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कुंभ के नाम पर हड़पी जा रही है मंदिर की जमीन

Mon, 06 Jul 2015 11:04 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Mon, 06 Jul 2015 11:04 AM IST
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illegally land occupied in Nashik
महाराष्ट्र की धार्मिक नगरी नासिक में सिंहस्थ कुंभ के नाम पर मंदिर-मठ की जमीनें हड़पी जा रही हैं। इस महीने से शुरू हो रहे कुंभ मेले के लिए नासिक नगर निगम ने 350 एकड़ जमीन किराए पर अधिग्रहीत की है। लेकिन 2003 के कुंभ मेले के लिए जिन संस्थाओं से जमीन ली गई थी, उस जमीन को विभिन्न मद में आरक्षित कर मंदिर-मठ के उद्देश्य को ही समूल नष्ट करने की कोशिश की जा रही है।
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वहीं, नेताओं और प्रशासन की मिलीभगत से कुछ जमीनें बिल्डरों ने हथिया ली है। दरअसल, जिस नगर निगम के पास जमीन के संरक्षण का अधिकार था, उसी ने मनमानी की है। नासिक के तपोवन का 300 साल पुराना श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर ट्रस्ट उनमें से एक हैं, जिसकी कई एकड़ जमीन जबरन ले ली गई लेकिन उसके बदले में ट्रस्ट को कुछ नहीं मिला। मंदिर ट्रस्ट ने नगर निगम को अपनी जमीन सिर्फ कुंभ मेले के लिए दी थी। अब स्थिति यह है कि उसमें से अधिकांश जमीन नगर निगम ने हड़प ली है।
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यह मंदिर ट्रस्ट अयोध्या के मणिरामदास की छोटी छावनी की एक शाखा है। इसके मुख्य महंत नृत्यगोपालदास जी हैं, जो राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष हैं। श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर ट्रस्ट के महंत रामसनेही दास बताते हैं कि तपोवन में जहां मंदिर बना हुआ है, वहां गोशाला है और कुछ जमीन पर चारे के लिए खेती होती है। मंदिर प्रांगण का संत निवास और लांस के साथ ही जो थोड़ी बहुत जमीन बची है, उसे पार्क, रिक्रिएशन ग्राउंड और स्टेडियम आदि के लिए आरक्षित कर दिया गया है। प्राचीन सीताजी की चरण पादुका मंदिर सहित पास की जमीन भी अस्पताल के लिए आरक्षित की जा चुकी है। जबकि सन 2003 में इसका अधिग्रहण सिर्फ कुंभ मेले के लिए किया गया था।
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नासिक नगर निगम ट्रस्ट की 30 एकड़ जमीन पहले ही ले चुका है लेकिन कोर्ट के आदेश के बावजूद रकम का भुगतान नहीं कर रहा है। महंत का दावा है कि जमीन का कानूनी रिकॉर्ड मंदिर ट्रस्ट के नाम पर है फिर भी जमीन हड़पी जा रही है। आगामी 14 जुलाई को नासिक कुंभ का ध्वजारोहण होगा। पिछली बार नगर निगम प्रशासन ने कुंभ मेले के लिए 135 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था, जिसमें से 87 एकड़ जमीन का गोलमाल हो चुका है। कुछ जमीन पर निजी इमारतें तो कुछ जगह कॉलोनियां बन गई हैं।
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