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हिंदू और देश विरोधी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल हो रहे आईआईटी-आईआईएम

Mon, 20 Jul 2015 12:36 PM IST
Updated Mon, 20 Jul 2015 12:36 PM IST
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IIT and IIM misused for anti social activities

उच्च शैक्षणिक संस्थानों में राजनीति को लेकर शुरू हुई बहस के बीच राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने आईआईटी और आईआईएम जैसे प्रतिष्ठानों को हिंदू तथा देश विरोधी गतिविधियों का अड्डा करार दिया है। संघ के मुखपत्र ऑर्गेनाइजर में लिखे लेख के अनुसार कुछ आईआईएम द्वारा सरकार के फैसलों का विरोध करने के पीछे राजनीतिक कारण हैं।

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लेख में इसके लिए कांग्रेस तथा वामदलों को जिम्मेदार ठहराया गया है। लेख में दावा किया गया है कि यूपीए शासन के दौरान ही पवित्र शहर हरिद्वार में पड़ने वाली आईआईटी रुड़की में मांसाहारी भोजन परोसना शुरू किया गया।
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वहीं एनआईटी राउरकेला में छात्रों को सामुदायिक हॉल में पूजा करने से रोका गया। इन घटनाओं से जाहिर होता है कि जनता के पैसों से और सरकार की मदद से चलने वाले ये संस्थान देश और हिंदू विरोधी कार्यों का केंद्र बन गए हैं। कम नैतिकता वाले शिक्षक छात्रों को बरगला रहे हैं।
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संस्थानों में राजनीति के लिए कांग्रेस-वामदलों जिम्मेदार

IIT and IIM misused for anti social activities

संघ का मानना है कि प्रतिष्ठित संस्थानों पर अब भी कांग्रेस तथा वामदलों का कब्जा है। ये दोनों पार्टियां बोर्ड ऑफ गवर्नर और निदेशकों द्वारा किसी संस्थान पर वैचारिक नियंत्रण पाने में माहिर हैं।

संघ ने विभिन्न मुद्दों पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय की आलोचना करने के लिए आईआईटी बांबे के बोर्ड ऑफ गवर्नर के पूर्व अध्यक्ष तथा जाने-माने परमाणु वैज्ञानिक अनिल काकोदकर और आईआईएम अहमदाबाद के अध्यक्ष एम नाइक पर भी निशाना साधा है।

काकोदकर पर हमला करते हुए कहा गया है कि उन्होंने स्मृति ईरानी पर आईआईटी निदेशकों की नियुक्ति को हल्के में लेने का आरोप लगाया था लेकिन आईआईटी मुंबई के शिक्षकों तथा छात्रों द्वारा मनाए गए ‘किस ऑफ लव’पर एक शब्द नहीं कहा।

पत्र ने शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे बदलावों पर सरकार का पक्ष लेते हुए कई तर्क पेश किए हैं। इसमें कहा गया है कि प्रस्तावित बिल के पास होने के बाद राजनीतिक दलों के लिए किसी संस्थान के निदेशक और अध्यक्ष की नियुक्ति पर नियंत्रण करना कठिन हो जाएगा। इसमें एक प्रावधान है, जिसके तहत ये नियुक्तियां संस्थान के विजिटर यानी राष्ट्रपति की मंजूरी से होंगी। इसलिए इसका विरोध किया जा रहा है।

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