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'स्वतंत्रता दिवस केवल जश्न नहीं, बल्कि आत्मविश्वास का अवसर'

Sat, 15 Aug 2015 07:24 AM IST
Updated Sat, 15 Aug 2015 07:24 AM IST
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independence Day is not only  for celebration  Ira

हमारा मुल्क आज अपनी आजादी की 69वीं वर्षगांठ मनाने जा रहा है। बैलगाड़ी से लेकर मेट्रो तक के समय में मुल्क ने बहुत कुछ देखा और महसूस किया है। हम दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है।

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सत्ता के तख्त और ताज अब मुल्क के युवा तय करते हैं। ऐसा नहीं है कि हम समस्यायों से पूरी तरह से उबर चुके हैं लेकिन वो देश जिसने 200 साल की दासता झेली उसके लिए 69 साल बहुत ज्यादा नहीं है।
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पूरा देश आज आजादी के जश्न में डूबा हुआ होगा लेकिन सिविल सेवा परीक्षा 2015 की टॉपर ईरा सिंघल आजादी के इस दिन को केवल जश्न नहीं मानती। उनका कहना है कि स्वतंत्रता दिवस केवल एक जश्न नहीं है, बल्कि उससे भी आगे युवाओं के मन में इस बात का आत्मविश्वास लाने का अवसर है जो इंसान को बंधनों से मुक्त रहने का विकल्प देती है।
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लड़कियों को और आजादी की जरुरत

independence Day is not only  for celebration  Ira

आजादी हमें वह सब कुछ करने की इजाजत देती है जो हम भयमुक्त होकर करना चाहते हैं, ताकि बेहतर भविष्य का चुनाव कर हम आगे बढ़ सकें। महिलाओं की आजादी भी इसी से जुड़ी हुई है।

यह देश की आजादी का ही परिणाम है जो समाज को इस बात के लिए प्रेरित करता है कि लड़कियों को भी आजाद हवा में सांस लेने का हक है।

हालांकि लड़कियों को अभी और आजादी की जरूरत है जो उसे घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर कुछ कर गुजरने के लिए प्रेरित करे। मुझे पूरी उम्मीद है कि एक दिन ऐसा आएगा जब समाज लड़कियों से भेदभाव नहीं करेगा और उन्हें बेहतर नजरिए से देखेगा।

अपनी सोच से देश को बदल डालें युवा

independence Day is not only  for celebration  Ira

वहीं मैग्सेसे अवार्ड विजेता अंशु गुप्ता का कहना है कि, हर भारतीय जब हिंदुस्तान की तस्वीर बदलने का बीड़ा उठाएगा तभी सही मायने में आजादी का जश्न मनेगा। मैं युवाओं से एक ही बात कहना चाहता हूं कि गलत को स्वीकारें नहीं, बल्कि आवाज उठाएं।

सरकार पर आरोप लगाने की बजाय जब सब मिलकर देश में बदलाव लाएंगे तभी देश के आसमान में तरक्की का परचम लहराएगा। देश 68वीं आजादी का जश्न मना रहा है, लेकिन अभी भी हम भूखमरी, रेप, भ्रष्टाचार की जंग लड़ रहे हैं।

भारत को दुनिया रेप कैपिटल कहती है लेकिन युवाओं को इससे बाहर निकालना होगा। जिंदगी में काम करने का मजा तब है, जब दुनिया उसका अनुकरण करे।

भारतीय इंजीनियरों को दुनिया सलाम करती है, जब वे तमाम अपनी सोच को देश के बदलाव में एक साथ खड़े होंगे तो असली आजादी के मायने भी दिखेंगे। मैं सोशल मीडिया के  माध्यम से युवाओं को जोड़ रहा हूं ताकि पर्यावरण को बचाया जा सके।

शिक्षा, स्वास्थ्य और सूचना की आजादी अभी नहीं मिली

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युवा सांसद जय पांडा का मानना हैकि 68 साल बाद भी युवाओं को मूलभूत आजादी नहीं मिल पाई है और इसी कारण वह कई परेशानियां झेल रहा है।

मेरी नजर में आजादी का मतलब मूलभूत जरूरतों की आसान उपलब्धता है, जबकि युवाओं तक प्राथमिक शिक्षा, स्वास्थ्य और सूचना का लक्ष्य हम आज भी पहुंचा नहीं पाए हैं।

जब तक हम ये हालात नहीं संभाल पाते हैं तब तक युवाओं को इसका सही लाभ नहीं मिल पाएगा। हम टीवी और अखबारों में काफी आगे बढ़े हैं, लेकिन वर्तमान में इंटरनेट सूचनाओं का खजाना है फिर भी देश में इसकी पहुंच केवल 20 करोड़ लोगों तक ही सीमित है, जो बहुत कम है।

युवाओं के सवाल भी बहुत हैं, लेकिन हम उनका समेकित हल नहीं ढूंढ पा रहे हैं। इसलिए युवाओं को फोकस करते हुए नीतियां बनाना हमारी प्राथमिकता होना चाहिए।

पुराने तौर तरीके से बाहर निकलने का वक्त

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सांसद कविता कलवकुंतला का कहना है कि आजादी के 68 साल बीत जाने के बाद देश के युवा अब और इंतजार के मूड में नहीं। चलता है जैसी मानसिकता नहीं, बल्कि युवा को अब तत्काल और सकारात्मक परिणाम चाहिए, इसलिए पुराने तौर तरीकों से काम नहीं चलेगा।

मैं मानती हूं कि हमें चाहिए कि पुराने तरीकों से बाहर निकलें। युवा पीढ़ी को वर्तमान व्यवस्था की कछुआ चाल फूटे आंख नहीं सुहा रही। यूथ को लगता है कि दुनिया का सर्वश्रेष्ठ बनने के लिए देश के पास सब कुछ है, फिर देश सर्वश्रेष्ठ क्यों नहीं है?

यह नई पीढ़ी जातीय, धार्मिक और वर्ग की सीमाओं को पार कर कर चुकी है और जनप्रतिनिधि की परिभाषा भी बदल रही है। हम जैसे प्रतिनिधि जिसे अपना कर्म बता कर फूले नहीं समा रहे, युवा पीढ़ी के लिए यह महज हमारा कर्तव्य है। नई युवा पीढ़ी दशकों से पुराना लबादा ओढ़े व्यवस्था को अब और बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

भारतीय होने की याद स्वतंत्रता दिवस पर ही क्यों?

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जूनियर विंबलडन डबल्स चैंपियन सुमित नागल का मानना है कि सही मायनों में स्वतंत्रता का मतलब आत्मा की आजादी है। मुझे गर्व है कि मैं एक भारतीय हूं। खासतौर पर बाहर रहने के बाद मुझे अपने भारतीय होने पर और भी ज्यादा गर्व होता है।

लेकिन मेरे दिमाग में हमेशा एक बात चलती रहती है कि आखिर 15 अगस्त या फिर 26 जनवरी को ही हमें अपने ‘भारतीय’ होने की याद क्यों आती है? इस गौरव को तो हमेशा अपने साथ रखा जा सकता है और इसे कभी भी मनाया जा सकता है।

आजादी का संबंध दिमाग के उस बोध से है जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के साथ बदलता रहता है। स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं होना चाहिए कि हम उसके बारे में क्या महसूस करते हैं, बल्कि इसका मतलब यह होना चाहिए कि हम अपने देश और उसके विकास के लिए क्या कर सकते हैं।

आजादी अधिकार नहीं, देश के प्रति यह हमारी जिम्मेदारी होना चाहिए। सभी को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं।

आजादी के मायने भूल रहे हैं युवा

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लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक विजेता योगेश्वर दत्त कहते हैं कि स्वतंत्रता दिवस आते ही मुझे अपने बचपन की याद आ जाती है, जब स्कूल में देश को आजाद कराने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को बारे में पढ़ाया जाता था उनके बारे में बताया जाता था।

लेकिन आज की युवा पीढ़ी को उनसे कुछ शिकायत है शायद। वह अपने पुरखों को जिन्होंने देश को आजाद कराया उन्हें भूल रहे हैं। सही मायनों में युवा पीढ़ी को इन्हें याद रखने की जरूरत है।

मेरी एक विनती यह भी है कि स्कूलों में इन स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में एक अलग किताब होनी चाहिए, जिसमें इनका इतिहास हो और बच्चे इनके बारे में जानें।

मैं तो वर्ल्ड चैंपियनशिप की तैयारियों में लगा हूं और सोनीपत में पहलवानों के साथ तिरंगा फहराकर इस दिन को को मनाऊंगा। स्वतंत्रता दिवस की बधाईयां।

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