तो बनारस को ही अपना 'घर' बनाएंगे मोदी!
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गुजराती स्वाभिमान को अपनी राजनीतिक पूंजी बनाकर भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बन चुके नरेंद्र मोदी लोकसभा चुनावों के बाद बनारसी बाबू बनने की तैयारी में हैं।
बनारस (वाराणसी) और बड़ौदा(वड़ोदरा) दो जगह से चुनाव लड़ रहे नरेंद्र मोदी अगर दोनों जगह से चुनाव जीतते हैं और केंद्र में उनके नेतृत्व में भाजपा गठबंधन की सरकार बनती है, तो मोदी वाराणसी की लोकसभा सीट अपने पास रखेंगे और वड़ोदरा की सीट छोड़कर अपने बेहद भरोसेमंद अमित शाह को वहां से चुनाव लड़ाकर लोकसभा में लाएंगे।
मोदी वड़ोदरा की बजाय वाराणसी के सांसद बनकर ही भाजपा गठबंधन सरकार का नेतृत्व करेंगे, इसका फैसला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने कर लिया है।
साल 2017 के विधानसभा चुनावों की तैयारी
यह जानकारी देने वाले संघ केएक पदाधिकारी के मुताबिक नरेंद्र मोदी को उत्तर प्रदेश और वाराणसी से चुनाव लड़ाने का निर्णय संघ ने ही लिया था। अब यह फैसला भी संघ ने ही किया है कि दोनों जगह से जीतने के बाद मोदी वाराणसी को ही अपनी सियासी कर्मभूमि उसी तरह बनाएंगे जैसे अटल बिहारी वाजपेयी ने 1991 का चुनाव जीतने के बाद लखनऊ को बनाया था।
संघ के एजेंडे में अयोध्या, मथुरा और काशी तीनों का अहम महत्व है। संघ नेतृत्व चाहता है कि लोकसभा चुनावों के बाद मोदी संघ के वैचारिक एजेंडे को धार दें। इसलिए जरूरी है कि वह वाराणसी की सीट अपने पास रखें।
इससे जहां पूर्वांचल में भाजपा मजबूत होगी, वहीं देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में होने वाले 2017 के विधानसभा चुनाव में भी इसका भाजपा को जबर्दस्त फायदा होगा। मोदी केवाराणसी में बने रहने से बिहार में भी भाजपा को फायदा होगा और 2015 के विधानसभा चुनावों में भाजपा अकेले दम पर वहां सरकार बनाने केलिए चुनाव लड़ेगी।
गुजरात की सीमा से बाहर आएंगे मोदी
संघ नेतृत्व अब मोदी को गुजरात की सीमाओं से बाहर लाना चाहता है। उसकी कोशिश अब गुजरात में नया नेतृत्व तैयार करने की है। इसलिए अगर मोदी प्रधानमंत्री बनकर दिल्ली आ जाते हैं तो संघ उन्हें वाराणसी का सांसद बनाकर उन्हें गुजरात की स्थानीय राजनीति से दूर भी करना चाहता है।
संघ की कोशिश होगी कि मोदी केबाद गुजरात का मुख्यमंत्री उसकी अपनी पसंद का ही बने। गुजरात में विश्व हिंदू परिषद के उग्र नेता प्रवीण तोगडिय़ा से लेकर विहिप और संघ के कई नेताओं का मोदी से टकराव जगजाहिर है। ये नेता भी चाहते हैं कि अगर मोदी राष्ट्रीय राजनीति में आते हैं तो गुजरात को उनके प्रभाव से मुक्त किया जाए।