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'जिन्हें खतरा नहीं, उन्हें क्यों दी गई पुलिस सुरक्षा'

Thu, 17 Jan 2013 11:37 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Thu, 17 Jan 2013 11:37 PM IST
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if not threat why give police security

पुलिस सुरक्षा के दुरुपयोग पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए सरकार से पूछा है कि जिन सांसदों, विधायकों या उन सभी लोगों को जिन्हें कोई खतरा नहीं है, आखिर उन्हें बेवजह सुरक्षा क्यों दी गई है। सर्वोच्च अदालत ने केंद्र व सभी राज्य सरकारों से कहा कि वह सुरक्षा सुविधा लेने वालों के नाम और उसके खर्च का ब्यौरा तैयार करें, जिसका खर्च सरकार वहन करती है। सर्वोच्च अदालत ने लालबत्ती के उपयोग पर सरकार की ओर से कोई कदम न उठाए जाने पर भी नाराजगी जताई है।

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जस्टिस जीएस सिंघवी की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सिर्फ उन्हीं लोगों को सुरक्षा मिलनी चाहिए, जो महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर हैं या जिनके जीवन को खतरा है। राज्य के मुखिया, प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति, स्पीकर, मुख्य न्यायाधीश, संवैधानिक प्राधिकार के नेतृत्व करने वालों और उनके समान राज्यों में पदेन लोगों को सुरक्षा दी जानी चाहिए। मगर उन लोगों को लालबत्ती और सुरक्षा क्यों मिली हुई है, जो इसकी पात्रता भी नहीं रखते।
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यहां तक कि मुखिया, सरपंच भी लालबत्ती लगाकर घूमते हैं। सभी राज्यों को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश जारी करते हुए पीठ ने कहा कि जवाब में सुरक्षा पाने वाले व्यक्ति का नाम और पद, सुरक्षा में तैनात लोगों की संख्या और राज्य सरकार की ओर से किए गए खर्च का ब्यौरा तलब किया है।
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सर्वोच्च अदालत ने कहा कि सरकार आखिर बेवजह सुरक्षा सुविधा का उपभोग करने वालों के संबंध में कोई निर्णय क्यों नहीं लेती और यह तय क्यों नहीं करती कि कौन लाल बत्तियों का उपयोग कर सकता है। कुछ लोगों के तो घर वाले गांवों में रहते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा में दर्जनों लोग लगे हुए हैं। पीठ ने यह टिप्पणी उत्तर प्रदेश के निवासी अभय सिंह की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान की।

याचिका में लाल बत्ती और पुलिस सुरक्षा के दुरुपयोग पर सवाल उठाया गया है। हालांकि केंद्र सरकार पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी है कि सुरक्षा सिर्फ कुछ विशेष लोगों के लिए नहीं तय की जा सकती है। सुरक्षा लोगों को मिली जान से मारने की धमकियों के आधार पर भी मुहैया करायी जानी चाहिए।

बेवकूफी भरे जवाब पर दिल्ली पुलिस को फटकार
सर्वोच्च अदालत ने सुरक्षा मुहैया कराने के मामले में बेवकूफी भरे जवाब पर दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई। राजधानी की पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा है कि सरकार के शीर्ष अधिकारियों को खतरे की वजह से नहीं, बल्कि निष्पक्ष और साहसिक निर्णय लेने की वजह से सुरक्षा मुहैया करायी गई है।


आठ पन्नों के हलफनामे पर गौर करने के बाद जस्टिस जीएस सिंघवी की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली पुलिस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि अदालत इसे तिरस्कार की हद तक जाकर नजरअंदाज करती है। पीठ ने दिल्ली पुलिस के उपायुक्त (मुख्यालय) की खिंचाई करते हुए कहा कि हमारा फैसला सुरक्षा के लिहाज से कैसे साहसिक हो सकता है। क्या यह अधिकारी की समझ का स्तर है। वह जरूर आईपीएस अधिकारी होगा और उसने आईपीसी और सीआरपीसी जरूर पढ़ी होगी।

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