'पत्थर फेंकने के लिए आलम को गिलानी देता था 2 लाख'
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मसर्रत आलम की रिहाई को लेकर सियासी घमासान लगातार बढ़ता जा रहा है। इसके साथ-साथ उसको लेकर रोज नए खुलासे भी सामने आ रहे हैं।
हाल में जेल से रिहा हुए मुस्लिम लीग के चेयरमैन मसर्रत आलम को अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी 2 लाख रुपए मिलते थे। 2010 में घाटी में तेज हुई पत्थरबाजी की घटना को और भड़काने के लिए ये पैसे दिए जाते थे।
ये खुलासा राज्य पुलिस के डोज़ियर में सामने आया है। जिसके मुताबिक गिलानी ने घाटी में चल रहे प्रदर्शन को बढ़ावा देने के लिए मसर्रत आलम को हर महीने 2 लाख रुपए भिजवाता था।
ये रकम मसर्रत के करीबी शौकत हकीम और बशीर अहमद भट्ट ने लिए थे। डोज़ियर में कहा गया है कि मसर्रत को 7 सितंबर 2010 को ईद के मौके पर प्रदर्शन के लिए ढाई लाख रुपए मिले थे।
मसर्रत को गिलानी देता था पैसे
ये पूरा मामला उस समय का है जब साल 2010 में मसर्रत को पब्लिक सेफ्टी एक्ट में गिरफ्तारी के बाद छोड़ा गया था। डोज़ियर में हुए खुलासे के मुताबिक, मसर्रत की जेल से रिहाई के बाद मुस्लिम लीग के कट्टरपंथी नेता आशिक हुसैन फक्तू के साथ एक समझौता हुआ। जिसमें उसे उपाध्यक्ष बनाया बनाया गया और उसे पूरे प्रदर्शन की जिम्मेदारी सौंपी गई।
जेल से रिहाई के तुरंत बाद मसर्रत ने श्रीनगर में एक बैठक बुलाई। जिसमें उसने 'आजाद जम्मू-कश्मीर' नाम से आंदोलन की शुरूआत की।
फिलहाल इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ किया है कि मसर्रत की ताजा रिहाई के मामले में केंद्र कोई जानकारी नहीं है। साथ ही इस मुद्दे पर जो कार्रवाई की गई है वो भी स्वीकार नहीं है। फिलहाल पीडीपी इस मुद्दे पर सरकारी पहलुओं को लेकर मसर्रत की रिहाई को सही ठहराने में जुटी हुई है।