बनारस की सीमा पार करनी है तो परमिट नहीं, ‘तोते’ की जरुरत
‘तोता, मैना, शेर, केला, आम, पपीता और अमरूद...’ ये तथाकथित टोकन कोड हैं, जो ट्रकों के लिए बाकायदा उनकी तस्वीर के साथ जारी किए गए हैं। इन फोटोयुक्त टोकन के अलग-अलग दाम हैं और उस आधार पर सहूलियतें भी अलग-अलग। ये टोकन दिखाकर सैकड़ों ट्रक आसानी से रोजाना बनारस की सीमा पार करते हैं।
कभी उनके रजिस्ट्रेशन या परमिट के कागजात की चेकिंग नहीं होती। टोकन के इस खेल में हर महीने पांच करोड़ रुपये के राजस्व की चपत लग रही है। शनिवार को एसपी ट्रैफिक डॉ. बीएन तिवारी ने यह मामला उजागर किया।
बताया कि ट्रैफिक विभाग और आरटीओ की मिलीभगत से प्रतिमाह पांच करोड़ रुपये की हानि सरकारी राजस्व को पहुंचाई जा रही है। जल्द ही समूचे मामले का बड़े पैमाने पर खुलासा करेंगे, उससे पहले मंडलायुक्त को पूरे मामले की रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
कर्मी भी है संलिप्त
अपने कार्यालय में पत्रकारों के सामने एसपी ट्रैफिक ने ट्रकों की जांच के दौरान पकड़ा गया तथाकथित मैना टोकन भी दिखाया। ‘मैना’ की तस्वीर वाले इस कार्ड के बारे में उन्होंने बताया कि यह सितंबर महीने का आरटीओ की ओर से जारी तथाकथित टोकन है, जिसे मात्र 1500 रुपये में खरीदकर कोई भी ट्रक महीने भर बनारस से आ-जा सकता है।
उसके कागजात और परमिट की कहीं भी जांच नहीं होगी। इसी तरह कई और कोड वाले टोकन जारी किए गए हैं। एसपी ट्रैफिक ने कहा कि इस गोरखधंधे में यातायात विभाग के कर्मी भी संलिप्त हैं।
जिन्हें चिह्नित करने का काम किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि बनारस में अपने तैनात रहते वह इस खेल में शामिल हर एक शख्स बेनकाब करेंगे। इसके लिए जल्द ही अभियान शुरू करने की तैयारी है।
वहीं संभागीय परिवहन अधिकारी बृजेश सिंह ने बताया कि ऐसी किसी प्रकार की बात उनके सामने नहीं आई है। यदि ऐसा है तो समूचे मामले की जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी होंगे उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। परिवहन विभाग न तो पिछली तिथि में ऑटो की परमिट जारी करता है और न ही ट्रकों को टोकन देता है।