शत्रु बोले, 'मैं बीजेपी में था, हूं और रहूंगा'
भाजपा नेता शत्रुघन सिन्हा ने हाल के दिनों में शुरू हुए विवादों को लेकर फिर एक बयान दिया है। उन्होंने इन बयानों को मुजरा की संज्ञा दी है। उनका कहना है कि उन्हें जो बोलना था उन्होंने बोल दिया, अब भाजपा के बुजुर्ग नेता बोल रहे हैं। उनका यह बयान बिहार विधानसभा चुनावों में भाजपा को मिली करारी शिकस्त और पार्टी के स्थानीय नेताओं को नजरअंदाज करने के बाद शीर्ष नेतृत्व पर उठ रहे सवाल के बाद आया है।
महाराष्ट्र के नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सिन्हा ने कहा कि पार्टी के कुछ नेता मुझे पार्टी से निकालने की बात कर रहे हैं। आखिर क्या गुनाह किया है मैंने? उनका मानना है कि मैं बागी हूं। पार्टी के विरूद्ध ऐसा कौन सा काम किया है? क्या मेरे अंदर वरिष्ठता और समझदारी नहीं है जो मैं ऐसा काम करूंगा। उन्होंने कहा कि अगर सच कहना बगावत तो समझो हम भी बागी हैं।
सिन्हा ने कहा कि यदि मैं कहता हूं कि दाल की बढ़ती कीमत को नियंत्रित करना चाहिए तो क्या मैं गलत कहता हूं? मैंने यह देश, मेरी पार्टी और जनता की भलाई के लिए कहा था और इसके लिए लोग मुझे बागी कह रहे हैं। उनको लेकर पार्टी में चल रहे विवाद को लेकर वह काफी नाराज दिखाई दिए और हर मुद्दे पर पार्टी शीर्ष कमान को घेरने की कोशिश की। हालांकि उन्होंने पार्टी के प्रति अपनी सच्ची प्रतिबद्धता जताते हुए कहा, 'मैं बीजेपी में था, हूं और रहूंगा।'
'देश को तोड़ने की कोशिश'
गौरतलब है कि हाल ही में भाजपा के बुजुर्ग नेताओं ने एक साझा पत्र जारी करते हुए बिहार विधानसभा चुनावों में भाजपा की हार की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि हार के लिए सबको जिम्मेदार बताकर किसी को बचाया नहीं जा सकता। इन बुजुर्गो में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, शांता कुमार और यशवंत सिन्हा जैसे नेता शामिल थे। जब उनसे इस साझा पत्र के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मुझे जो बोलना था मैंने बोल दिया अब बुजुर्ग बोल रहे हैं।
बिहार चुनाव प्रचार में स्थानीय नेताओं की उपेक्षा करने के मुद्दे पर सिन्हा ने कहा कि अगर आप क्षेत्रीय लोगों को अहमियत नहीं दे रहे और जगह जगह से लोगों को ला रहे हैं तो आप सीधे तौर पर वहां के लोगों को मायूस कर रहे हैं। इसका परिणाम यह हुआ कि आपको बिहार में हार का सामना करना पड़ा।
सिन्हा ने बिहार चुनाव को दिल्ली के विधानसभा चुनावों से जोड़ते हुए बोले कि दिल्ली के चुनाव में क्या हुआ? लोग आते गए, हमारे मंत्री भी आए लेकिन परिणाम क्या हुआ? उन्होंने हाल के दिनों में देश में बढ़ रही असहिष्णुता पर भी निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग देश को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। देश को तोड़ने के लिए क्या-क्या नहीं बोला लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।