फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   iit education expensive

आईआईटी की पढ़ाई हुई और महंगी

Mon, 07 Jan 2013 09:47 PM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी Updated Mon, 07 Jan 2013 09:47 PM IST
विज्ञापन
iit education expensive

देशभर के इंजीनियरिंग कॉलेजों में श्रेष्ठ माने जाने वाले आईआईटी संस्थानों में शिक्षा के लिए छात्रों को अब अपनी जेब और अधिक ढीली करनी होगी। आईआईटी ने सोमवार को अंडरग्रेजुएट छात्रों की ट्यूशन फीस 50 हजार से बढ़ाकर 90 हजार रुपये प्रति वर्ष करने को मंजूरी दे दी। हालांकि एससी और एसटी तथा स्कॉलरशिप पर पढ़ने वाले पिछड़े वर्ग के गरीब छात्रों के शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह निर्णय इसी साल से सभी आईआईटी संस्थानों में लागू होगा।

विज्ञापन


मानव संसाधन विकास मंत्री एमएम पल्लम राजू ने बताया कि आईआईटी संस्थानों के डायरेक्टरों और उच्चाधिकार प्राप्त टास्क फोर्स ने फीस में संशोधन की सिफारिश की थी। ट्यूशन फीस में वृद्धि का निर्णय इस साल अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम में प्रवेश लेने वाले छात्रों पर लागू होगा। उन्होंने कहा कि शुल्क में समय-समय पर संशोधन किया जा सकता है।
विज्ञापन


आईआईटी काउंसिल की 46वीं बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री ने बताया कि मौजूदा समय में अंडरग्रेजुएट छात्र हर साल 50 हजार रुपये सालाना ट्यूशन शुल्क दे रहे हैं। उच्चाधिकार प्राप्त टास्क फोर्स ने काकोदकर कमेटी की सुझावों को लागू करने पर विचार किया था। कमेटी ने पिछले साल ट्यूशन फीस को 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 2 से 2.5 लाख रुपये वार्षिक करने की सिफारिश की थी। आईआईटी के डायरेक्टरों और टास्क फोर्स ने इसे 90 हजार रुपये सालाना करने का फैसला किया। सत्र 2008-09 के दौरान ट्यूशन फीस को 25 हजार से 50 हजार रुपये किया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


पल्लम राजू ने पत्रकारों को बताया कि एससी और एसटी वर्ग के छात्रों के ट्यूशन शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस वर्ग के छात्रों को मेस, होस्टल और बुक बैंक जैसी सुविधाएं निशुल्क दी जाती हैं। 25 फीसदी छात्रों जिनके अभिभावकों की आय 4.50 लाख रुपये सालाना से कम है, को सौ फीसद स्कॉलरशिप दी जा रही है। आईआईटी काउंसिल के सदस्यों ने छात्रों को आसानी से लोन सुविधा मुहैया कराने पर भी जोर दिया।


अन्य फैसले

आईआईटी में रिसर्च करने वालों की संख्या साल 2020 तक 3000 से बढ़ाकर 10,000 करने का फैसला लिया गया। इसके साथ ही इन 16 संस्थानों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए मेधावी छात्रों को स्नातक की पढ़ाई पूरी करने लेने के बाद पढ़ाई के काम में लगाने की योजना को भी हरी झंडी दे दी गई है। पीएचडी का रास्ता आसान करने के लिए इसके पंजीकरण के नियमों में भी ढील दी जाएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed