयार चीनी बचाव दल।)
भारत ने की नेपाल की त्वरित सहायता
शनिवार की त्रासदी के बाद भारत ने भी नेपाल को सहायता देने में सक्रियता दिखाई। भारत और राहत और बचाव कार्यों के लिए नेपाल में 'ऑपरेशन मैत्री' चला रहा है। नेपाल में 7.9 तीव्रता को भूकंप आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपातकालीन बैठक बुलाई थी। रविवार को मन की बात कार्यक्रम में भी प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत हर नेपाली का आंसू पोंछेगा।
‘ऑपरेशन मैत्री’ के तहत राहत और बचाव कार्य में जुटे 13 सी-17 और आईएल-76 विमान दिल्ली और काठमांडू के बीच लगातार उड़ान भर रहे हैं। नेपाल के दूर दराज के इलाकों में राहत पहुंचाने के लिए छह एमआई-17 और दो हल्के हेलीकाप्टरों को भी भेजा गया है।
इसके अलावा, एक हजार प्रशिक्षित कर्मी भी तैनात किए गए हैं। भारत ने कंबल, पानी की बोतलें, खाने का सामान और दवाइयां भी नेपाल भेजी है। डॉक्टरों की एक टीम भी नेपाल भेजी गई है।
हिमालय के पहाड़ों में राजनीतिक संघर्ष
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नेपाल को दिए संदेश में कहा है कि चीन नेपाल को हर संभव सहायता देगा। वॉल स्ट्रीट जर्नल से बातचीत में लंदन विश्वविद्यालय के नेपाली और हिमालयन अध्ययन विभाग के प्रोफेसर माइकल हट ने बताया कि भारत और चीन कई दशक से नेपाल को प्रभावित करने को प्रयास कर रहे हैं।
भारत ने नेपाल में मूलभूत ढांचे के विकास के लिए उन्हें एक बिलियन डॉलर को लोन भी दिया है। भारत नेपाल के जल संसाधनों का इस्तेमाल बिजली पैदा करने के लिए करना चाहता है।
अमेरिका ने भी नेपाल को एक मिलियन डॉलर की मदद देने की सहायता दी है। नेपाल में भारत और चीन की सक्रियता इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है कि ये मुल्क दक्षिण एशिया में रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है।