मोदी राज में नहीं मिलेगा सूचना का अधिकार!
अब आरटीआई के जरिए प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रपति सचिवालय सहित 34 अहम मंत्रालयों की आनन फानन जानकारी हासिल करने की बात भूल जाइये। अगर आप आज आवेदन करते हैं तो आपको जवाब पाने के लिए दो साल से अधिक समय का इंतजार करना पड़ सकता है।
यही नहीं मोदी सरकार के कार्यकाल के अंतिम दो-ढाई साल की गतिविधियों की आरटीआई के जरिए जानकारी हासिल करने के लिए तो केंद्र में नई सरकार के आने तक का इंतजार करना होगा।
दरअसल, बीते नौ महीने से खाली मुख्य सूचना आयुक्त (सीआईसी) के पद के साथ-साथ तीन सूचना आयुक्तों के पद रिक्त हैं। इनके कारण लंबित आरटीआई का अंबार लग गया है। इस समय सीआईसी के पास 38 हजार से अधिक आवेदन लंबित हैं। इनमें से 16,000 लंबित आवेदन पीएमओ, सीवीसी, कैग, डीओपीटी सहित कई अहम मंत्रालयों से जुड़े हैं।
आरटीआई को कमजोर करने की साजिश
उल्लेखनीय है कि सीआईसी की नियुक्ति में देरी का मामला अदालत में चले जाने के बाद शनिवार को आनन फानन में प्रधानमंत्री ने बैठक बुलाई। हालांकि बैठक में इस पद के लिए किसी एक नाम पर सहमति नहीं बन पाई।
आरटीआई कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सरकार आरटीआई कानून को कुंद करने और सूचनाओं के खुलासे से सियासी बखेड़ा खड़ा होने के डर से सीआईसी और सूचना आयुक्तों की नियुक्ति में देरी कर रही है।
मोदी सरकार अपने एक साल के कार्यकाल में भ्रष्टाचार का एक भी मामला सामने न आने को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बता रही है। हालांकि सच्चाई यह है कि मोदी सरकार के एक साल के कार्यकाल के दौरान आरटीआई के जरिए पीएमओ, कैग, डीओपीटी, सीवीसी और 34 मंत्रालयों की कोई भी अहम जानकारी बाहर नहीं आ पाई है। यहां तक कि प्रधानमंत्री के विदेश दौरे में हुए खर्च की जानकारी देने से भी इनकार किया जा रहा है।
'सूचनाओं को छिपाने का काम'
परंपरागत और उच्च स्तर पर अपील होने की स्थिति में इनसे संबंधित जानकारी केंद्रीय सूचना आयोग उपलब्ध कराता है। ऐसे में चूंकि बीते नौ महीने से सीआईसी का पद खाली पड़ा है, इसलिए सूचनाएं बाहर नहीं आ पा रही हैं।
सीआईसी और 10 में से तीन सूचना आयुक्तों का पद खाली होने के कारण केंद्रीय सूचना आयोग में आरटीआई आवेदनों का अंबार खड़ा होता जा रहा है।
अगर सीआईसी की नियुक्ति हो भी गई तो उसे पुरानी फाइलों को निपटाने में ही दो से ढाई साल लग जाएंगे। ऐसे में अहम मंत्रालयों, विभागों, पीएमओ, राष्ट्रपति सचिवालय, शीर्ष न्यायालयों से जुड़े नए आरटीआई आवेदनों की जानकारी के लिए कम से कम दो साल इंतजार करना होगा।
सुभाष अग्रवाल, आरटीआई कार्यकर्ता ने बताया कि भ्रष्टाचार मुक्त शासन का दावा करने वाली मोदी सरकार आरटीआई कानून को कमजोर करने और सूचनाओं को छिपाने का काम कर रही है।
जब कोई जानकारी सामने ही नहीं आएगी, तब कैसे पता चल सकेगा कि कोई सरकार कितनी पाकसाफ है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए सूचना आयुक्तों को ही वरिष्ठता के आधार पर सीआईसी का पद दिए जाने का प्रावधान किया जाना चाहिए।