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कड़े फैसले लेना खूबी थी इंद्र कुमार गुजराल की
नई दिल्ली/ब्यूरो/इंटरनेट डेस्क
Updated Sat, 01 Dec 2012 08:00 AM IST
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पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल भले ही हमारे बीच न हों, लेकिन वह हिम्मती प्रधानमंत्री रहे, जो कांग्रेस के समर्थन से चल रही सरकार में भी अपनी बात खुलकर रखने और लोगों की भलाई के लिए कड़े फैसले लेने में एक पल की देर नहीं करते थे। किसी भी फैसले और सौदे में पारदर्शिता के लिए किसी भी हद तक जाने का साहस उनकी सबसे बड़ी खूबी थी।
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बलवंत सिंह रामूवालिया कहते हैं कि पंजाब को लेकर उनके दिल में हमेशा सॉफ्ट कार्नर रहा। वह अक्सर कहते थे कि मैं अपनी मां के नाम पर कुछ ऐसा करना चाहता हूं ताकि उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दे सकूं। फिर उन्होंने कपूरथला में पुष्पा गुजराल साइंस सिटी का निर्माण कराया। जालंधर दूरदर्शन केंद्र के नींव का पत्थर उन्होंने रखवाया। हालांकि बाद में इसका उद्घाटन लालकृष्ण आडवाणी ने किया।
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उनकी तीन खूबियां
1. वह अक्सर कैबिनेट के साथियों को बुलाकर उनके मंत्रालय के कामकाज की जानकारी हासिल करते थे। मंत्रियों से कहते थे कि खुलकर अपनी बात रखो, जिससे लोगों की भलाई की योजनाएं बन सकें।
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2. आज के माहौल में जब सियासी लोगों पर परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगता है, तब गुजराल का व्यक्तित्व बेहद अलग नजर आता था। प्रधानमंत्री रहते उन्होंने अपने बेटे नरेश गुजराल को सियासत में नहीं आने दिया।
3. रक्षा और विदेशी मामलों को लेकर वह बेहद गंभीर रहते थे। चाहे रूस से संबंधों के दीर्घकालिक परिणाम हों या फिर अफगानिस्तान के हालात, उस दौरान उन्होंने दक्षिण एशिया के संबंध में जो बातें कहीं वह आज सच साबित हो रही हैं।
कर्ज माफ कर पंजाब को बना लिया ऋणी
जालंधर। पूर्व प्रधानमंत्री गुजराल ने एक झटके में पंजाब और शिरोमणि अकाली दल को अपना मुरीद बना लिया था। उन्होंने पीएम पद संभालते ही पंजाब के विकास को अपना केंद्र बिंदु बनाया था। अकाली दल की मांग पर गुजराल ने पंजाब के सिर पर चढ़ा 8500 करोड़ रुपए का कर्ज माफ कर दिया था। इस पर शिअद नेताओं ने भी उनके मुकाबले उम्मीदवार न खड़ा करने का ऐलान किया। इतना ही नहीं 2004 में उनके बेटे नरेश गुजराल को जालंधर से शिअद का टिकट दिया गया। बेशक नरेश गुजराल चुनाव नहीं जीत पाए लेकिन शिअद ने नरेश को पार्टी में अहमियत दी।
बदायूं में रखी थी ब्राडगेज की आधारशिला
बदायूं। बंद गले का सफेद कोट और पैंट। चेहरे पर फ्रेंचकट दाढ़ी। उनकी बुलंद आवाज को सुनने वालों में शामिल थे अनगिनत वे लोग जिन्होंने जिले के विकास का सपना संजोया था। जी हां, हम बात कर रहे हैं 10 जुलाई, 1997 की। यह तारीख साक्षी है इंद्रकुमार गुजराल के बदायूं आगमन की। माहौल भले ही राजनीतिक रहा हो, लेकिन सुनने वालों को लगा कि वह अपने किसी बहुत नजदीकी की बात सुन रहे हैं। यह कोशिश थी गुजराल के संबोधन में। एक बात आज भी लोगों के जेहन में है कि पूर्व प्रधानमंत्री ने यहां जो पल बिताए, वह तरक्की और शैक्षिक उत्थान के विचारों से सराबोर रहे।
वह दिन आज खासकर इसलिए भी लोगों की जुबान से लेकर जेहन तक में है क्योंकि इंद्रकुमार गुजराल ने मथुरा-लालकुआं के बीच मीटरगेज रेलवे लाइन को ब्राडगेज बनाने की आधारशिला रखी थी। उस वक्त प्रधानमंत्री रहे गुजराल को सुनने पहुंचे शहर की राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों में सुभाष बत्रा भी शामिल रहे थे।
गुजराल चाहते थे बनी रहे दून की खूबसूरती
देहरादून। पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल दून की खूबसूरती पर फिदा तो थे ही। प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यावरण के संरक्षण को लेकर संजीदा भी थे। वह चाहते थे कि दून का नैसर्गिक सौंदर्य बना रहे। प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए वर्ष 1998 में दून पहुंचे गुजराल ने परेड ग्राउंड में संयुक्त मोर्चा के प्रत्याशी की जनसभा को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने दून की खूबसूरती को सराहा। तत्कालीन सपा विधायक एवं वर्तमान भाजपा नेता मुन्ना चौहान बताते हैं कि उस सभा में कांग्रेस तिवारी से पौड़ी प्रत्याशी सतपाल महाराज भी मौजूद थे।
गुजराल को पसंद था शिमला
शिमला। गुजराल को शिमला पसंद था। वह प्रधानमंत्री रहते हुए भी एक बार शिमला आए थे। 1997 में उनके शिमला दौरे के दौरान राज्य सरकार के साथ दी रिट्रीट में बैठक भी हुई थी। उस दौरान यहां कांग्रेस की सरकार थी और वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री थे। वीरभद्र सिंह ने उनसे राज्य के लिए वित्तीय पैकेज की मांग भी की थी। इसके बाद उनके सांसद बेटे नरेश गुजराल ने मशोबरा के पुरानी कोटी स्थान पर एक प्लाट भी खरीदा। इसमें इस परिवार ने एक छोटा काटेज भी बनाया हुआ है। इसी लाइन में प्रियंका वाड्रा और खुशवंत सिंह जैसे नामी लोगों की प्रापर्टी भी है।
कसौली से गुजराल का गहरा नाता
कसौली (सोलन)। इंद्र कुमार गुजराल का प्रसिद्ध पर्यटन नगरी कसौली से गहरा नाता रहा है। वह कई बार कसौली के मंकी प्वाइंट के पास स्थित अपने परिजन की कोठी मे आकर यहां की नैसर्गिक खूबसूरती को निहार कर आत्मिक शांति प्राप्त करते थे। अप्रैल 1997 से मार्च 1998 तक फुर्सत के पलों मे वे यहां कई बार आए।
गुजराल के भाई सतीश गुजराल के बेटे मोहित गुजराल का मंकी प्वाइंट कसौली में अपना घर है। पूर्व प्रधानमंत्री अपने परिजनों के साथ यहां आकर सुकून के पल बिताते थे। गुजराल 4-5 साल पहले यहां आए थे। मोहित गुजराल की कोठी का निर्माण करवाने वाले बिल्डर राकेश का कहना है कि गुजराल उस समय भी कसौली आए थे जब उनके भतीजे की कोठी बन रही थी। कसौली के कई लोगों के साथ उनकी यादें जुड़ी हुई थी। उम्र बढ़ने और अस्वस्थ होने के बाद के साथ गुजराल कसौली नहीं आ सके।
जम्मू-कश्मीर से गहरा लगाव था गुजराल को
जम्मू। पूर्व प्रधानमंत्री गुजराल का जम्मू-कश्मीर से हमेशा लगाव रहा। भले वह प्रधानमंत्री कार्यकाल का समय हो या फिर उसके पहले व बाद का। वे हमेशा रियासत में आने को लेकर उत्साहित रहते थे। रियासत के दौरे पर वे जम्मू के शक्ति नगर इलाके में रहने वाले अपने रिश्तेदारों के घर जरूर आते थे।
गुजराल के रिश्ते में पोते विक्रम गुजराल के अनुसार 1997 के मई महीने में प्रधानमंत्री शक्ति नगर स्थित कोठी नंबर एक में पहुंचे तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। अपने व्यस्त शेड्यूल के बावजूद उन्होंने परिवार के साथ करीब एक घंटा गुजारा, जिसकी अमिट यादें आज भी उनके जेहन में हैं। विक्रम बताते है कि आज भी उन्हें याद है कि जम्मू विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के बाद पूर्व प्रधानमंत्री सीधे उनके घर पर आए थे तब उनके दादा ब्रह्म दत्त और दादी पुष्पा गुजराल (जो अब दुनिया में नहीं हैं) से पुराने दिनों की यादों को साझा किया था।