अवध की धरती पर मोदी को याद आए दो-दो राम
राम मंदिर को अपने चुनावी एजेंड में हाशिए पर डाल चुकी भाजपा को रामलला की धरती पर दो-दो राम याद आए।
फैजाबाद की चुनावी जनसभा में नरेंद्र मोदी की पृष्ठभूमि में भगवान राम और विहिप द्वारा अयोध्या में प्रस्तावित राम मंदिर की तस्वीर दिखी, जबकि अंबेडकरनगर की जनसभा में पिछले वर्ष मारे गए हिंदु युवा वाहिनी के नेता रामबाबू गुप्ता की पत्नी संजू देवी मोदी के बगल में खड़ी रहीं।
हालांकि, आश्चर्यजनक ढंग से मोदी ने ना फैजाबाद में राममंदिर का जिक्र किया और ना अंबेडकरनगर में पिछले वर्ष दंगें का सबब बने बहुचर्चित रामबाबू गुप्त हत्याकांड का।
मंचों के जरिए राजनीतिक संदेश देने के माहिर
ये पहली बार नहीं था कि नरेंद्र मोदी के मंच की पृष्ठभूमि में किसी तस्वीर का प्रयोग किया गया है। मोदी को मंचों के जरिए राजनीतिक संदेश देने में माहिर माना जाता है।
पिछले वर्ष सितंबर महीने में अंबिकापुर में आयोजित एक रैली में नरेंद्र मोदी का मंच लाल किले जैसा बनाया गया था।
विश्लेषकों के मुताबिक, ऐसे मंच से मोदी ने भाषण देकर ये संदेश देने की कोशिश की थी कि देश में प्रधानमंत्री पद के विकल्प वही हैं।
मोदी के मंच पर राम मंदिर की तस्वीर
लखनऊ की रैली में नरेंद्र मोदी के मंच की पृष्ठभूमि में केवल अटल बिहारी वाजपेयी की ही फोटो थी। इसे लखनऊ में वाजपेयी की लोकप्रियता भुनाने की योजना माना गया था।
अब भाजपा ने नरेंद्र मोदी के मंच की पृष्ठभूमि में राम मंदिर और भगवान राम का प्रयोग किया। माना जा रहा है कि भाजपा ने मंच के जरिए एक बार फिर मंदिर मुद्दे को ताजा करने की कोशिश की है।
हालांकि, फैजाबाद की जनसभा में एक भी बार राम मंदिर का जिक्र नहीं किया। उन्होंने ये जरूर कहा, राम की धरती से मैं ये वचन देता हूं कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ता रहूंगा।
मोदी के मंच रामबाबू गुप्ता की पत्नी
अंबेडकरनगर में मंच पर पिछले वर्ष मारे गए हिंदु युवा वाहिनी के नेता रामबाबू गुप्ता की पत्नी संजू देवी नरेंद्र मोदी के बगल में खड़ी रहीं। हालांकि मोदी ने यहां भी रामबाबू गुप्ता या का नाम नहीं लिया।
उन्होंने रामबाबू की पत्नी की ओर इशारा करके कहा, 'आखिर इनका सिंदूर क्यों पोछ दिया गया? पति की हत्या किसने कर दी? मोदी ने कहा कि अब देश में कोई दूसरी ऐसी संजू देवी नहीं होगी, जिसे न्याय के लिए तड़पना पड़े।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष हिंदु युवा वाहिनी नेता रामबाबू गुप्ता की हत्या के बाद टांडा में दंगे हुए थे।