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'दो साल में यमुना की 80 फीसदी गंदगी हो जाएगी दूर'

Thu, 17 Dec 2015 11:00 PM IST
Updated Thu, 17 Dec 2015 11:00 PM IST
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In two years, 80 percent of the river will remove dirt '

यमुना की पानी में समाई 80 फीसदी गंदगी वर्ष 2017 तक पूरी तरह हटा दी जाएगी। इसके लिए दिल्ली क्षेत्र में सर्वाधिक प्रदूषित यमुना को बचाने के लिए इंटरसेप्टर का निर्माण किया जा रहा है, वहीं सरकार ने लखबार ब्यास बांध परियोजना को मंजूरी दे दी है।

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जल संसाधन और गंगा पुनरुद्घार मंत्री उमा भारती ने लोकसभा में बताया कि इस बांध के बनने के बाद मानसून में जहां यमुना के जल को रोका जाएगा, वहीं मानसून बीतने के बाद इस बांध की मदद से यमुना में पर्याप्त जल भेजा जाएगा। इससे पानी की कमी के कारण प्रदूषण से लड़ने की शक्ति गंवा चुकी यमुना में अपनी पुरानी शक्ति लौट आएगी।
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इस दौरान उमा ने दिल्ली में 17 प्रमुख नालों के जरिए यमुना में गंदा पानी भेजा जाना जारी रहने पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इन नालों का स्थाई विकल्प ढूंढे बिना यमुना को निर्मल बनाना संभव नहीं होगा। उन्होंने इस संबंध में दिल्ली सरकार से मदद की अपील की और कहा कि अगर इन नालों का अभी से विकल्प ढूंढा गया तो वर्ष 2030 में इसका स्थाई निदान संभव हो पाएगा।
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दिल्ली के दायरे में सर्वाधिक गंदगी

In two years, 80 percent of the river will remove dirt '

जल संसाधन मंत्री ने यमुना और गंगा को हर हाल में निर्मल बनाने का फिर से लोकसभा में दावा किया। उन्होंने कहा कि यमुना को निर्मल बनाने के लिए बड़ी योजना तैयार की गई है। एक तरफ जहां दिल्ली क्षेत्र में जमा यमुना की 80 फीसदी गंदगी को दूर करने केलिए इंटरसेप्टर का निर्माण किया जा रहा है, वहीं सरकार ने लखवार-व्यास बांध परियोजना को हरी झंडी दे दी है।

मंत्री ने कहा कि यमुना की मुख्य समस्या इसमें पर्याप्त जल न होना है। इस परियोजना के पूरा हो जाने के बाद हथिनी कुंड के जरिए पूरे साल यमुना में पर्याप्त पानी रहेगा। इससे यमुना प्रदूषण से लड़ने की शक्ति फिर से हासिल कर लेगी।

यमुनोत्री से प्रयाग तक बहने वाली यमुना में दिल्ली के 20 किलोमीटर के दायरे में 80 फीसदी गंदगी है। दिल्ली के इस दायरे में यमुना के अंदर 5021.4 एमएलडी गंदगी है, जबकि इसकी शोधन क्षमता महज 3037 एमएलडी ही है। खुद उमा का कहना है कि यहां लगाए गए शोधन यंत्र अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पा रहे।

यमुना की सफाई पर दशकों से योजना तो चल रही है, मगर इस दौरान उन 17 नालों का विकल्प तैयार नहीं किया गया, जिसके जरिए कचड़ा, अपशिष्ट यमुना में समा जाते हैं। इनमें खासतौर से सबसे खतरनाक नजफगढ़ का नाला है जो अकेले ही यमुना में 30 फीसदी गंदगी डालता है।

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