अमेरिका जासूसी मामले में भड़की भाजपा
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एक चौंकाने वाले खुलासे में पता चला है कि अमेरिका अपनी शीर्ष खुफिया एजेंसी एनएसए (नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी) के जरिए भाजपा की जासूसी करा रहा था। अमेरिका की एक अदालत ने एनएसए को यह अधिकार 2010 में दिया था।
इस खुलासे का भारत और अमेरिका के आपसी रिश्तों पर प्रभाव पड़ सकता है। खासतौर से जब मोदी के वीजा को लेकर अमेरिका और भाजपा के बीच सब कुछ सामान्य नहीं है।
एनएसए के पूर्व कांट्रैक्टर और अब व्हिसल्ब्लोअर बन चुके एडवर्ड स्नोडेन ने यह सनसनीखेज खुलासा किया है। भाजपा के अलावा अमेरिका ने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और मिस्र के मुस्लिम ब्रदरहुड की भी जासूसी करवाई थी।
भाजपा समेत 93 देशों की सरकारों का नाम
दस्तावेज में न केवल भाजपा समेत छह राजनीतिक पार्टियों बल्कि भारत सहित 193 देशों की सरकारों का भी नाम है। अमेरिका की एनएसए ने इन राजनीतिक दलों और संगठनों की जासूसी करने की इजाजत मांगी थी।
दस्तावेज में लिखा है कि विदेशी खुफिया जानकारी जुटाने के लिए एनएसए इन संस्थाओं की जासूसी करवा सकती है।
भारत और भाजपा की जासूसी कराने जाने संबंधी सवालों का सीधा जवाब नहीं देते हुए एनएसए के प्रवक्ता ने कहा कि एजेंसी राष्ट्रीय खुफिया प्राथमिकताओं के तहत विशेष निगरानी आवश्यकताओं पर विदेशी सरकारों, पार्टियों की जानकारी एकत्र करती है, जिन्हें राष्ट्रपति, नेशनल इंटेलीजेंस डायरेक्टर और अन्य विभागों को भेजा जाता है।
कौन सी राजनीतिक पार्टियां थी जद में
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सितंबर में संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में हिस्सा लेने जाने वाले हैं। उनके वहां पर अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से भी मुलाकात की अटकलें लगाई जा रही हैं।
ऐसे में इस खुलासे इस मुलाकात पर संकट के बादल मंडरा सकते हैं। भारत और अमेरिका के रिश्ते राजनयिक देवयानी को लेकर पहले से ही अच्छे नहीं हैं।
भाजपा के अलावा पाक नेता आसिफ अली जरदारी की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी, मिस्र की मुस्लिम ब्रदरहुड, लेबनान की अमाल और वेनेजुएला की बोलिवेरियन कांटिनेंटल कोऑर्डिनेटर का नाम शामिल है।
भारत ने अमेरिकी राजनयिक को तलब किया
भारत ने इस मामले में अमेरिका के एक वरिष्ठ राजनयिक को तलब किया है। बीजेपी ने कहा कि इस तरह की हरकत पूरी तरह अस्वीकार्य है। भारत ने अमेरिका से ये भी भरोसा मांगा है कि इस तरह की हरकत फिर से नहीं होनी चाहिए।
अमेरिका के बारे में इस तरह के खुलासे पार्टी के भीतर गुस्सा है और वो चाहती है कि अमेरिका को इस मामले में कड़ा संदेश दिया जाए।
कौन हैं एडवर्ड स्नोडेन
अब व्हिसल्ब्लोअर बन चुके एडवर्ड स्नोडेन पहले अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी के साथ कांट्रैक्टर के रूप में काम कर चुके हैं और उन्होंने पिछले कुछ सालों के दौरान कई खुफिया जानकारियों को सार्वजनिक किया है।
सबसे अहम बात यह है कि स्नोडेन ने कुछ दिन दिल्ली में रहकर हैकिंग की शिक्षा भी हासिल की थी।