'गठबंधन जीता तो मैं ही बनूंगा मुख्यमंत्री'
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शिव सेना के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पहली बार सार्वजनिक मंच से मुख्यमंत्री बनने की ख्वाहिश जताई है। उद्धव ने कहा है कि मतदाताओं को उन्हें मुख्यमंत्री बना कर अफसोस नहीं होगा।
सीटों के बंटवारे के मामले में भाजपा से रिश्तों में खटास आने के बाद उन्होंने शिवसेना को आगे रख कर बातें करनी शुरू की हैं। उन्होंने कहा कि अगर विधानसभा चुनाव में शिवसेना और भाजपा का केसरिया गठबंधन सत्ता में आता है तो मुख्यमंत्री शिवसेना का ही होगा।
एक न्यूज चैनल की ओर से आयोजित कार्यक्रम में उद्धव ने चुनाव जीतने पर मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा, मतदाताओं ने अगर मुझे मुख्यमंत्री चुना तो उन्हें कतई अफसोस नहीं होगा।
2014 के चुनावों में मिली है भारी जीत
उन्होंने यह माना कि वह मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं लेकिन यह भी कहा कि वह जिम्मेदारी लेने से पीछे नहीं हटेंगे। उनका कहना था यह लोगों पर निर्भर है कि वह मुख्यमंत्री के तौर पर किसे देखना चाहते हैं।
भाजपा से सीटों के बंटवारे के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनकी ओर से इस मामले में कोई दिक्कत नहीं है। उसके साथ सीटों के बंटवारे की बातचीत चल रही है।
उद्धव ने बार-बार इस बात की ओर इशारा किया कि असर घटने के बावजूद केसरिया गठबंधन में शिवसेना खुद को ऊपर रखेगी। 2009 के विधानसभा चुनाव में शिवसेना ने महाराष्ट्र की 160 सीटों में से 44 सीटें हासिल की थी।
भाजपा ने 46 सीटों पर जीत हासिल की थी। भाजपा ने 119 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए थे। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 23 सीटें हासिल हुई थीं । शिवसेना को 18 सीटें मिली थीं।
महायुति में शामिल दल संयम रखें
शिवसेना ने कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अधिक कामना तलाक की ओर ले जाती है। उसका इशारा महायुति की ओर है।
शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में कहा है कि इस गठबंधन में शामिल सभी दलों को लालच छोड़ कर सीटों के मामले में ज्यादा संयम बरतने की जरूरत है।
सामना में शिवसेना ने कहा है कि जो पार्टियां महायुति में रहने के लिए ज्यादा सीटों की मांग कर रही हैं वे गलत कर रही हैं।