फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   Imphal encounter: 6 years later, the admission — ‘Yes, I shot him dead, he was unarmed'

'निहत्थे युवक को फर्जी एनकाउंटर में मारा था', 6 साल बाद कुबूला

Wed, 27 Jan 2016 02:16 PM IST
Updated Wed, 27 Jan 2016 02:16 PM IST
विज्ञापन
Imphal encounter: 6 years later, the admission — ‘Yes, I shot him dead, he was unarmed'

मणिपुर की राजधानी इंफाल में करीब छह साल पहले हुए एक फर्जी एनकाउंटर के आरोपी हेड कांस्टेबल थाउनाओजाम हेरोजित सिंह ने पहली बार यह कबूल किया कि उसने जिस युवक पर गोली चलाई थी वह निहत्था था। विद्रोही संगठन पीपल लिबरेशन आर्मी (पीएलए) से जुड़े होने के शक में 22 साल के चुंगखाम संजीत मीतेई की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई थी।

विज्ञापन


इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक हेरोजित सिंह ने यह कबूल किया है कि उसने जिस युवक को गोली मारी थी, वह निहत्था था। हालांकि, उसने इस पर कोई अफसोस नहीं जताया। उसने कहा कि सिरोजित को मारने के बाद न तो उसे दुख हुआ न ही उससे सहानुभूति हुई। उसने कहा, 'मुझे आदेश दिया गया था जिसका मैंने पालन किया।'
विज्ञापन


हेरोजितन सिंह ने उस वक्त पश्चिम इंफाल के एएसपी रहे डॉ अकोईजाम झालाझीत पर आरोप लगाया कि उन्होंने मुझे आदेश दिया था। झालाझीत फिलहाल उसी जिले के एसपी हैं। हालांकि, हेरोजित के आरोपों के बारे में एसपी झालाझीत ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

मैगजीन ने किया था खुलासा

Imphal encounter: 6 years later, the admission — ‘Yes, I shot him dead, he was unarmed'

हेरोजित से जब यह पूछा गया कि आखिर इतने साल बाद आपने यह बयान क्यों दिया तो उसने जवाब में कहा, 'पिछले महीने जब मैं कोर्ट में सुनवाई के बाद वापस आ रहा था तो मुझे पुलिस के कुछ कमांडो ने मुझे उठा लिया। वे मुझे मेरे ही पुलिस स्टेशन पर ले गए (इंफाल पश्चिम पुलिस स्टेशन) और मुझे करीब 5-6 घंटे तक बैठाए रखा।'

उसने बताया, 'उन लोगों ने मुझसे मेरे गतिविधियों के बारे में पूछा कि मैं क्या करा हूं। मैं ज्यादा देर तक सुरक्षित नहीं हूं। मेरी जान को खतरा है। मुझे इस व्यवस्था में भी अब विश्वास नहीं रह गया।' मारे गए युवक संजीत की मौत के बाद उसने मां ने गुवाहाटी हाई कोर्ट में 2009 अपील दायर की थी। उसके एक साल बाद इस मामले की जांच 2010 में सीबीआई को सौंप दी गई थी।

हेरोजित उन नौ आरोपियों में से एक है जिन्होंने उस फर्जी एनकाउंटर को अंजाम दिया था। इस मामले का खुलासा तहलका मैगजीन में छपी एक रिपोर्ट में हुआ था जिसमें इस घटना से जुड़़ी कुछ तस्वीरें छापी गई थी। इन तस्वीरों में यह साफ तौर पर देखा जा सकता था कि संजीत को मैमू फार्मेसी में लाया गया था जो इंफाल के व्यस्त बीटी रोड पर स्थित है। यह घटना 23 जुलाई 2009 की थी। इस घटना के कुछ ही दिनों बाद युवक की लाश बरामद हुई थी।

नई कहानी आई सामने

Imphal encounter: 6 years later, the admission — ‘Yes, I shot him dead, he was unarmed'
इस मामले को लेकर इंफाल पुलिस ने जो रिपोर्ट फाइल की थी उसमें यह लिखा गया कि 23 जुलाई 2009 को सुबह करीब 10:30 बजे पुलिस सामु मखोंग के पास तलाशी अभियान चला रही थी, तभी एक अज्ञात युवक को रोका गया। इस दौरान उसने छोटा हथियार निकालकर पुलिस दल की ओर फायरिंग की और वहां से भाग गया। गोली चलने की वजह से पास में खड़ी एक महिला के सिर में गोली लग गई और उसकी वहीं पर मौत हो गई।

दर्ज रिपोर्ट के मुताबिक युवक भागता हुआ बीटी रोड स्थित मैमू फार्मेसी में घुस गया जिसके बाद पुलिस ने उस इमारत को चारों तरफ से घेर लिया। कुछ देर बाद पुलिस का एक दल इमारत में घुस गया और एनकाउंटर में युवक की मौत हो गई।

वहीं इस रिपोर्ट से उलट हेरोजित सिंह ने जो बयान दिया वह इससे बिल्कुल अलग है। उसने बताया कि उसे एक लोहे के कारोबारी का फोन आया जो उसका दोस्त भी था। उसने बताया कि उससे फिरौती मांगी गई। उसके बाद मैंने इसकी सूचना वायरलेस पर दे दी। जांच के बाद पुलिस टीम ने इस युवक को फॉर्मेसी के पास ही घेर लिया। जब उसकी पहचान कराई गई तो वह वही युवक निकला जिसने फिरौती मांगी थी।

'जाओ और मार दो'

Imphal encounter: 6 years later, the admission — ‘Yes, I shot him dead, he was unarmed'

हेरोजित ने बताया कि जब वह वहां पहुंचा तो युवक को पूछताछ के लिए फॉर्मेसी के अंदर ले जाया गया। इसी दौरान उस वक्त से एएसपी डॉ अकोईजाम झालाझीत वहां पहुंचे। मैं उनसे वहां मिलने गया और उन्हें पूरे घटना की जानकारी दी।

हेराजित के मुताबिक जब उसने एएसपी को यह बताया कि वह युवक वही है जिसने फिरौती की रकम मांगी थी तो झालाझीत ने उसे मारने के आदेश दिए। उसने बताया, 'मैंने इस बात पर ऐतराज जताया। मैंने कहा एनकाउंटर के लिए यह जगह ठीक नहीं है लेकिन वे नहीं माने। उन्होंने मुझे आदेश दिया कि बस मार दो।'


विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed