फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   if u have insurance then would not say oh my god

इंश्योरेंस है तो नहीं कहना होगा ‘ओ माई गॉड’

Thu, 15 Nov 2012 11:53 PM IST
आगरा/अजय दुबे
आगरा/अजय दुबे Updated Thu, 15 Nov 2012 11:53 PM IST
विज्ञापन
if u have insurance then would not say oh my god

कार का इंश्योरेंस करना हो या हृदय रोग होने पर मेडीक्लेम लेना। अलग- अलग कंपनियों की अलग अलग पॉलिसी। इंश्योरेंस प्रीमियम के रेट भी अलग और क्लेम की कार्रवाई भी। लेकिन रिस्क अलग-अलग होने पर प्रीमियम एक समान क्यों? ऐसे सवालों का हल एक्चूरियल साइंस में ढूंढा जा रहा है। इसके तहत फजी लॉजिक से इंश्योरेंस प्लान तैयार किया जा रहा है।

विज्ञापन


इसके अमल में आने के बाद हादसा होने पर ग्राहक और इंश्योरेंश कंपनी को ‘ओ माई गॉड’ नहीं कहना होगा। क्योंकि इसमें रिस्क के आधार पर प्रीमियम की व्यवस्था होगी। विवि के कंप्यूटर साइंस विभाग इस पर काम कर रहा है। यह इंश्योरेंस कंपनी और ग्राहक दोनों के लिए फायदेमंद होगा।
विज्ञापन


‘ओ माई गोड’ मूवी में भूकंप के झटके से दुकान ढह जाने पर इंश्योरेंस कंपनी क्लेम नहीं देती है। कारण कंपनी भूकंप को एक्ट ऑफ गॉड का हवाला देती है। इस तरह की तमाम विसंगतियां इंश्योरेंस प्लान में हैं। रजिस्ट्रेशन ऑफ इंडियन इंश्योरेंस कंपनी (आईआरडीए) के रेगूलेशन के बाद भी इन पर कोई फर्क नहीं पड़ा।
विज्ञापन
विज्ञापन


ऐसे में विश्व स्तर पर फजी लॉजिक से एक्चूरियल साइंस से रिस्क के हिसाब से इंश्योरेंस प्लान तैयार करने पर काम चल रहा है। विवि के कंप्यूटर साइंस के डा. संजीव कुमार की टीम ने कार और हृदय रोगियों के लिए इंश्योरेंस प्लान तैयार किया है। इसमें तीन तरह के रिस्क तैयार किये गये हैं। अधिक, मध्यम और कम रिस्क के आधार पर प्रीमियम भी कम ज्यादा है।

कार ही हालात से तय होगा रिस्क
कार कितने किलोमीटर चली है। कार चलाने वाले व्यक्ति का धंधा क्या है। कार का रंग और सड़कें कैसी हैं। इस तरह रेटिंग कर रिस्क तैयार किया जाएगा। इससे कम रिस्क वाली कार का प्रीमियम कम होगा और ज्यादा रिस्क वाली कार का ज्यादा।

हेल्थ इंश्योरेंस में भी रिस्क का आकलन
इसी तरह हृदय रोगियों के लिए उम्र और किसी बीमारी होने के आधार पर प्रीमियम तय नहीं होगा। बल्कि, ब्लड प्रेशर, कॉलेस्ट्रोल, वेट, शुगर लेवल और स्मोकिंग के आधार पर रिस्क तय करने के बाद प्रीमियम भी कम ज्यादा तय होगा।

कंपनी के साथ ग्राहकों को भी फायदा
डॉ. संजीव ने बताया कि एक्चूरियल साइंस इंश्योरेंस कंपनी के लिए प्लान तैयार करती है। अमेरिका के गणितज्ञ लॉत्फी ए जादेह के इफजी लॉजिक सिद्धांत से प्लान तैयार करने पर कंपनी के साथ ग्राहकों को भी फायदा होगा। फजी लॉजिक से अलग अलग मापदंड से रिस्क का आकलन आसानी से किया जा सकता है।  इससे कम रिस्क वाले कम प्रीमियम देना होगा और अधिक रिस्क वाले को अधिक।


'रिस्क के आधार पर जनरल इंश्योरेंस का प्रीमियम तय नहीं होता है। इससे कम रिस्क वाले लोगों को भी अधिक रिस्क वाले लोगों के बराबर प्रीमियम जमा करना पड़ता है। अलग अलग कंपनियों का इंश्योरेंस का प्रीमियम भी अलग अलग है।'
- एक जनरल इंश्योरेंस कंपनी के मैनेजर

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed