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सिर्फ 45 मिनट के भीतर भारतीय सेना ने मार गिराए 100 उग्रवादी

Thu, 11 Jun 2015 02:04 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 11 Jun 2015 02:04 PM IST
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in myanmar operation army killed 100 militants in 45 minutes

म्यांमार की सीमा के भीतर भारतीय सेना की ओर से उग्रवादियों के खिलाफ किया गया ऑपरेशन 45 मिनट तक चला और इतनी ही देर में सेना ने 100 के करीब उग्रवादियों को मार गिराया।

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अंग्रेजी अखबार The Times Of India को गृह मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि सेना के हमले के बाद उग्रवादियों को संभलने का मौका नहीं मिला। उनका ये भी कहना है कि भारतीय सेना को किसी भी जवाबी कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ा और उग्रवादी एक शॉट फायरिंग नहीं कर पाए।
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इस हमले में 6 उग्रवादी घायल भी हुए हैं जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। भारतीय सेना ने जिस क्षेत्र में उग्रवादियों के खिलाफ ये कार्रवाई की उस इलाके की घेराबंदी म्यांमार सैनिकों ने की थी। (मणिपुर हमले की फाइल तस्वीर)
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सुबह 3 बजे शुरु हुआ ऑपरेशन

in myanmar operation army killed 100 militants in 45 minutes

इसके साथ-साथ सेना ने नागालैंड की सीमा पर भी 15 उग्रवादियों को मारा है। इस ऑपरेशन के बारे में म्यांमार सरकार को कई घंटे बाद तब सूचित किया गया जब कमांडो कार्रवाई अपने अंतिम चरण पर थी।

यह कार्रवाई पिछले हफ्ते उग्रवादियों द्वारा किए गए हमले का प्रतिशोध भी था। यह कार्रवाई साबित करती है कि मोदी सरकार किसी भी तरह के आतंकवाद को पनपने नहीं देगी और किसी भी कीमत पर उसे बर्दाश्त नहीं करेगी।

यह ऑपरेशन सुबह 3 बजे शुरु हुआ लेकिन भारतीय राजदूत म्यांमार के विदेश मंत्रालय को तभी सूचना दे सकते थे जब मंगलवार की सुबह दफ्तर खुलते।

उनके लिए संदेश जो आतंकियों को पनाह देते हैं

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केन्द्रीय राज्य मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि ये हमारे उन पड़ोसियों को संदेश है जो आतंकवादियों को पनाह देते हैं। सेना के इस ऑपरेशन के बाद सरकार ने सफलता की घोषणा करते हुए कहा कि यह कोई बंद ऑपरेशन नहीं था लेकिन यह एक संदेश भी है कि यदि हमें आतंकवाद के खतरों से निपटना है तो हमें ऐसे निर्णय लेने पर विवश होना पडे़गा।

सेना आधिकारिक तौर पर कहा कि हम सीमा पर हमारे पड़ोसी राष्ट्रों की सुरक्षा और अखंडता को सुनिश्चित करते हुए हम अपने राष्ट्र की सुरक्षा और अखण्डता सुनिश्चित करने के लिए हर कदम उठाएंगे।

इस कार्रवाई सफलता पूर्वक सुनिश्चित करने के लिए सैनिको को नेशनलिस्ट सोशलिस्ट काउंसिल (खापलांग) के दो शिविरों की तरफ जाने की ओर निर्देशित किया गया था जो कुछ दिन पहले ही हमले के बाद म्यांमार की सीमा में वापस लौट गए थे।

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