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IIT-BHU ने बनाई ऐसी मशीन, जो कचरे को बना देती है पेट्रोलियम

Thu, 03 Sep 2015 08:35 AM IST
Updated Thu, 03 Sep 2015 08:35 AM IST
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iit bhu made a machine to make petroleum from garbage

आईआईटी बीएचयू ने प्लास्टिक के कचरे को पेट्रोलियम में तब्दील करने वाली मशीन तैयार की है। इस मशीन की मदद से प्लास्टिक के कचरे से द्रव्य पेट्रोलियम तैयार किया जा सकता है। इस द्रव्य पेट्रोलियम का फरनेस ऑयल के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।

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सबसे खास कि इस पेट्रोलियम की कीमत दूसरे पेट्रोलियम पदार्थों की अपेक्षा बेहद कम है। आईआईटी बीएचयू के इस अनोखे प्रयास से न सिर्फ पर्यावरण को पॉलीथिन मुक्त बनाने में मदद मिलेगी, बल्कि ईंधन की कमी को भी कुछ हद तक पूरा किया जा सकेगा।
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प्लास्टिक से पर्यावरण को होने वाले नुकसान से हर कोई वाकिफ है, बावजूद इसके प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक नहीं लग पाई है। ऐसे में आईआईटी बीएचयू ने ‘स्वच्छ वाराणसी परियोजना’ के तहत प्लास्टिक के कचरे को रिसाइकल करने के उद्देश्य से एक प्रोजेक्ट तैयार किया।

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बेहद कम लागत की मशीन की है तैयार

iit bhu made a machine to make petroleum from garbage

आईआईटी निदेशक प्रो. राजीव संगल ने इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी आईआईटी के रसायन विज्ञान विभाग के प्रो. एमए कुरैशी को दी। प्रो. कुरैशी ने तीन महीने के प्रयास के बाद प्लास्टिक के कचरे से द्रव्य पेट्रोलियम बनाने के लिए बेहद कम लागत की मशीन तैयार की है।

इस मशीन के दो भाग हैं। एक भाग में प्लास्टिक के कचरे की गंदगी साफ की जाती है, वहीं दूसरे भाग में पाइरोलाइजर की मदद से प्लास्टिक कचरे को हवा की अनुपस्थिति में गर्म कर द्रव्य पेट्रोलियम तैयार किया जाता है।


प्रो. कुरैशी ने बताया कि प्लास्टिक के कचरे से हमें जो द्रव्य पेट्रोलियम प्राप्त होता है, उसे फरनेस ऑयल (भट्टियों में इस्तेमाल किया जाने वाला तेल) की तरह पर इस्तेमाल किया जा सकता है। छोटे उद्योगों जैसे चांदी गलाने की भट्टियों, हलवाई की भट्टियों में इस द्रव्य पेट्रोलियम का इस्तेमाल किया जा सकता है।

बीएचयू के प्लास्टिक वेस्ट से बन रहा पेट्रोलियम

iit bhu made a machine to make petroleum from garbage

मिट्टी के तेल से जलने वाले स्टोव में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। इसकी लागत तकरीबन 20 रुपये प्रति लीटर पड़ती है। उन्होंने बताया कि प्लास्टिक के कचरे से प्राप्त द्रव्य पेट्रोलियम की अगर थोड़ी लागत लगाकर प्रोसेसिंग कर दी जाए तो इसका इस्तेमाल डीजल के तौर पर भी किया जा सकता है।

आईआईटी बीएचयू में तैयार इस मशीन में पेट्रोलियम पदार्थ बनाने के लिए बीएचयू के प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रो. कुरैशी ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के तहत हम अभी कैंपस के ही प्लास्टिक कचरे को एकत्र कर इससे पेट्रोलियम बनाने का काम कर रहे हैं। इससे कैंपस को बहुत हद तक पॉलीथिन फ्री करने की मुहिम भी परवान चढ़ रही है। इसके अलावा कूड़ा बीनने वालों को भी रोजगार मिल रहा है।

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